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Chaitra Navratri Eighth Day: मां महागौरी की पूजा कब, क्यों और किस मंत्र से करें? जानें विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Chaitra Navratri 2025Eighth Day Maa Mahagauri: शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन किसकी पूजा होगी, इस दिन का शुभ मुहूर्त योग और तिथि

Suman  Mishra
Published on: 4 April 2025 11:27 AM IST
Chaitra Navratri  2025 Eighth Day
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Chaitra Navratri 2025 Eighth Day:चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन मां महागौरी की पूजा :चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप को समर्पित होता है। यह दिन महाअष्टमी तिथि के नाम से भी जाना जाता है और नवरात्रि के नौ दिनों में इस दिन का विशेष महत्व होता है। इस दिन देवी के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा विधिपूर्वक की जाती है।

इस दिन मां दुर्गा के महागौरी रूप का पूजन किया जाता है। माता रानी का यह रूप अलौकिक है। इस रूप की सुंदरता अतुलनीय है और सुंदर,अति गौर वर्ण होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है। महागौरी की आराधना( Worship) से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं, समस्त पापों का नाश होता है, सुख-सौभाग्य की प्राप्‍ति होती है और हर मनोकामना पूर्ण होती है।

चैत्र नवरात्रि में मां महागौरी का स्वरूप

चैत्र नवरात्रि के आंठवे दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस साल मां महागौरी की पूजा की जाएगी। नवरात्रि के आंठवे दिन कन्या पूजन किया जाता है। मां महागौरी का रंग अंत्यत गोरा है और इनकी चार भुजाएं हैं और मां बैल की सवारी करती हैं। मां का स्वभाव शांत है। तो जानते हैं मां महागौरी की स्वरूप, पूजा, विधि, मंत्र, भोग, फूल, कथा

चन्द्र के समान अत्यंत श्वेत वर्ण धारी महागौरी मां दुर्गा का आठवां स्वरुप हैं। नवरात्रि के आठवें दिन देवी महागौरा की पूजा की जाती है। ये शिवजी की अर्धांगिनी है। कठोर तपस्या के बाद देवी ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया था। देवी महागौरा का शरीर बहुत गोरा है।महागौरी के वस्त्र और आभूषण श्वेत होने के कारण उन्हें श्वेताम्बरधरा भी कहा गया है । महागौरी की चार भुजाएं है जिनमें से उनके दो हाथों में डमरु और त्रिशूल है और अन्य दो हाथ अभय और वर मुद्रा में है । माता का वाहन वृष है।

मान्यता के अनुसार भगवान शिव को पाने के लिए किये गए कठोर तप के कारण मां पार्वती का रंग काला और शरीर क्षीण हो गया था, तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव ने मां पार्वती का शरीर गंगाजल से धोया तो वह विद्युत प्रभा के समान गौर हो गया। इसी कारण मां को महागौरी के नाम से पूजते हैं ।

ये अमोघ फलदायिनी हैं और इनकी पूजा से भक्तों के पाप धुल जाते हैं। पूर्वसंचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना और आराधना करना कल्याणकारी होता है। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं। इन सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए मां के पूजन में इस मंत्र का जाप करना चाहिए।अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए मां गौरी को चुनरी भेंट करती है। देवी महागौरी का ध्यान, स्रोत पाठ और कवच का पाठ करने से 'सोमचक्र' जाग्रत होता है जिससे संकट से मुक्ति मिलती है और धन, सम्पत्ति की वृद्धि होती है।

नवरात्रि में माता महागौरी मंत्र

मंत्र: या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तै नमस्तै नमस्ते नमो नमः

बीज मंत्र - श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:

प्रार्थना मंत्र - श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचि:, महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

चैत्र नवरात्रि अष्टमी शुभ मुहूर्त

नवरात्रि महा अष्टमी तिथि -अष्टमी तिथि 07:26 PM तक उपरांत नवमी

रवि योग- Apr 06 06:18 AM - Apr 07 06:17 AM

सर्वार्थ सिद्धि योग- पूरे दिन

अभिजीत मुहूर्त - 12:04 PM – 12:54 PM

अमृत काल - 03:06 AM – 04:43 AM

ब्रह्म मुहूर्त - 04:42 AM – 05:30 AM

मां महागौरी की पूजा विधि

अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और इसके बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र धारण करें। प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।मां महागौरी की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से शुद्ध करें।देवी को श्वेत वस्त्र, सफेद पुष्प और नारियल अर्पित करें।मां को रोली-कुमकुम लगाएं और मिठाई, पंचमेवा, फल, काले चने का भोग लगाएं।आरती करें और क्षमा याचना करें।कन्या पूजन का विशेष महत्व है। 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें उपहार दें।

चैत्र नवरात्रि माता महागौरी का प्रिय भोग, रंग और फूल

मां महागौरी को नारियल का भोग बहुत प्रिय है। साथ ही देवी मां महागौरी का प्रिय फूल मोगरा माना जाता है। मान्यता है कि ये दो चीजें देवी मां महागौरी को अर्पित करने पर वैवाहिक जीवन में मिठास आती है। साथ ही बता दे कि नवरात्रि के आठवें दिन महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा में श्वेत या जामुनी रंग बहुत शुभ माना गया है।

चैत्र नवरात्रि माता महागौरी की कथा

मां महागौरी ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए देवी पार्वती के रूप में कई सालों तक कठोर तपस्या की। दरअसल बता दे कि एक बार भगवान शिव की बातों से मां पार्वती के मन को बहुत दुख पहुंचा था, जिसके बाद मां पार्वती तपस्या में लीन हो गई। इस दौरान जब भगवान शिव के पास मां पार्वती नहीं आई तो शिव जी खुद मां पार्वती को ढुंढने जाते हैं, जहां मां पार्वती को देखकर भगवान शिव हैरान रह जाते हैं। दरअसल बता दे कि मां पार्वती का रंग श्वेत और कुन्द के फूल की तरह दिखाई देता है। जिसके बाद भगवान शिव जी उनके वस्त्र और आभूषण से खुश होकर देवी उमा को गौर वर्ण का आशीर्वाद देते हैं।

महागौरी का स्वरूप

महागौरी की ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥

पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्।

वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥

पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।

मंजीर, हार, केयूर किंकिणी रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥

प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वाधरां कातं कपोलां त्रैलोक्य मोहनम्।

कमनीया लावण्यां मृणांल चंदनगंधलिप्ताम्॥

महागौरी स्तोत्र पाठ

सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।

ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥

सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्।

डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥

त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।

वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

मां महागौरी की कवच

ओंकारः पातु शीर्षो मां, हीं बीजं मां, हृदयो।

क्लीं बीजं सदापातु नभो गृहो च पादयो॥

ललाटं कर्णो हुं बीजं पातु महागौरी मां नेत्रं घ्राणो।

कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा मा सर्ववदनो॥

इस मंत्र या बीज मंत्र का जाप करें...

श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।

महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोदया॥

अष्टमी के दिन मां को चुनरी चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से महिलाओं के सौभाग्य, वैवाहिक सुख और सुख-शांति के लिए मां से प्रार्थना का दिन है।

"सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥"

इस मंत्र के उच्चारण के पश्चात महागौरी देवी के विशेष मंत्रों का जाप करें और मां का ध्यान कर उनसे सुख, सौभाग्य हेतु प्रार्थना करें।

इस समय न करें महागौरी की पूजा

आज रवि और सर्वाथसिद्झि योग के साथ कई शुभ मुहूर्त है फिर भी इन मुहूर्तों में देवी पूजा और कन्या पूजन करने से फल मिलता है।अष्टमी मे देवी दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा के साथ सूर्य देव की आराधना करने से कुंडली मजबूत होता है।धार्मिक मान्यता है मां की पूजा करने से कोई भी बाल बाका नहीं कर सकता है। और मां के सामने तो दुनिया झुकती है तो शनि देव भी दुर्गा देवी की पूजा से शांत रहते है। अशुभ प्रभाव को दूर करे शांति प्रदान करते है।

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