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भगवान हनुमान की जन्मस्थली मिल गई, यहां हुआ पवनपुत्र का जन्म

भगवान हनुमान का जन्म कहा हुआ ये बताने वाली पुस्तक इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। जिसमें भगवान हनुमान का जन्म स्थल बताने का बड़ा दावा किया गया है।

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MonikaPublished By Monika

Published on 11 April 2021 7:50 AM GMT

भगवान हनुमान की जन्मस्थली मिल गई, यहां हुआ पवनपुत्र का जन्म
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हनुमान का जन्म तिरुमाला पहाड़ी पर हुआ था (फाइल फोटो )

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तिरुपति: भगवान हनुमान का जन्म कहा हुआ ये बताने वाली पुस्तक इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। जिसमें भगवान हनुमान का जन्म स्थल बताने का बड़ा दावा किया गया है।भगवान हनुमान के जन्मस्थान पर तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा 13 अप्रैल को 'सुबूत' आधारित एक किताब जारी की जाएगी जिससे प्रमाणित होगा कि भगवान हनुमान का जन्म तिरुमाला की सात पवित्र पहाड़ियों में से एक पर हुआ था। यह भगवान वेंकटेश्वर का निवास स्थान है।

अधिकारी ने बताया कि खगोलीय, पुरालेखीय, वैज्ञानिक और पौराणिक प्रमाण वाली पुस्तक, यह साबित करेगी कि तिरुमला पहाड़ियों पर भगवान हनुमान का जन्म हुआ था, का विमोचन तेलुगू नववर्ष के दिन उगादि पर किया जाएगा। टीटीडी के कार्यकारी अधिकारी केएस जवाहर रेड्डी ने पिछले साल दिसम्बर में विद्वानों की एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति का गठन अध्ययन करने और सात पहाड़ियों में से एक 'अंजनाद्रि' में प्रमाण एकत्रित करने के लिए किया गया था।

भगवान हनुमान (फाइल फोटो )

शिवजी के 11वें अवतार

शिव पुराण के अनुसार हनुमान जी ही शिवजी के 11वें अवतार हैं। ज्योतिषियों की गणना के अनुसार, हनुमान जी का जन्म 1 करोड़ 85 लाख 58 हजार 112 वर्ष पहले चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह 6.03 बजे हुआ था। हनुमानजी के जन्म को लेकर भ्रम की स्थिति है और कई प्रकार के मत हैं।

माता-पिता के कारण हनुमानजी को आंजनेय और केसरीनंदन कहा जाता है । केसरीजी को कपिराज कहा जाता था, क्योंकि वे वानरों की कपि नाम की जाति से थे। केसरीजी कपि क्षेत्र के राजा थे। कपिस्थल कुरु साम्राज्य का एक प्रमुख भाग था। हरियाणा का कैथल पहले करनाल जिले का भाग था। यह कैथल ही पहले कपिस्थल था। कुछ शास्त्रों में ऐसा वर्णन आता है कि कैथल ही हनुमानजी का जन्म स्थान है।

दंडकारण्य प्रदेश

गुजरात स्थित डांग जिला रामायण काल में दंडकारण्य प्रदेश के रूप में पहचाना जाता था। मान्यता के अनुसार, यहीं भगवान राम व लक्ष्मण को शबरी ने बेर खिलाए थे। आज यह स्थल शबरीधाम नाम से जाना जाता है। डांग जिले के आदिवासियों की सबसे प्रबल मान्यरता यह भी है कि डांग जिले के अंजनी पर्वत में स्थित अंजनी गुफा में ही हनुमानजी का भी जन्म हुआ था। कहा जाता है कि अंजनी माता ने अंजनी पर्वत पर ही कठोर तपस्या की थी और इसी तपस्या के फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न यानी कि हनुमानजी की प्राप्ति हुई थी। माता अंजनी ने अंजनी गुफा में ही हनुमानजी को जन्म दिया था।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमानजी का जन्म झारखंड राज्य के गुमला जिले के आंजन गांव की एक गुफा में हुआ था। मान्यताओं के अनुसार, आंजन गांव में ही माता अंजनी निवास करती थीं और इसी गांव की एक पहाड़ी पर स्थित गुफा में रामभक्त हनुमान का जन्म हुआ था। इसी विश्वास के साथ यहां की जनजाति भी बड़ी संख्या में भक्ति और श्रद्धा के साथ माता अंजनी और भगवान महावीर की पूजा करती है। यहां बालक पवन सुत हनुमान को माता अंजनी की गोद में लिए हुए एक पत्थर की प्राचीन मूर्ति स्थापित है।

पंपासरोवर अथवा पंपासर होस्पेट तालुका, मैसूर का एक पौराणिक स्थान है। हंपी के निकट बसे हुए ग्राम अनेगुंदी को रामायणकालीन किष्किंधा माना जाता है । तुंगभद्रा नदी को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय मुख्य मार्ग से कुछ हटकर बाईं ओर पश्चिम दिशा में, पंपासरोवर स्थित है । यहां स्थित एक पर्वत में एक गुफा भी है जिसे रामभक्त शबरी के नाम पर शबरी गुफा कहते हैं।

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