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कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला 8 साल बाद बरी किए 3 हत्यारोपी, वादी को बनाया मुलजिम

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Published on 24 Nov 2017 7:20 AM GMT

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला 8 साल बाद बरी किए 3 हत्यारोपी, वादी को बनाया मुलजिम
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आगरा: जमीन के एक टुकड़े के लिए एक बेटे ने बुजुर्ग माता-पिता की हत्या कर दी और आरोप लगा दिया अपने बड़े भाई-भाभी और भाई के दोस्त पर। विवेचक और वादी की साजिश से आठ साल तक दो और साढ़े तीन माह तक एक निर्दोष जेल में न किए जुर्म की सजा भुगतते रहे।

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लेकिन आखिरकार अदालत ने दूध का दूध और पानी का पानी करते हुए तीनों आरोपियों को बरी कर दिया है। वहीं वादी और विवेचक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। हालांकि कोर्ट ने निर्दोषों को रिहा कर दिया लेकिन अब उनके परिजनों का कहना है कि जिंदगी के महत्वपूर्ण आठ साल जेल में जो खराब हुए उनकी भरपाई कौन करेगा?

क्या था पूरा मामला

मामले के अनुसार फतेहपुर सीकरी के गांव उन्देरा निवासी बद्री प्रसाद शर्मा उनकी पत्नी गया देवी की 27 नवंबर 2009 को हत्या कर दी गई। मृतक के पुत्र रामवीर शर्मा ने बड़े भाई राजवीर, भाभी कुसुमा और मित्र चेतन पर हत्या का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया।

रामवीर शर्मा ने पुलिस को बताया पिता ने उसकी पत्नी हेमलता के नाम गांव के मकान की वसीयत कर दी थी। इसे लेकर राजवीर का माता-पिता से विवाद चल रहा था। राजवीर और कुसुमा कलवारी में मकान बनाकर रह रहे थे। दोनों को आशंका थी कि पिता कहीं 14 बीघा खेत भी कहीं उसके नाम न कर दें। इसलिए 27 नवंबर को राजवीर ने पत्नी और दोस्त की मदद से माता-पिता की गोली मारकर हत्या कर दी।

रामवीर शर्मा और हेमलता के शोर मचाने पर हत्यारोपी बाइक से भाग गए। हत्यारोप में निरुद्ध कुसुमा देवी की साढ़े तीन माह बाद जमानत स्वीकृत हो सकी। जबकि राजवीर और चेतन तभी से जेल में निरुद्ध थे। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने दस गवाह पेश कराए गए। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के बैलेस्टिक एक्सपर्ट की गवाही भी कराई गई।

उक्त मामले में निर्णय पारित करने के दौरान अदालत के संज्ञान में तथ्य आए कि वादी ने विवेचक घनश्याम सिंह के साथ साजिश रचकर तीन निर्दोष को जेल भेजा। अदालत ने तीनों को बरी करते हुए विवेचक और वादी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

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