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सड़क पर ममता और मंच पर मोदी, तो क्या हिंदुत्व पर भारी पड़ेगी मंहगाई

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी काफी बढ़ गई है। यहां भाजपा जहां हिंदुत्व के बल पर सियासी जमीन तलाश रही है वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंहगाई के मुद्दे पर सड़क पर है।

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raghvendraBy raghvendra

Published on 7 March 2021 10:00 AM GMT

सड़क पर ममता और मंच पर मोदी, तो क्या हिंदुत्व पर भारी पड़ेगी मंहगाई
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फोटो— सोशल मीडिया
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी काफी बढ़ गई है। यहां भाजपा जहां हिंदुत्व के बल पर सियासी जमीन तलाश रही है वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंहगाई के मुद्दे पर सड़क पर है। सियासी नजरिए से बंगाल में आज का दिन काफी अहम है। क्योंकि कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तरफ जहां मेगा रैली चल रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंहगाई के मुद्दे पर सिलीगुड़ी में पैदलयात्रा निकाल रही हैं। ममता बनर्जी पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में बेतहासा वृद्धि के विरोध दार्जिलिंग मोड़ से हाशमी चौक तक पदयात्रा कर केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध किया।

एलपीजी सिलेंडर लेकर शामिल हुईं महिलाएं

ममता बनर्जी के इस विरोध जुलूस में महिलाएं एलपीजी सिलेंडर लेकर शामिल हुईं। ममता बनर्जी की इस पदयात्रा की खास बात यह रही कि एक तरफ जहां मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल की सरकार पर हमला बोल रहे थे, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार की हकीकत जनता को दिखा रही थी। बता दें कि बढ़ती मंहगाई के बोझ से देश का हर तबका दबा हुआ है। ऐसे में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व हावी होगा या फिर बढ़ती मंहगाई का जवाब मिलेगा यह देखने वाली बात होगी।

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चुनावी नतीजों पर पड़ेगा यह असर

गौरतलब है कि चुनाव में गड़े मुर्दे उखाड़े जाते रहे हैं। पश्चिम बंगाल चुनाव में भी वही हो रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना पश्चिम बंगाल में लागू न किए जाने को भी भाजपा ने मुद्दा बनाया है, जिसका असर भी पड़ता दिख रहा है। क्योंकि देश के करोड़ों किसान जहां इस निधि से लाभांवित हो रहे हैं, वहीं पश्चिम बंगाल के किसान राज्य सरकार की हठधर्मिता के चलते केंद्र सरकार की इस योजना का लाभ पाने से वंचित हैं। फिलहाल पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के बढ़ते दामों से हर कोई परेशान है, जिसका असर पश्चिम बंगाल के नतीजों पड़ना स्वाभाविक है।

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raghvendra

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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