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Global Inequality Report 2022: भारत में अमीर-गरीब की खाई सबसे ज्यादा, देखें Y-Factor योगेश मिश्र के साथ

Global Inequality Report 2022: ‘वैश्विक असमानता रिपोर्ट 2022’ के मुताबिक भारत दुनिया के उन देशों में प्रमुखता से खड़ा है जहां गरीबी और असमानता व्यापक रूप से मौजूद है जबकि एक छोटा सा तबका धन दौलत में सराबोर है।

Yogesh Mishra
Published on 18 Jan 2022 1:43 PM GMT
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Global Inequality Report 2022: अमीर-गरीब का सबसे ज्यादा अंतर भारत में है। दुनिया के किसी अन्य देश में ऐसा अंतर नहीं देखा गया है। जबकि यूरोप में असमानता सबसे कम है। 'वैश्विक असमानता रिपोर्ट 2022' के मुताबिक भारत दुनिया के उन देशों में प्रमुखता से खड़ा है जहां गरीबी और असमानता व्यापक रूप से मौजूद है जबकि एक छोटा सा तबका धन दौलत में सराबोर है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2014 से सबसे अमीर दस फीसदी और सबसे गरीब 50 प्रतिशत लोगों की आय में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है।

Y-Factor With Yogesh Mishra - वैश्विक असमानता रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सिर्फ दस प्रतिशत लोगों के पास देश की आधे से भी ज्यादा (57 प्रतिशत) संपत्ति है जबकि देश की आधी आबादी सिर्फ 13 प्रतिशत संपत्ति पर गुजारा करने को मजबूर है। इस रिपोर्ट ने चेताया है कि 2020 में दुनिया की कुल आय घटी है जिसमें लगभग आधी गिरावट अमीर देशों में आई है जबकि बाकी कम आय वाले और नए उभर रहे देशों में दर्ज हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह गिरावट दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया और खासतौर पर भारत में दर्ज की गई है।

समानता और असामनता की प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो:सोशल मीडिया)
समानता और असामनता की प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो:सोशल मीडिया)

भारत की औसत आमदनी

असमानता रिपोर्ट के अनुसार, भारत में टॉप के दस फीसदी लोगों के पास 57 प्रतिशत आमदनी है। सबसे ऊपरी एक फीसदी लोगों के पास देश की कुल आय का एक प्रतिशत है और नीचे के 50 प्रतिशत लोगों का हिस्सा गिरकर 13 प्रतिशत पर चला गया है।

मिडिल क्लास

रिपोर्ट के मुताबिक भारत का मिडिल क्लास तुलनात्मक रूप से ज्यादा गरीब है। देश के मिडिल क्लास के पास देश की कुल आय का औसत सात लाख 23 हजार 930 रुपये यानी लगभग 29.5 प्रतिशत है। जबकि सबसे अमीर एक प्रतिशत लोगों की औसत आय तीन करोड़ 24 लाख 49 हजार 360 रुपये है। टॉप के दस फीसदी लोगों की औसत आय 63 लाख 54 हजार 70 रुपये है।

सालाना कमाई

2021 में भारत की वयस्क आबादी की औसत वार्षिक आय दो लाख चार हजार 200 रुपये आंकी गई, निचले आधे हिस्से की औसत आय 53 हजार 610 रुपये, औसत भारतीय घर की सालाना कमाई नौ लाख 83 हजार 10 रुपये रही जबकि निचले तबके के आधे से ज्यादा परिवारों के पास संपत्ति लगभग न के बराबर (66 हजार 280 रुपये) रही है।

नीति आयोग का इंडेक्स

नीति आयोग ने हाल ही में मल्टी-डायमेंशनल पावर्टी इंडेक्स जारी किया था जिसमें कहा गया था कि हर चार में से एक भारतीय बहुआयामी तौर पर गरीब है। यानी हर तरह से गरीबी है। ऐसे गरीबों की संख्या बिहार में सबसे ज्यादा (51.91 प्रतिशत) है. दूसरे नंबर पर झारखंड (42.16 प्रतिशत) है और तीसरे पर उत्तर प्रदेश (37.79 प्रतिशत) है।

दुनिया की स्थिति

असमानता रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में असमानता आज उसी स्तर पर पहुंच चुकी है, जो 20वीं सदी की शुरुआत में तब हुआ करती थी जब साम्राज्यवाद अपने चरम पर था। दुनिया की आधी गरीब आबादी के पास लगभग कुछ भी नहीं है। दुनिया की कुल आय में इस तबके का हिस्सा मात्र दो फीसदी है जबकि दुनिया के दस प्रतिशत सबसे अमीर लोग 76 प्रतिशत धन पर काबिज हैं।

मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका को असमानता के मामले में सबसे ऊपर रखा गया है जबकि यूरोप में असमानता सबसे कम है। यूरोप के दस फीसदी सबसे अमीर लोगों के पास 36 प्रतिशत आय है जबकि पूर्वी एशिया के सबसे अमीर दस फीसदी लोगों के पास 43 प्रतिशत. दक्षिण अमेरिका में यह आंकड़ा 55 प्रतिशत है।

Divyanshu Rao

Divyanshu Rao

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