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9 कंपनियों को झटका: लाखों कर्मचारियों पर खतरा, बढ़ेगी निवेशकों की समस्या

देश की सबसे बड़ी स्टॉक एक्सचेंज NSE (National Stock Exchange) 9 लिस्टेड कंपनियों को डिलिस्ट करने वाली है।

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ShreyaBy Shreya

Published on 3 Oct 2019 11:29 AM GMT

9 कंपनियों को झटका: लाखों कर्मचारियों पर खतरा, बढ़ेगी निवेशकों की समस्या
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नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी स्टॉक एक्सचेंज NSE (National Stock Exchange) 9 लिस्टेड कंपनियों को डिलिस्ट करने वाली है। जिसके बाद कोई भी व्यक्ति इन कंपनियों के शेयरों में खरीद-बिक्री नहीं कर पाएगा। जिन कंपनियों को डिलिस्ट किया जाएगा, उनमें लैंको इंफ्रा (Lanco Infra) मोजर बेयर (Moser Baer), अमर रेमेडीज (Amar Remedies), सुप्रीम टेक्स मार्ट (Supreme Tex Mart), सेमटल कलर (Samtel Color), हिंदुस्तान डोर ओ लीवर (Hindustan Dorr-Oliver), सर्वलक्ष्मी पेपर (Servalakshmi Paper), एलएमएल (LML), हनुंग टॉयज (Hanung Toys) शामिल हैं।

अब निवेशक नहीं कर पायेंगे शेयरों की खरीद-बिक्री-

एसकोर्ट सिक्योरिटी के रिसर्च हेड आसिफ इकबाल ने बताया कि इन कंपनियों के डिलिस्ट किए जाने के बाद कोई भी निवेशक इनमें शेयरों की खरीद-बिक्री नहीं कर पाएगा। क्योंकि ये कंपनियां लिक्विडेट होने वाली हैं। उन्होंने बताया कि ये सभी कंपनियां दिवालिया हो चुकी हैं।

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ना के बराबर है पैसा मिलने की उम्मीद-

अगर किसी निवेशक का इन कंपनियों के शेयरों में पैसा लगा है तो उनके पैसे मिलने की उम्मीद न के बराबर है। क्योंकि कंपनी के रिकवरी के वक्त सबसे पहले कर्जदारों को पैसा दिया जाएगा। इसके बाद बचे पैसों में से निवेशकों को दिया जाता है।

बता दें कि मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने पिछले साल स्टॉक एक्सचेंज से 331 सस्पेक्टेड शेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था।

2 लाख शेल कंपनियों पर लग चुकी है रोक-

सरकार अवैध फंड के इस्तेमाल पर रोकने के लिए पहले ही 2 लाख शेल कंपनियों पर रोक लगा चुकी है। बीएसई ने सर्कुलर के द्वारा कहा कि इन कंपनियों में से 210 कंपनियों में 6 महीने पहले से ही ट्रेडिंग (शेयरों में खरीद-बिक्री) बंद है।

दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही हैंर कंपनी-

एनएसई ने अपने प्लेटफॉर्म से पिछले महीने सितंबर में 14 कंपनियों को हटाया था। एनएसई ने अपने एक बयाने में कहा था कि ये सभी कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही हैं। बीते कुछ महीनों से एनएसई ऐसी कंपनियों को डिलिस्ट कर रही है जो 6 महीने या फिर उससे ज्यादा टाइम से सस्पेंड चल रही हैं।

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