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Yogini Ekadashi Vrat Katha: इस व्रत के प्रभाव से नहीं होता स्त्री वियोग, मिलता है मोक्ष, जरूर सुनें योगिनी एकादशी की कथा

Yogini Ekadashi Vrat Katha :योगिनी एकादशी के दिन अगर विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाये तो उनकी कृपा सदैव बरसती है। साथ ही इस दिन व्रत उपवास के साथ योगिनी एकादशी की कथा सुनना भी जरूरी होता है। कहते है कि जो भी इस दिन भगवान विष्णु की महिमा का बखान करने वाली कथा सुनता है उसके हर कष्ट दूर होते हैं। किसी भी तरह की बीमारी दूर होती है।

Suman  Mishra | Astrologer
Updated on: 2022-06-24T09:13:03+05:30
Yogini Ekadashi Vrat Katha
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सांकेतिक तस्वीर,सौ.से सोशल मीडिया

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Yogini Ekadashi Vrat Katha

योगिनी एकादशी व्रत कथा!

24 जून 2022 को शुक्रवार के दिन योगिनी एकादशी का व्रत है । इस भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और व्रत रखते हैँ। एकादशी की तिथि भगवान विष्णु को अतिप्रिय है। योगिनी एकादशी के दिन अगर विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाये तो उनकी कृपा सदैव बरसती है। साथ ही इस दिन व्रत उपवास के साथ योगिनी एकादशी की कथा सुनना भी जरूरी होता है। कहते है कि जो भी इस दिन भगवान विष्णु की महिमा का बखान करने वाली कथा सुनता है उसके हर कष्ट दूर होते हैं। किसी भी तरह की बीमारी दूर होती है।

महाभारत काल की बात है कि एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण कहा: हे त्रिलोकीनाथ! मैंने ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी की कथा सुनी। अब आप कृपा करके आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनाइये। इस एकादशी का नाम तथा माहात्म्य क्या है? सो अब मुझे विस्तारपूर्वक बतायें।

श्रीकृष्ण ने कहा: हे पाण्डु पुत्र! आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम योगिनी एकादशी है। इसके व्रत से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यह व्रत इस लोक में भोग तथा परलोक में मुक्ति देने वाला है।हे अर्जुन! यह एकादशी तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। इसके व्रत से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। तुम्हें मैं पुराण में कही हुई कथा सुनाता हूँ, ध्यानपूर्वक श्रवण करो- कुबेर नाम का एक राजा अलकापुरी नाम की नगरी में राज्य करता था। वह शिव-भक्त था। उनका हेममाली नामक एक यक्ष सेवक था, जो पूजा के लिए फूल लाया करता था। हेममाली की विशालाक्षी नाम की अति सुन्दर स्त्री थी।

एक दिन वह मानसरोवर से पुष्प लेकर आया, किन्तु कामासक्त होने के कारण पुष्पों को रखकर अपनी स्त्री के साथ रमण करने लगा। इस भोग-विलास में दोपहर हो गई।

हेममाली की राह देखते-देखते जब राजा कुबेर को दोपहर हो गई तो उसने क्रोधपूर्वक अपने सेवकों को आज्ञा दी कि तुम लोग जाकर पता लगाओ कि हेममाली अभी तक पुष्प लेकर क्यों नहीं आया। जब सेवकों ने उसका पता लगा लिया तो राजा के पास जाकर बताया- हे राजन! वह हेममाली अपनी स्त्री के साथ रमण कर रहा है।

इस बात को सुन राजा कुबेर ने हेममाली को बुलाने की आज्ञा दी। डर से काँपता हुआ हेममाली राजा के सामने उपस्थित हुआ। उसे देखकर कुबेर को अत्यन्त क्रोध आया और उसके होंठ फड़फड़ाने लगे।

राजा ने कहा: अरे अधम! तूने मेरे परम पूजनीय देवों के भी देव भगवान शिवजी का अपमान किया है। मैं तुझे श्राप देता हूँ कि तू स्त्री के वियोग में तड़पे और मृत्युलोक में जाकर कोढ़ी का जीवन व्यतीत करे।

कुबेर के श्राप से वह तत्क्षण स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरा और कोढ़ी हो गया। उसकी स्त्री भी उससे बिछड़ गई। मृत्युलोक में आकर उसने अनेक भयंकर कष्ट भोगे, किन्तु शिव की कृपा से उसकी बुद्धि मलिन न हुई और उसे पूर्व जन्म की भी सुध रही। अनेक कष्टों को भोगता हुआ तथा अपने पूर्व जन्म के कुकर्मो को याद करता हुआ वह हिमालय पर्वत की तरफ चल पड़ा।

चलते-चलते वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में जा पहुँचा। वह ऋषि अत्यन्त वृद्ध तपस्वी थे। वह दूसरे ब्रह्मा के समान प्रतीत हो रहे थे और उनका वह आश्रम ब्रह्मा की सभा के समान शोभा दे रहा था। ऋषि को देखकर हेममाली वहाँ गया और उन्हें प्रणाम करके उनके चरणों में गिर पड़ा।

हेममाली को देखकर मार्कण्डेय ऋषि ने कहा: तूने कौन-से निकृष्ट कर्म किये हैं, जिससे तू कोढ़ी हुआ और भयानक कष्ट भोग रहा है।

महर्षि की बात सुनकर हेममाली बोला: हे मुनिश्रेष्ठ! मैं राजा कुबेर का अनुचर था। मेरा नाम हेममाली है। मैं प्रतिदिन मानसरोवर से फूल लाकर शिव पूजा के समय कुबेर को दिया करता था। एक दिन पत्नी सहवास के सुख में फँस जाने के कारण मुझे समय का ज्ञान ही नहीं रहा और दोपहर तक पुष्प न पहुँचा सका। तब उन्होंने मुझे शाप श्राप दिया कि तू अपनी स्त्री का वियोग और मृत्युलोक में जाकर कोढ़ी बनकर दुख भोग। इस कारण मैं कोढ़ी हो गया हूँ तथा पृथ्वी पर आकर भयंकर कष्ट भोग रहा हूँ, अतः कृपा करके आप कोई ऐसा उपाय बतलाये, जिससे मेरी मुक्ति हो।

मार्कण्डेय ऋषि ने कहा: हे हेममाली! तूने मेरे सम्मुख सत्य वचन कहे हैं, इसलिए मैं तेरे उद्धार के लिए एक व्रत बताता हूँ। यदि तू आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी नामक एकादशी का विधानपूर्वक व्रत करेगा तो तेरे सभी पाप नष्ट हो जाएँगे।

महर्षि के वचन सुन हेममाली अति प्रसन्न हुआ और उनके वचनों के अनुसार योगिनी एकादशी का विधानपूर्वक व्रत करने लगा। इस व्रत के प्रभाव से अपने पुराने स्वरूप में आ गया और अपनी स्त्री के साथ सुखपूर्वक रहने लगा।

भगवान श्री कृष्ण कहा: हे राजन! इस योगिनी एकादशी की कथा का फल 88000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर है। इसके व्रत से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अन्त में मोक्ष प्राप्त करके प्राणी स्वर्ग का अधिकारी बनता है।

पुराणों में आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा गया है। इस बार योगिनी एकादशी 24 जून गुरुवार के दिन मनाई जा रही है। इस दिन भगवान श्रीहरि की पूजा-उपासना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य-प्रताप से पापकर्मों के पाश से मुक्ति मिलती है। साथ ही भौतिक जीवन में सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं।

सांकेतिक तस्वीर,सौ.से सोशल मीडिया


योगिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त

24 जून को भी योगिनी एकादशी उदयातिथि

इस बार योगिनी एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः काल है। इसके बाद चौघड़िया तिथि देखकर पूजा आराधना कर सकते हैं। योगिनी एकादशी की तिथि

योगिनी एकादशी का आरंभ: 23 जून 09.45 PM से

योगिनी एकादशी का समापन: 24 जुलाई 11.12pm

ज्येष्ठा नक्षत्र शाम 06.32 मिनट तक है. इस दिन का शुभ समय या अभिजित मुहूर्त 11. 54 मिनट से दोपहर 12.49 मिनट तक है

ब्रह्म मुहूर्त : 04:10 AM से 04:58 AM

अमृत काल : 12:19 AM से 02:02 AM

अभिजित मुहूर्त: 12:02 PM से 12:55 PM

सर्वार्थसिद्धि योग - 05:46 AM से 08:04 AM 24 जून

अभिजीत मुहूर्त - 12:02 PM से 12:56 PM

अमृत काल - नहीं

ब्रह्म मुहूर्त - 04:10 AM से 04:58 AM

पारना: 05.41AM मिनट से सुबह 08.12AM मिनट

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Suman  Mishra | Astrologer

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