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अलविदा 'उड़न सिख' : जानिए मिल्खा सिंह की प्रोफाइल, उपलब्धियां और पुरस्कार

भारत के इतिहास में 18 जून 2021 की तारीख हमेशा मिल्खा सिंह के निधन के रूप में याद की जाएगी। देश का एक ऐसा सितारा जिन्होंने दुनियाभर में देश का नाम रौशन किया वह इस दुनिया को अलविदा कह गया।

Rahul Singh Rajpoot

Rahul Singh RajpootWritten By Rahul Singh Rajpoot

Published on 19 Jun 2021 7:31 AM GMT

अलविदा ‘उड़न सिख’ : जानिए मिल्खा सिंह की प्रोफाइल, उपलब्धियां और पुरस्कार
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फाइल फोटो, साभार-सोशल मीडिया

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भारत के इतिहास में 18 जून 2021 की तारीख हमेशा मिल्खा सिंह के निधन के रूप में याद की जाएगी। देश का एक ऐसा सितारा जिन्होंने दुनियाभर में देश का नाम रोशन किया, लेकिन शुक्रवार की रात इस दुनिया को अलविदा कह दिया। ऐसे महान सपूत मिल्खा सिंह को पूरा देश याद कर रहा है और उनकी उपलब्धियों को गिना रहा है। महान धावक मिल्खा सिंह 91 साल के थे और दुनियाभर में फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर थे। उनके निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के साथ ही खेल जगत की तमाम हस्तियों ने शोक जताया है।

बता दें कि बीते 13 जून को ही मिल्खा सिंह की पत्नी निर्मल कौर का कोरोना के कारण निधन हो गया था। मिल्खा सिंह के परिवार में तीन बेटियां डॉ मोना सिंह, अलीजा ग्रोवर, सोनिया सांवल्का और बेटा जीव मिल्खा सिंह हैं। गोल्फर जीव मिल्खा सिंह 14 बार के अंतरराष्ट्रीय विजेता हैं। उन्हें भी अपने पिता की तरह पद्म श्री पुरस्कार मिला चुका है।


मिल्खा सिंह उनकी पत्नी निर्मल कौर, साभार-सोशल मीडिया

भारत-पाक विभाजन में माता-पिता की हत्या

मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवम्बर 1929 गोविंदपुरा (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा हैं) में हुआ था। उनका बचपन बेहद ही कठिन दौर से गुजरा था, बंटवारे के समय उन्होंने अपने माता-पिता समेत कई परिजनों को खो दिया था, जिसके बाद वह अपनी बहन के साथ भारत में रहने लगे थे। भारत के सबसे बड़े खिलाड़ियों में से एक मिल्खा को जिंदगी ने काफी जख्म दिए, लेकिन उन्होंने अपने खेल के रास्ते में उन्हें रोड़ा नहीं बनने दिया। माता-पिता की हत्या के बाद वह पाकिस्तान छोड़कर दिल्ली के शरणार्थी शिविरों में छोटे-मोटे अपराध करके गुजारा करते थे और जेल भी गए। इसके अलावा सेना में दाखिल होने के तीन प्रयास नाकाम रहे। मिल्खा को चौथे प्रयास में सेना में भर्ती होने का मौका मिला। सिकंदराबाद में पहली नियुक्ति के साथ वह पहली दौड़ में उतरे। उन्हें शीर्ष दस में आने पर कोच गुरदेव सिंह ने एक गिलास दूध ज्यादा देने का वादा किया था। वह छठे नंबर पर आए और बाद में 400 मीटर में खास ट्रेनिंग के लिए चुने गए। इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन चुका है।


फाइल फोटो, साभार-सोशल मीडिया

मिल्खा सिंह की उपलब्धियां

मिल्खा सिंह जो फ्लाइंग सिख के नाम से सुविख्यात थे उन्होंने एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता में चार बार स्वर्ण पदक जीता था। 1958 के राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था। हालांकि उन्हें 1960 के रोम ओलंपिक के 400 मीटर फाइनल में उनकी एपिक रेस के लिए याद किया जाता है। उन्होंने 1956 और 1964 के ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था और 1959 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। मिल्खा सिंह के बाद अब तक भारत में उनके जैसा धावक कोई नहीं आया। मिल्खा सिंह का जलवा करीब दस साल तक चला। मिल्खा सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स में एक और एशियन गेम्स में चार गोल्ड देश के लिए जीते। हालांकि मिल्खा सिंह भारत के लिए ओलंपिक में कोई पदक नहीं जीत पाए। एक बार वे इसे चंद कदम दूर रह गए थे। उसके बाद से आज तक कोई वहां तक भी नहीं पहुंच पाया, जहां मिल्खा सिंह पहुंचने में कामयाब हो गए थे।


फाइल फोटो, साभार-सोशल मीडिया

200 मीटर और 400 मीटर के नेशनल रिकॉर्ड

मिल्खा सिंह ने साल 1958 में जापान में खेले गए एशियन गेम्स में 200 मीटर और 400 मीटर की रेस में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दोनों दौड़ों में वे पहले नंबर पर रहे। इसके बाद साल 1962 आया उस साल जकार्ता में एशियाई खेल हुए। साल 1958 की तरह ही मिल्खा सिंह का जलवा इस भी चला। मिल्खा सिंह ने 200 मीटर की रस में गोल्ड अपने नाम किया और 400 मीटर की रिले रेस में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया। हालांकि मिल्खा सिंह कभी भी ओलंपिक में कोई पदक नहीं जीत पाए और इसका मलाल उन्हें हमेशा रहा। 1960 ओलंपिक में मिल्खा सिंह ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उस साल 400 मीटर की रेस में मिल्खा सिंह चौथे स्थान पर रहे थे, यानी मेडल से बस चंद कदम दूर वे रह गए थे। अगर वे तीसरे स्थान पर भी आ जाते तो कम से कम कॉस्य पदक तो भारत का हो ही जाता। हालांकि उसके बाद चौथे स्थान पर भी कोई नहीं पहुंच पाया है।

पाक राष्ट्रपति ने दी थी 'उड़न सिख' की संज्ञा

उनकी कहानी 1960 की भारत पाक खेल मीट की चर्चा के बिना अधूरी रहेगी। उन्होंने रोम ओलंपिक से पहले पाकिस्तान के अब्दुल खालिक को हराया था। पहले मिल्खा पाकिस्तान नहीं जाना चाहते थे, जहां उनके माता-पिता की हत्या हुई थी लेकिन प्रधानमंत्री नेहरू के कहने पर वह गए। उन्होंने खालिक को हराया और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने उन्हें 'उड़न सिख' की संज्ञा दी।


पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान, साभार-सोशल मीडिया

52 साल तक बना रहा मिल्खा का रिकॉर्ड

मिल्खा सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में ट्रैंक ऐंड फील्ड में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने। उनका यह रिकॉर्ड 52 साल तक कायम रहा। डिस्कस थ्रोअर कृष्णा पूनिया ने 2010 के गेम्स में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद विकास गौड़ा ने 2014 में सोने का तमगा हासिल किया। मिल्खा सिंह के सोने के तमगे का खूब जश्न हुआ। उनके अनुरोध पर तब के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने एक दिन का राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया था।


पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू के साथ मिल्खा सिंह, साभार-सोशल मीडिया

खेल जगत में इकलौते बाप-बेटा जिन्हें मिला है पद्मश्री

मिल्खा सिंह और उनके बेटे जीव मिल्खा सिंह इकलौते ऐसे पिता-पुत्र की जोड़ी थी, जिन्हें उनकी खेल उपलब्धियों के लिए पद्मश्री अवार्ड मिला है। बता दें स्वर्गीय मिल्खा सिंह के बेटे जीव मिल्खा सिंह इंटरनेशनल स्तर के गोल्फर हैं। जीव मिल्खा सिंह देश के इकलौते भारतीय गोल्फर हैं, जिन्होंने दो बार 2006 और 2008 में एशियन टूर आर्डर ऑफ मेरिट जीता है। वह यूरोपियन टूर, जापान टूर और एशियन टूर में खिताब जीत चुके हैं। जीव मिल्खा सिंह अपने करियर में 28वीं विश्व रैंकिंग हासिल की थी, इसके ऊपर अभी तक किसी भारतीय गोल्फर की व‌र्ल्ड रैंकिंग नहीं रही है। उनकी इन्हीं खेल उपलब्धियों के लिए भारत सरकार उन्हें भी पद्मश्री सम्मान दे चुकी है।


बेटे जीव के साथ मिल्खा सिंह, साभार-सोशल मीडिया

मिल्खा सिंह पर बनी फिल्म 'भाग मिल्खा भाग'

मिल्खा सिंह देश में एक ऐसा नाम था जिनकी जिंदगी पर हर बड़ा फिल्म निर्माता फिल्म बनाना चाहता था। लेकिन मिल्खा सिंह इस पर राजी नहीं हो रहे थे। मिल्खा सिंह को 1960 के दशक के बाद के फिल्मों में बिल्कुल रुचि नहीं रह गई थी। शायद इसलिए वो अपनी बायोपिक फिल्म बनवाने के लिए राजी नहीं हो रहे थे। मिल्खा सिंह ने इंटरव्यू के दौरान कहा था कि कई सालों से फिल्म निर्माण के लिए लोग उनसे संपर्क कर रहे थे, लेकिन वो सभी फिल्म निर्माता के ऑफर को मना करते रहे। एक दिन उन्होंने अपने बेटे जीव के कहने पर हामी भर दी। दरअसल, उनके बेटे को फिल्मों का काफी शौक था। मिल्खा सिंह ने बताया था कि यात्रा के दौरान फ्लाइट में उनके बेटे जीव फिल्में देखा करते थे। एक यात्रा के समय उनके बेटे ओम प्रकाश मेहरा की फिल्म 'रंग दे बसंती' देख रहे थे और तभी उन्हें लगा कि उनके पिता की बायोपिक फिल्म के साथ न्याय वो ही कर सकते हैं।


भाग मिल्खा भाग फिल्म का पोस्टर, साभार-सोशल मीडिया

उस समय प्रकाश मेहरा भी मिल्खा सिंह की बायोपिक बनाने चाहते थे, लेकिन वो इसके लिए उन्हें उनकी हां की जरुरत थी। इसके बाद मिल्खा सिंह के बेटे जीव ने अपने पिता को फिल्म के लिए काफी मनाया। इसके बाद उन्होंने हामी भर दी और इस तरह सिनेमा फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' का निर्माण हो पाया। इस फिल्म में मिल्खा सिंह का किरदार फरहान अख्तर ने निभाया था। ये फिल्म काफी सुपरहिट साबित हुई थी, जनता ने इसपर खूब प्यार लुटाया था।

Rahul Singh Rajpoot

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