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Bihar Politics: बिहार में होगा सियासी धमाका, नीतीश दे सकते हैं एनडीए को झटका, जदयू और राजद ने बुलाई बैठक

Bihar Politics: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली तो नहीं गए मगर पटना में बैठकर सियासी रणनीति जरूर बनाते रहे।

Anshuman Tiwari
Written By Anshuman Tiwari
Updated on: 8 Aug 2022 2:08 AM GMT
nitish kumar
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बिहार सीएम नीतीश कुमार (फोटो: सोशल मीडिया )

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Bihar Politics: भाजपा और जदयू में बढ़ती खींचतान के बीच बिहार में बड़े सियासी धमाके की बिसात बिछती नजर आ रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के जदयू से इस्तीफे के बाद राज्य में सियासी हलचल काफी तेज हो गई है। सियासी हलकों में इन चर्चाओं में काफी तेजी पकड़ ली है कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश एनडीए का साथ छोड़कर एक बार फिर राजद के साथ हाथ मिलाकर सरकार बनाएंगे? नीतीश कुमार पूरे प्रकरण पर चुप्पी साधे हुए हैं मगर उनकी ओर से उठाए गए कदम बहुत कुछ इशारा करने वाले हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली तो नहीं गए मगर पटना में बैठकर सियासी रणनीति जरूर बनाते रहे। उन्होंने मंगलवार को पार्टी के विधायकों की बैठक बुला ली है जबकि पार्टी के सभी सांसदों को भी सोमवार तक पटना पहुंचने का निर्देश दिया गया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में भाजपा के साथ भविष्य के सियासी रिश्तों पर चर्चा होगी। दूसरी और राजद ने भी अचानक पार्टी के सभी विधायकों की मंगलवार को बैठक बुला ली है। यह बैठक पटना में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर होगी।

भाजपा के साथ रिश्ते सहज नहीं

यदि बिहार में हाल के सियासी घटनाक्रमों को देखा जाए तो उससे पूरी तरह साफ हो जाता है कि जदयू और भाजपा के रिश्ते सहज नहीं रह गए हैं। नीतीश कुमार के रुख से पूरी तरह साफ हो गया है कि वे भाजपा से दूरी बनाते दिख रहे हैं। पिछले करीब 20 दिनों के दौरान चार मौके ऐसे आए जब नीतीश कुमार ने भाजपा नेताओं से कन्नी काटने का प्रयास किया। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की ओर से हर घर तिरंगा अभियान के सिलसिले में 17 जुलाई को बुलाई गई बैठक में हिस्सा नहीं लिया था। पीएम मोदी की ओर से पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दिए गए विदाई भोज से भी नीतीश ने किनारा कर लिया था।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह में 25 जुलाई को भी नीतीश को आमंत्रित किया गया था मगर वे दिल्ली नहीं गए। नीति आयोग की बैठक में भी रविवार को नीतीश ने हिस्सा नहीं लिया। हालांकि इसके पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारण बताए गए मगर नीतीश पटना में सियासी रूप से पूरी तरह सक्रिय रहे। 3 अगस्त को ही उनकी कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट आ गई थी। नीतीश कुमार के इस रुख से राजधानी पटना के सियासी हलकों में अटकलों का बाजार गरम हो गया है। यहां तक कहा जा रहा है कि नीतीश एनडीए का साथ छोड़कर राजद के साथ एक बार फिर गठबंधन करना चाहते हैं।

आरसीपी के इस्तीफे के बाद सियासी हलचल तेज

जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के इस्तीफे के बाद पटना में सियासी हलचलें काफी तेज हैं। जदयू की ओर से आरसीपी सिंह पर अकूत संपत्ति अर्जित करने के मामले में जवाब मांगा गया था। बाद में आरसीपी सिंह ने जदयू के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। सियासी जानकारों का कहना है कि आरसीपी सिंह के खिलाफ पूरा अभियान नीतीश कुमार की शह पर ही चलाया गया है।

भाजपा के साथ आरसीपी सिंह के नजदीकी रिश्ते जगजाहिर हैं और नीतीश कुमार इसे लेकर भीतर ही भीतर काफी नाराज थे। आरसीपी सिंह का केंद्रीय मंत्री बनना भी नीतीश कुमार को काफी नागवार गुजरा था। पहले उन्होंने आरसीपी का राज्यसभा का टिकट काटा और बाद में उन्हें पार्टी नेताओं के जरिए कटघरे में खड़ा कर दिया। जदयू ने अभी भी आरसीपी सिंह का पीछा नहीं छोड़ा है और देश के अन्य महानगरों में उनकी संपत्ति का ब्योरा इकट्ठा किया जा रहा है।

राजद के साथ बढ़ रही है नजदीकी

हाल के दिनों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा के साथ लुकाछिपी का खेल खेल रहे हैं तो राजद के साथ उनकी नजदीकी भी बढ़ी है। नीतीश कुमार के खिलाफ हाल के दिनों में राजद की ओर से कोई बयानबाजी नहीं की जा रही है और तेजस्वी समेत अन्य राजद नेता केंद्र सरकार पर हमला करने में जुटे हुए हैं। रविवार को महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर तेजस्वी ने अपने बड़े भाई तेजप्रताप के साथ जुलूस निकालकर शक्ति प्रदर्शन भी किया। जानकारों का तो यहां तक कहना है कि राजद के सभी प्रवक्ताओं को नीतीश सरकार पर हमला करने से मना कर दिया गया है। इसे नीतीश और राजद के बीच बढ़ती नजदीकी का बड़ा इशारा माना जा रहा है। मंगलवार को होने वाली दोनों दलों के विधायकों की बैठक के बाद किसी बड़े सियासी खेल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि दोनों दलों ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस बैठक का एजेंडा क्या है।

मोदी सरकार में शामिल होने से इनकार

इस बीच जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने भी एक अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जदयू का कोई नेता मोदी सरकार में शामिल नहीं होगा। आरसीपी सिंह के इस्तीफे के बाद मोदी सरकार में जदयू का प्रतिनिधित्व खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि हम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 2019 में लिए गए फैसले पर कायम हैं। आरसीपी सिंह के मोदी सरकार में शामिल होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वे कैसे केंद्रीय मंत्री बन गए यह वही बता सकते हैं।

2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन के बारे में पूछे जाने पर ललन सिंह ने इशारों में कहा कि कल किसने देखा है। उन्होंने आरसीपी सिंह पर भी बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि उनका सिर्फ तन ही जदयू में था, मन कहीं और लगा हुआ था। उन्होंने कहा कि आरसीपी जदयू के संघर्ष के नहीं बल्कि सत्ता के साथी थे और उन्हें देर-सबेर पार्टी से इस्तीफा देना ही था।

सियासी हालात पर भाजपा की नजरें

वैसे बिहार में चल रही सियासी उठापटक के बीच जब बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय जयसवाल से सवाल पूछा गया तो उनका कहना था कि जदयू के भीतर क्या चल रहा है, इसे तो जदयू के नेता ही बता सकते हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा भी इन सारी सियासी गतिविधियों पर नजर गड़ाए हुए हैं और उसे नीतीश कुमार के कोई सियासी खेल करने की आशंका सता रही है।

हालांकि पिछले दिनों पटना में पार्टी कीअहम बैठक के दौरान बयान दिया गया था कि पार्टी अगला लोकसभा और बिहार विधानसभा का चुनाव जदयू के साथ मिलकर लड़ेगी। पार्टी खुद सरकार नहीं गिराना चाहती है मगर अगर नीतीश कुमार ने कोई सियासी खेल किया तो पार्टी उन पर धोखा देने का बड़ा आरोप जरूर लगा सकती है। जदयू से बड़ा दल होने के बावजूद भाजपा ने अपना वादा निभाते हुए मुख्यमंत्री पद पर नीतीश कुमार को बिठाया था और पार्टी इस बात की याद दिलाते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा करने की कोशिश करेगी।

Monika

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