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नाव पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, जानिए इस आगमन का कैसा पडे़गा प्रभाव

बुधवार से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो रही है।ये  नवरात्रि वसंत ऋतु में आता हैं। देवी भागवत ग्रंथ के अनुसार वैसे तो मां दुर्गा का वाहन सिंह है, लेकिन इसमें में बताया गया है कि हर साल नवरात्रि में देवी मां अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं।

suman

sumanBy suman

Published on 23 March 2020 2:26 AM GMT

नाव पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, जानिए इस आगमन का कैसा पडे़गा प्रभाव
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लखनऊ:बुधवार से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो रही है।ये नवरात्रि वसंत ऋतु में आता हैं। शक्ति की उपासना के पर्व चैत्र नवरात्र की शुरुआत 25 मार्च से होगी। इस वर्ष मां के आगमन का वाहन 'नाव' होगी। इसका प्रभाव शुभ माना गया है। घटस्थापना के अवसर पर ब्रह्मयोग रहेगा। दिवसपर्यंत रेवती नक्षत्र रहेगा। भक्त माता शक्ति की उपासना में जुटेंगे। 24 मार्च मंगलवार के दिन दोपहर 2:58 से एकम तिथि लगेगी जो दूसरे दिन अर्थात 25 मार्च को 5:26 बजे तक रहेगी। घट स्थापना व कलश स्थापना के लिए ब्रह्ममुहूर्त को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस पूरे दिन रेवती नक्षत्र रहेगा व दोपहर 03.36 बजे तक ब्रह्म योग रहेगा। अत: 25 मार्च को चैत्र नवरात्र में घट स्थापना एवं कलश स्थापना करना मंगलकारी होगा।

देवी भागवत ग्रंथ के अनुसार वैसे तो मां दुर्गा का वाहन सिंह है, लेकिन इसमें में बताया गया है कि हर साल नवरात्रि में देवी मां अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं। देवी के अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आने से देश और जनता पर इसका अलग-अलग असर होता है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, आगमन के वाहन-

शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।

गुरौ शुक्रे चदोलायां बुधे नौका प्रकी‌र्त्तिता ।। सोमवार या रविवार को घट स्थापना होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। शनिवार या मंगलवार को नवरात्रि की शुरुआत होने पर देवी का वाहन घोड़ा माना जाता है। गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्र शुरू होने पर देवी डोली में बैठकर आती हैं।बुधवार से नवरात्र शुरू होने पर मां दुर्गा नाव पर सवार होकर आती हैं।

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विदाई के वाहन

मां दुर्गा आती भी वाहन से हैं और जाती भी वाहन से हैं। यानी जिस दिन नवरात्र का अंतिम दिन होता है, उसी के अनुसार देवी का वाहन भी तय होता है। देवी भागवत के अनुसार-

शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुज शोककरा।

शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करी विकला।।

बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभ वृष्टिकरा।

सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा॥ रविवार या सोमवार को देवी भैंसे की सवारी से जाती हैं तो देश में रोग और शोक बढ़ता है। शनिवार या मंगलवार को देवी मुर्गे पर सवार होकर जाती हैं, जिससे दुख और कष्ट की वृद्धि होती है। बुधवार या शुक्रवार को देवी हाथी पर जाती हैं। इससे बारिश ज्यादा होती है। गुरुवार को मां दुर्गा मनुष्य की सवारी से जाती हैं। इससे जो सुख और शांति की वृद्धि होती है।

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शुभ-अशुभ प्रभाव

माता दुर्गा जिस वाहन से पृथ्वी पर आती हैं, उसके अनुसार सालभर होने वाली घटनाओं का भी आंकलन किया जाता है।

गजे च जलदा देवी क्षत्र भंग स्तुरंगमे।

नोकायां सर्वसिद्धि स्या ढोलायां मरणंधुवम्।। देवी जब हाथी पर सवार होकर आती है तो पानी ज्यादा बरसता है। घोड़े पर आती हैं तो पड़ोसी देशों से युद्ध की आशंका बढ़ जाती है। देवी नौका पर आती हैं तो सभी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और डोली पर आती हैं तो महामारी का भय बना रहता हैं।

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