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बिहार चुनाव: कई बड़े पुलिस अफसरों की नजर इस पार्टी पर, इनके नाम है चर्चा में

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से इस बार कई पुलिस अफसरों के चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है। जुलाई में ही डीजी पद से रिटायर हुए सुनील कुमार ने जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली है

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SumanBy Suman

Published on 29 Aug 2020 4:17 PM GMT

बिहार चुनाव: कई बड़े पुलिस अफसरों की नजर इस पार्टी पर, इनके नाम है चर्चा में
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सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से इस बार कई पुलिस अफसरों के चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है। डीजी पद से रिटायर हुए सुनील कुमार ने जदयू की सदस्यता ली
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पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। हालांकि अभी तक चुनाव आयोग की ओर से विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान नहीं किया गया है मगर सियासी दलों ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। राजग गठबंधन की अगुवाई करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से इस बार कई पुलिस अफसरों के चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है। जुलाई में ही डीजी पद से रिटायर हुए सुनील कुमार ने जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली है और अब मौजूदा डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे और उनसे पहले डीजीपी रहे केएस द्विवेदी के भी जदयू में शामिल होकर चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं।

रिटायर डीजी ने ली जदयू की सदस्यता

राज्य में डीजी (पुलिस भवन निर्माण) के पद से पिछले महीने में रिटायर होने वाले सुनील कुमार ने शनिवार को जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली। जानकारों का कहना है कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाना चाहते हैं। सूत्रों का कहना है कि सुनील कुमार के जदयू में शामिल होने से पार्टी का दलित बेस और मजबूत हुआ है।

मुख्यमंत्री नीतीश की‌ तारीफ

पूर्व डीजी सुनील कुमार का कहना है कि मेरे पिताजी कांस्टीट्यूएंट असेंबली के सदस्य थे और भाई अनिल कुमार भी राजनीति के मैदान में सक्रिय हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों से प्रभावित होकर ही उन्होंने राजनीति के मैदान में उतरने का फैसला किया है।

गोपालगंज सीट पर टिकी नजर

हालांकि पूर्व डीजी सुनील कुमार का कहना है कि वे जदयू कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के लिए काम करेंगे मगर उनके गोपालगंज विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरने की संभावना जताई जा रही है। वे मूल रूप से इस क्षेत्र के रहने वाले हैं।

गोपालगंज सीट पर मौजूदा समय में कांग्रेस का कब्जा है और यहां से कांग्रेस के विधायक अनिल कुमार पूर्व डीजी के रिश्ते में भाई हैं। सूत्रों के मुताबिक सुनील कुमार की चुनाव लड़ने की इच्छा है और उन्हें टिकट मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

bihar election फाइल

इन अफसरों के नाम भी चर्चा में

पूर्व डीजी के अलावा राज्य के मौजूदा डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे और उनसे पहले डीजीपी रहे के.एस.द्विवेदी के बारे में भी आजकल अटकलों का बाजार गरम है। इन दोनों अफसरों के भी जदयू की सदस्यता लेकर चुनाव मैदान में उतरने की संभावना जताई जा रही है। ये तीनों अफसर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी बताए जाते हैं।

हालांकि डीजीपी पांडे का कहना है कि इन अटकलों में कोई दम नहीं है। वे कहते हैं कि मेरे बारे में झूठी अफवाह उड़ाई जा रही है। वैसे जदयू के कुछ नेताओं का मानना है कि डीजी रैंक के तीन अफसरों के चुनाव मैदान में उतरने से जातीय समीकरण मजबूत होने के साथ ही नौकरशाही के खेमे में भी पार्टी की पकड़ और मजबूत होगी।

बक्सर की किसी सीट पर लड़ेंगे चुनाव

मौजूदा डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे भले ही चुनाव लड़ने की संभावना से इनकार कर रहे हों मगर चुनाव मैदान में किस्मत आजमाने के लिए वह पहले भी इस्तीफा दे चुके हैं। अब उनकी कुछ ही महीने की नौकरी बची हुई है। सूत्रों का कहना है कि वे बक्सर इलाके की किसी विधानसभा सीट से किस्मत आजमा सकते हैं।

ऑफर मिला तो करेंगे विचार

पूर्व डीजीपी केएस द्विवेदी को भागलपुर की किसी शहरी सीट से टिकट की आस है। वे भागलपुर के एसपी भी रह चुके हैं और उस समय उन्हें खासी लोकप्रियता मिली थी। मौजूदा समय में बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष द्विवेदी का कहना है कि यदि उन्हें ऑफर मिला तो वे इस पर विचार कर सकते हैं।

भागलपुर में दो नेताओं में खींचतान

एनडीए गठबंधन में शामिल भाजपा भागलपुर में नेताओं के आपसी विवाद में उलझी हुई है। इलाके के दो बड़े नेताओं शाहनवाज हुसैन और केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने यहां अपने अलग-अलग खेमे बना रखे हैं।

आपसी खींचतान के कारण भाजपा को 2015 के विधानसभा चुनाव में भी यहां से कोई कामयाबी नहीं मिली थी। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान जदयू महागठबंधन का हिस्सा थी और भागलपुर की सभी 6 विधानसभा सीटों पर महागठबंधन ने कब्जा कर लिया था।

केंद्रीय मंत्री का बेटा भी दावेदार

वैसे इस बार कई भाजपा नेताओं की नजर भागलपुर सीट पर टिकी हुई है। दावेदारों में केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे के बेटे अर्जित सारस्वत चौबे भी शामिल हैं जो 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अजित शर्मा से चुनाव हार गए थे। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह सीट एनडीए में शामिल भाजपा और जदयू में से किसके कोटे में जाती है।

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चुनावी तैयारियों में जुटी भाजपा

जदयू के साथ ही भाजपा भी बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए सक्रिय हो गई है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने शनिवार को बिहार के सांसदों के साथ बैठक कर विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति पर चर्चा की। इस बैठक में बिहार के प्रभारी भूपेंद्र यादव भी मौजूद थे। भाजपा सितंबर के दूसरे हफ्ते में विधिवत चुनाव प्रचार की शुरुआत करेगी। वैसे पार्टी की ओर से वर्चुअल रैलियों का दौर पहले से ही चल रहा है।

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