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नीतीश की बढ़ी ताकत: रालोसपा का JDU में विलय, उपेंद्र कुशवाहा को दी ये जिम्मेदारी

करीब आठ साल के लंबे अंतराल के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा जेडीयू में लौट आये हैं। आज रालोसपा का जदयू में विलय हो गया।

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ShivaniBy Shivani

Published on 14 March 2021 2:30 PM GMT

नीतीश की बढ़ी ताकत: रालोसपा का JDU में विलय, उपेंद्र कुशवाहा को दी ये जिम्मेदारी
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पटना: बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) एक साथ आ गए। नीतश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) का विलय (RLSP- JDU Merger) हो गया। बिहार की राजनीति में अहम भूमिका रखने वाले दो दलों और दिग्गज नेताओं के एक होने के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा एलान किया। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को जेडीयू संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया है।

8 साल बाद उपेंद्र कुशवाहा जेडीयू में लौटे वापस

करीब आठ साल के लंबे अंतराल के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा जेडीयू में लौट आये हैं। आज रालोसपा का जदयू में विलय हो गया। बिहार की सियासत के लिए आज का दिन बेहद अहम है। JDU में विलय के बाद उपेन्द्र कुशवाहा ने पार्टी की सदस्यता ले ली। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की मौजूदगी में पार्टी ज्वाइन कराई गयी।

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उपेंद्र कुशवाहा को जेडीयू संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया

हालंकि इस मौके पर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह की नामौजूदगी चर्चा का विषय रहा। बताया गया कि आरसीपी सिंह दिल्ली में हैं, लेकिन उनके हस्ताक्षर से एक पत्र जारी किया गया जिसे पढ़ नीतीश कुमार ने मंच से ही घोषणा की कि आज से और अभी से उपेन्द्र कुशवाहा जेडीयू के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। यह पद आज ही उपेन्द्र कुशवाहा के लिए सृजित किया गया है।

नीतीश को होगा कुशवाहा की वापसी से फायदा

वैसे उपेंद्र कुशवाहा का जेडीयू में शामिल होना कोई नहीं बात नहीं है। इसके पहले रालोसपा जदयू से अलग हो चुके हैं। पार्टी ने बिहार में वोट बैंक के लिए नितीश उपेंद्र कुशवाहा की जोड़ी को एक बार फिर साथ आने की जरूरत महसूस की गयी। बता दें कि बिहार में उपेंद्र कुशवाहा कुशवाहा समाज के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं। नीतीश कुमार की कुर्मी(लव) और उपेंद्र कुशवाहा की कोइरी(कुश) वोटरों पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में दोनों पार्टी के विलय से नीतीश और कुशवाहा दोनों को फायदा होना तय है।

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