हस्तरेखा: हाथ में है ऐसी रेखा व पर्वत तो व्यक्ति होता है कुटिल व क्रूर

यदि पर्वत अधिक उभार वाला हो और रेखा कटी या टूटी हो तो व्यक्ति अभिमानी, स्वार्थी, क्रूर, कंजूस और अविवेकी होता है। यदि हथेली में सूर्य पर्वत शनि की ओर झुका हो तो व्यक्ति जज एवं सफल अधिवक्ता होता है

जयपुर: भविष्य में हम क्या करेंगे, हमारा जीवन कैसा रहेगा। यह सब हम कुंडली या फिर हाथ की रेखाओं से जानते है।हाथ में रेखाएं जितना स्पष्ट व साफ रहेगी हमारे जीवन में उतना ही संघर्ष कम होगा। हमारे भूत, भविष्य व वर्त्तमान का लेखा जोखा हाथ की रेखा व पर्वतों में है।

अनामिका उंगली के मूल में सूर्य का स्थान होता है। सूर्य पर्वत पर जाली हो तो गर्व करने वाला, लेकिन कुटिल स्वभाव का होता है। ऐसा व्‍यक्‍ति किसी पर भी विश्वास नहीं करता। सूर्य पर्वत तथा बुध पर्वत के संयुक्त उभार की स्थिति में योग्यता, चतुराई तथा निर्णय शक्ति अधिक होती है। ऐसा व्‍यक्‍ति श्रेष्ठ वक्ता, सफल व्यापारी या उच्च स्थानों का प्रबंधक होता है।

ऐसे सूर्य का उभार जितना अधिक होगा, प्रभाव भी उतना ही अधिक मिलेगा। सूर्य पर्वत का उभार अच्छा, स्पष्ट होने के साथ सरल सूर्य रेखा हो तो व्यक्ति श्रेष्‍ठ प्रशासक, पुलिसकर्मी, सफल उद्यागेपति होता है। यदि सूर्य पर्वत दूषित हो जाए तो व्‍यक्‍ति अपराधी होता है। यदि सूर्य तथा शुक्र पर्वत उभार वाले है तो विपरीत लिंग के प्रति शीघ्र एवं स्थायी प्रभाव डालने वाला, धनवान, परोपकारी, सफल प्रशासक, सौंदर्य और विलासिताप्रिय होता है।

 

तारे का चिह्न होने पर धनहानि होती है, लेकिन प्रसिद्धि अप्रत्याशित रूप से मिलती है। गुणा का चिन्ह हो तो सट्टा या शयेर में धन का नाश हो सकता है। सूर्य पर्वत पर त्रिभुज हो तो उच्च पद की प्राप्ति, प्रतिष्ठा तथा प्रशासनिक लाभ होते हैं। सूर्य पर्वत पर चौकड़ी हो तो सर्वत्र लाभ तथा सफलता की प्राप्ति होती है। व्यक्तियों में धन पाने की असीमित महत्वाकांक्षा होती है। हथेली में सूर्य पर्वत के साथ यदि बृहस्पति का पर्वत भी उन्नत हो तो व्यक्ति विद्वान, मेधावी और धार्मिक विचारों वाला होता है। यदि पर्वत अधिक उभार वाला हो और रेखा कटी या टूटी हो तो व्यक्ति अभिमानी, स्वार्थी, क्रूर, कंजूस और अविवेकी होता है। यदि हथेली में सूर्य पर्वत शनि की ओर झुका हो तो व्यक्ति जज एवं सफल अधिवक्ता होता है

हृदय रेखा एक छोर से शुरु होकर दूसरे छोर तक जाए तो वह वर्तमान में जीने वाला स्वभाव होता है। वे सपनों की दुनिया से दूर रहते हैं। स्वभाव से भावुक एवं ईर्ष्‍यालु भी हो सकते हैं।हृदय रेखा शनि क्षेत्र से शुरू हुई हो और सूर्य पर्वत तक पंहुच रही हो तो प्रेम में वासना होती है। ऐसा योग होने पर पूरी तरह से व्‍यक्‍ति का स्वार्थी व्यवहार हो सकता है।हृदय रेखा का लाल होना और अधिक गहरा होने से स्वभाव से तेज हो सकते हैं। किसी बुरी आदत का शिकार भी बन सकते हैं।दो हृदय रेखा हों, लेकिन उनमें किसी भी प्रकार का दोष न हो तो बुद्धि सात्विक होती है।

हृदय रेखा का मध्य में टूटना प्रेम संबंधो में बिखराव होता है।हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा दोनों एक छोर से शुरु होकर हथेली के दूसरे छोर पर तक जाए तो किसी की परवाह नहीं करने वाला स्वभाव हो सकता है।हृदय रेखा पतली हो। गहरी न होकर हल्की होने से स्वभाव रुखा हो सकता है।यदि हृदय रेखा गुरु पर्वत से शुरू होती है। तो यह दृढ़ निश्चयी और आदर्शवादी होने का संकेत है।हृदय रेखा तर्जनी उंगली के मूल से शुरू हो तो मानसिक रुप से परेशान रह सकते हैं।हथेली में हृदय रेखा न हो या बहुत छोटी हो तो यह प्रेम संबंधों में असफलता मिल सकती है।