खुशखबरी: नहीं निकलें एटीएम से पैसे तो ना लें टेंशन, बैंक देगा डबल

अगर आपके पास कभी अचानक से पैसे खत्म हो जाते है और आप पैसे निकालने एटीएम जाते हैं और वहां पर भी एटीएम से पैसे नहीं निकल पाते तो टेंशन की जरुरत नहीं हैं। हम आपके लिए एक अच्छी खबर लाएं हैं।

लखनऊ: अगर आपके पास कभी अचानक से पैसे खत्म हो जाते है और आप पैसे निकालने एटीएम जाते हैं और वहां पर भी एटीएम से पैसे नहीं निकल पाते तो टेंशन की जरुरत नहीं हैं। हम आपके लिए एक अच्छी खबर लाएं हैं। अब बैंक को अपने ग्राहकों को निकाले गए उन पैसों के साथ ब्याज भी देना पड़ सकता है, जो एटीएम से बाहर न निकले हों। दरअसल एक ऐसा ही मामला फरवरी 2017 में हजरतगंज स्थित ICICI के एटीएम से निकाले गए पैसों के बाद सामने आया है। जिसमें अब जिला उपभोक्ता फोरम ने फैसला सुनाते हुए बैंक को निर्देश दिया है कि बैंक को शिकायतकर्ता को उसकी रकम मय छह फीसद वार्षिक ब्याज के देना होगी।

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ब्याज के साथ रकम वापस

मैनुद्दीन नाम के एक शख्स का खाता एक्सिस बैंक की श्रावस्ती शाखा में है। फरवरी 2017 में उन्होंने हजरतगंज स्थित ICICI के एटीएम से दस हजार रुपए निकालने की कोशिश की। मैनुद्दीन का कहना है कि रुपया तो नहीं मिला लेकिन अकाउंट से दस हजार निकल गए। इसकी शिकायत ICICI के कस्टमर केयर पर करने के साथ बैंक से की। बैंक ने बताया कि उन्हें भुगतान मिल चुका है अपनी जिम्मेदारी से हाथ झाड़ लिया। उस मामले में अब जिला उपभोक्ता फोरम प्रथम के वरिष्ठ सदस्य राजर्षि शुक्ला ने एक्सिस बैंक को आदेश दिया है कि वह मैनुद्दीन शेख को दस हजार रुपये छह फीसद वार्षिक ब्याज के साथ अदा करें।

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यह है पूरा मामला

शिकायत के बाद बैंक ने मैनुद्दीन को भेजे हुए पत्र में यह लिखा कि सबूत भेजे जा रहे हैं, लेकिन पत्र के साथ ऐसा कोई साक्ष्य नहीं भेजा गया। जिसे यह प्रमाणित हो सके कि मैनुद्दीन को भुगतान मिल चुका है। आखिर में उन्होंने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराकर न्याय की गुहार लगाई। फोरम में एक्सिस बैंक ने यह बात दोहराई की अकाउंट से दस हजार की रकम निकली है और उसका भुगतान शिकायत कर्ता को कर दिया गया है।

फोरम ने कहा कि एक्सिस बैंक ने एटीएम का कोई फुटेज प्राप्त करने की कोशिश नहीं की जिससे यह प्रमाणित हो सकता था कि भुगतान शिकायतकर्ता को मिला या नहीं। यह सीधी सेवा में कमी है। इसलिए बैंक को शिकायतकर्ता को दस हजार रुपए मय छह फीसद वार्षिक ब्याज के देना होगी। साथ ही पांच हजार रुपए वाद व्यय के भी अदा करने होंगे। यदि भुगतान नहीं किया गया तो कुल देय रकम नौ फीसद ब्याज के साथ अदा करनी होगी।

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