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नागपंचमी कब हैं? जानिए इस पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और योग

  • नागपंचमी के दिन शिव के साथ नागों की पूजा का विधान है। नागों का मनुष्य और देवों के जीवन में महत्व है। नाग सृष्टि के पालनकर्ता विष्णु भगवान के लिए आरामदायक शय्या है तो शिव भगवान की गले की शोभा।

Suman  Mishra
Published By Suman Mishra
Published on: 15 Jun 2021 2:59 PM IST (Updated on: 13 Aug 2021 11:30 AM IST)
नागपेचमी 13 अगस्त
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सांकेतिक तस्वीर (सौ. से सोशल मीडिया)

नागपंचमी कब हैं? 2021

भगवान शिव के प्रिय गले का हार नागों की पूजा नागपंचमी के दिन देशभर में धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन शिवभक्त नागों की पूजा करते हैं दूध पिलाते है और आशीर्वाद लेते हैं। हर साल नाग पंचमी सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस बार नाग पंचमी 12 और 13 अगस्त को है। उदयातिथि में नाग पंचमी 13 अगस्त को मनाई जाएगी।

नाग पंचमी के दिन शिव के साथ नागों की पूजा का विधान है। नागों का मनुष्य और देवों के जीवन में महत्व है। नाग सृष्टि के पालनकर्ता विष्णु भगवान के लिए आरामदायक शय्या है तो शिव भगवान की गले की शोभा। नाग पंचमी को

नागपंचमी का शुभ मुहूर्त

नागपंचमी के दिन नक्षत्र हस्त 07:59 AM के बाद चित्रा लगेगा और साध्य योग 01:46 PM तक रहेगा

  • पचंमी तिथि का आरंभ- 12 अगस्त-15.24 से
  • पचंमी तिथि का समापन- 13 अगस्त 13.42 तक
  • नागपंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त- 13 अगस्त 05.24 से 08.31 तक।
  • नागपंचमी अभिजीत मुहूर्त - 12:05 PM से 12:57 PM
  • नागपंचमी अमृत काल – 12:49 AM – 02:20 AM
  • नागपंचमी ब्रह्म मुहूर्त – 04:30 AM से 05:18AM
  • नागपंचमी विजय मुहूर्त- 02:13 PM से 03:06 PM
  • नागपंचमी गोधूलि बेला- 06:22 PM से 06:46 PM
  • नागपंचमी निशिता काल- 11:41 PM से 12:25 AM, 14 अगस्त
  • नागपंचमी रवि योग - 08:00 AM से 05:31 AM 14 अगस्त

शिव पार्वती के साथ इस दिन शुभ मुहूर्त में नाग की पूजा करना चाहिए और जमीन को नहीं खोदना चाहिए। इस दिन पूजा और नियमों का पालन करने से काल सर्प योग से मुक्ति मिलती है।

Suman  Mishra

Suman Mishra

एस्ट्रोलॉजी एडिटर

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है Author Experience- 2007 से अब तक( 17 साल) Author Education – 1. बनस्थली विद्यापीठ और विद्यापीठ से संस्कृत ज्योतिष विज्ञान में डिग्री 2. रांची विश्वविद्यालय से पत्राकरिता में जर्नलिज्म एंड मास कक्मयूनिकेश 3. विनोबा भावे विश्व विदयालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक की डिग्री

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