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कोबरा कमांडो की रिहाई की पूरी कहानी, इनकी रही खास भूमिका

जनअदालत में चर्चा के बाद नक्सलियों ने जवान को छह दिन बाद समाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारों के हवाले कर दिया।

Ashiki

AshikiBy Ashiki

Published on 9 April 2021 9:55 AM GMT

कोबरा कमांडो की रिहाई की पूरी कहानी, इनकी रही खास भूमिका
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रायपुर: बीजापुर में 6 दिन पहले बंधक बनाए गए कोबरा जवान राकेश्वर सिंह मनहास को नक्सलियों ने रिहा कर दिया है। नक्सलियों ने जनअदालत लगातर जवान को बिना शर्त के रिहा किया। जवान को छुड़ाने के लिए 4 लोगों की टीम गयी थी, जिसमें स्थानीय पत्रकार भी शामिल थे। जवान के सकुशल वापस लाये जाने पर पत्रकारों की भूमिका की काफी सराहना की जा रही है।

जवान ने बताई कहानी

मालूम हो कि 3 अप्रैल को बीजापुर जिले के टेकलगुड़ा और जोनागुड़ा गांव के पास सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 22 जवान शहीद हो गए थे। जबकि इस हमले में 30 से अधिक जवान घायल हुए थे। वहीं जवान राकेश्वर ने रिहा होने के बाद बताया कि एंबुश में फंसने के बाद नक्सलियों ने उनसे आत्मसमर्पन करने को कहा था। जब उन्होंने समर्पण कर दिया इसके बाद उन्हें कहां ले जाया गया उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। क्योंकि उनकी आंखों पर पट्टी बांधी दी गई थी।

जवान को लाने के लिए पत्रकारों ने की कड़ी मेहनत

कोबरा जवान राकेश्वर सिंह मनहास ने बताया कि जब तक वे नक्सलियों के कब्जे में रहे नक्सली स्थानीय बोली में आपस में बात किया करते थे, जिसके चलते से उन्हें नक्सलियों की भाषा समझ नहीं आ रही थी। बता दें कि राकेश्वर सिंह को पकड़ने के बाद नक्सलियों ने पर्चा जारी करके राज्य सरकार से मध्यस्थता करने की मांग की थी, जिसके बाद बस्तर के गांधीवादी कार्यकर्ता और पद्मश्री से सम्मानित धर्मपाल सैनी और गोंडवाना समाज के प्रमुख मुरैया तरेम समेत 7 सदस्यी पत्रकार दल जंगल गए थे। पत्रकारों ने बताया कि नक्सलियों ने सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारों से बातचीत के बाद जनअदालत लगाकर जवान को रिहा कर दिया।


20 गांवों से आदिवासियों को बुलाकर लगाई थी जनअदालत

आपको बता दें जवान की रिहाई के पहले नक्सलियों की पामेड़ एरिया कमेटी ने गुरुवार को टेकलमेटा गांव के पास जंगल में 20 गांवों से आदिवासियों को बुलाकर जनअदालत लगाई थी। जनअदालत में चर्चा के बाद नक्सलियों ने जवान को छह दिन बाद समाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारों के हवाले कर दिया। रिहा होते ही राकेश्वर ने सबसे पहले नम आंखों से मीडिया कर्मियों को गले लगा लिया।

जवान को लाने वाले पत्रकारों के नाम

  1. गणेश मिश्रा
  2. के शंकर
  3. मुकेश चंद्राकर
  4. युकेश चंद्राकर
  5. रंजन दास
  6. चेतन कपेवार
  7. 7 रवि रुंजे
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