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शिक्षकों का फर्जिफिकेशन ! हड़पने चाहे 30 लाख, मिला निलंबन

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RishiBy Rishi

Published on 10 Jan 2018 3:03 PM GMT

शिक्षकों का फर्जिफिकेशन ! हड़पने चाहे 30 लाख, मिला निलंबन
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जौनपुर : बीएसए और वित्त एंव लेखाधिकारी का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर लाखों रुपये ऋण लेने वाले बक्शा ब्लाक के दो शिक्षकों को बुधवार को बीएसए ने निलंबित कर दिया है। हाउसिंग कंपनी से 30 लाख रुपये गृहऋण लेने के लिए इन शिक्षकों ने विभाग के मुखिया का जाली हस्ताक्षर बनाया था। जब हाउसिंग कंपनी ने बीएसए जौनपुर के पास दोनों शिक्षकों के प्रपत्र भेजे तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

मामले की गंभीरता को देखते हुए बीएसए राजेंद्र सिंह ने दोनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया है।

ये भी देखें :सीएम साहब.. यहां तो फर्जी अटेंडेंस पर निकल रहा वेतन, शिक्षक संघ ने उठाई आवाज

यह ऋण कानपुर स्थित स्पार्कल अर्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटड हाउसिंग सोसाइटी द्वारा लिया जा रहा था। उक्त फाईनेंस कंपनी ने बीएसए राजेंद्र सिंह के पास कागजों को सत्यापन करने के लिए भेजा तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

बक्शा थाना क्षेत्र के नरीं खुंशापुर निवासी मनोज सिंह इसी ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय गैरी खुर्द में हेडमास्टर के रूप में तैनात हैं। दूसरे शिक्षक विजय कुमार यादव निवासी सरसड़ा सरायहरखू की तैनाती बक्शा ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय अलहदियां में प्रधानाध्यापक के रूप में नियुक्त हैं। उक्त दोनों शिक्षकों ने कानपुर स्थित स्पार्कल अर्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटड हाउसिंग सोसाइटी से क्रमश: 20 लाख और 10 लाख रुपये गृह ऋण के लिए आवेदन किया था।

आरोप है कि इसके लिए शिक्षकों ने बीएसए के वित्त एंव लेखाधिकारी नंदराम कुरील का फर्जी हस्ताक्षर, उनकी मोहर लगाकर जौनपुर में शिक्षक के रूप में कोषागार से वेतन लेने का प्रमाण पत्र भी संलग्न कर दिया।

उधर कानपुर स्थित उक्त संस्था ने जौनपुर के बीएसए राजेंद्र सिंह को पत्र भेज कर वेरीफिकेशन कराया तो खुद बीएसए व लेखाधिकारी अपनी फर्जी दस्तखत देख चौंक गए। इस संबंध में बीएसए सिंह ने बताया कि दोनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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