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​एक तरफ सीएम योगी कर रहे थे निरीक्षण, दूसरी ओर इलाज के लिए तड़प रहा था मरीज

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Published on 8 May 2017 5:37 AM GMT

​एक तरफ सीएम योगी कर रहे थे निरीक्षण, दूसरी ओर इलाज के लिए तड़प रहा था मरीज
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आगरा: चाहे सीएम योगी सरकारी डॉक्टरों को जितना भी मरीजों का ख्याल रखने और सही इलाज देने की बात कहें, लेकिन डॉक्टर हैं कि वह कुछ भी मानने को तैयार नहीं। ऐसा ही सरकारी डॉक्टरों का अमानवीय चेहरा आगरा में सामने आया है। जहां सीएम की डांट से बचने के चक्कर में डॉक्टरों ने एक मरीज को एंबुलेंस से दूसरे हॉस्पिटल में शिफ्ट करने का बहाना लगा कर थाने में भेज दिया।

मरीज को थाने से तब छोड़ा गया, जब सीएम योगी हसन मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण कर वापस चले गए। वहीं इस मामले के बाद पीड़ित अपने परिवार के साथ सर्किट हाउस के बाहर पहुंच गया और सीएम योगी से मिलने की गुहार लगाता रहा। लेकिन वह मौजूद ना भाजपाइयों का दिल पिघला और ना ही पुलिस प्रशासन ने उसकी कोई सुनवाई की।

यह है पूरा मामला

पेशे से रिक्शा चालक आशुतोष बीते दिनों डीएम गौरव दयाल से मिला और अपनी परेशानी बताई। जिसके बाद डीएम ने पीड़ित की हालात देखकर एस ऍन प्रशासन को तत्काल उसे भर्ती करने और समुचित इलाज करने के आदेश दिए। 2 दिन पहले डॉक्टरों ने आशुतोष को एस ऍन हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया। शनिवार रात रिक्शा चालक आशुतोश की अचानक तबियत ख़राब हो गई।

पीड़ित को लेकर उसके परिजन एस ऍन हॉस्पिटल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने भर्ती तो कर लिया लेकिन इलाज शुरू नहीं किया। वहीं पीड़ित आशुतोष और उसके परिजनों ने बताया कि डॉक्टरों के आगे कई बार गुहार लगाई। लेकिन डॉक्टरों ने इलाज शुरू नहीं किया। पीड़ित का आरोप है कि जिद करने के बाद डॉक्टरों ने उससे मारपीट की और उसकी जेब में रखे पैसे भी निकाल लिए।

आगे की स्लाइड में जानिए पीड़ित की मां ने किस तरह बयां किया अपना दर्द

पीड़ित की मां ने बताया कि जब उन्होंने डॉक्टरों के आगे रविवार को आने वाले सीएम योगी के आगे शिकायत करने की बात कही, तो रविवार सुबह डॉक्टरों ने पीड़ित को परिवार सहित एंबुलेंस में दूसरा हॉस्पिटल में भेजने की बात कहकर थाना एमएम गेट में भेज दिया। जहां पर पीड़ित और उसके परिवार को जब तक सीएम योगी ऐसन का निरीक्षण कर के चले नहीं गए, तब तक नहीं छोड़ा गया।

अपनी बीमारी से परेशान रिक्शा चालक आशुतोष अपने परिजनों के साथ सीएम योगी के पास गुहार लगाने सर्किट हाउस पहुंचा, जहां पीड़ित अपने परिवार के साथ भाजपाइयों के आगे सीएम योगी से मुलाकात कराने को लेकर रोता बिलखता हुआ और मिन्नतें करता नजर आया। लेकिन पीड़ित की गुहार सुनने वाला कोई नहीं था क्योंकि अधिकारी बस इसी फिराक में थे कि उनकी कमी सीएम तक न पहुंच जाए।

यह है पीड़ित की बहन का कहना

हालांकि आशुतोष मीडिया के कैमरों में कैद हो गया, लेकिन ना जाने ऐसे कितने आशुतोष और उसके परिजन मुख्यमंत्री से मिलकर अपना दर्द बताने को आए और प्रशासन के इस स्वांग सुरक्षात्मक रवैये की भेंट चढ़ गए।

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