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Gudi Padwa2021: इस दिन हुई सृष्टि की रचना, जानिए पूजा की विधि और महत्व

आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में ‘उगादि‘ और महाराष्ट्र में यह पर्व ‘ग़ुड़ी पड़वा’ के रूप में मनाया जाता है।

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SumanBy Suman

Published on 5 April 2021 5:22 AM GMT

Gudi Padwa2021: इस दिन हुई सृष्टि की रचना, जानिए पूजा की विधि और महत्व
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सोशल मीडिया से फोटो

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लखनऊ: गुड़ी पड़वा को महाराष्ट्र में नये साल की शुरुआत मानते हैं। इस दिन लोग नयी फसल की पूजा करते हैं। गुड़ी पड़वा के दिन हिन्दू नववर्ष की शुरूआत माना जाता है। चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा या वर्ष प्रतिपदा या उगादि (युगादि) कहा जाता है।

हर साल गुड़ी पड़वा चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 13 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु व ब्रह्मा जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। घरों में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं।

विजय के प्रतीक रूप में शालिवाहन शक का प्रारंभ

गुड़ी का अर्थ 'विजय पताका' होता है। कहते हैं शालिवाहन ने मिट्टी के सैनिकों की सेना से प्रभावी शत्रुओं (शक) को पराजित किया। इस विजय के प्रतीक रूप में शालिवाहन शक का प्रारंभ इसी दिन से होता है। 'युग' और 'आदि' शब्दों की संधि से बना है 'युगादि'। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में 'उगादि' और महाराष्ट्र में यह पर्व 'ग़ुड़ी पड़वा' के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन चैत्र नवरात्रि का प्रारम्भ होता है।

हुआ था सृष्टि का निर्माण

पौराणिक मान्यता अनुसार, प्रतिपदा तिथि के दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसलिए इस दिन भगवान ब्रह्मा की पूजा का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि गुड़ी पड़वा के दिन सभी बुराइयों का अंत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

महत्व और पूजा विधि

गुड़ी पड़वा तिथि- 13 अप्रैल 2021, प्रतिपदा तिथि प्रारंभ- 12 अप्रैल 2021 दिन सोमवार की सुबह 08 बजे से। प्रतिपदा तिथि समाप्त- 13 अप्रैल 2021 दिन मंगलवार की सुबह 10 बजकर 16 मिनट तक।

गुड़ी पड़वा के दिन सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व स्नान आदि किया जाता है। इसके बाद मेन दरवाजे को आम के पत्तों से सजाया जाता है। इसके बाद घर के एक हिस्से में गुड़ी लगाई जाती है। इसे आम के पत्तों, पुष्प और कपड़े आदि से सजाया जाता है। इसके बाद भगवान ब्रह्मा की पूजा की जाती है और गुड़ी फहराते हैं। गुड़ी फहराने के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है।



शुभ काम की शुरूआत

अलग-अलग राज्यों में उगादी, युगादी, छेती चांद आदि नामों से मनाया जाता है। इस दिन को मणिपुर में भी मनाया जाता है। इस दिन सोना, वाहन या मकान की खरीद या किसी काम की शुरुआत करना शुभ माना जाता है।

पूरन पोली और श्रीखंड खाना जरूरी

महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं। इस त्योहार के दिन पूरन पोली और श्रीखंड मनाया जाता है। इसके अलावा मीठे चावल बनाएं जाते हैं। जिसे शक्कर भात कहते हैं। अधिकतर लोग इस दिन कड़वे नीम की पत्तियों को खाकर दिन की शुरूआत करते हैं। कहा जाता है कि गुड़ी पड़वा पर ऐसा करने से खून साफ होता है और शरीर मजबूत बनता है।

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