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एलयू प्रकरण: कोर्ट ने पूछा- क्‍यों नहीं लिया एक्‍शन, अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 6 July 2018 3:00 PM GMT

एलयू प्रकरण: कोर्ट ने पूछा- क्‍यों नहीं लिया एक्‍शन, अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी
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लखनऊ: लखनऊ यूनिवर्सिटी में बुधवार को हुई अराजकता पर शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने स्‍वत: संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट के तलब करने पर एलयू वीसी प्रोफेसर एसपी सिंह, प्रॉक्‍टर विनोद सिंह, डीजीपी ओ पी सिंह, एसएसपी लखनऊ दीपक कुमार समेत अन्‍य अधिकारी उपस्थित हुए। इस दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश सिंह की बेंच ने सुनवाई की। वाइस चांसलर प्रोफेसर एसपी सिंह ने अपना पक्ष रखा। उन्‍होंने घटना के लिए पुलिस की लापरवाही को जिम्‍मेदार ठहराया। हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 16 जुलाई को निर्धारित की है। अगली सुनवाई तक पुलिस को कोर्ट में प्रकरण से संबंधित एक्‍शन पर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने जहां पुलिस से एक्‍शन के बाबत पूछा, वहीं एलयू प्रशासन से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव देने को भी कहा है। एसएसपी ने कोर्ट को बताया कि घटना के जिम्‍मेदार आरोपी छात्रों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगी हुई हैं। कोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी को भी आदेश देते हुए कहा कि मुख्‍य सचिव एक कमेटी बनाएं और कार्ययोजना तैयार करें। जिससे भविष्‍य में किसी भी शिक्षण संस्‍थान में ऐसी घटना न हो।

कोर्ट की अन्‍य खबरें

शिक्षा विशारद डिग्री सहायक अध्यापक नियुक्ति के लिए मान्य नहीं

इलाहाबाद: उच्च न्यायालय ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग की शिक्षा विशारद डिग्री को वैध डिग्री न मानते हुए सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति की मांग में दाखिल याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी है। याची अम्बेडकर प्राथमिक विद्यालय फिसवां बाजार कुशीनगर में सहायक अध्यापक नियुक्त हुआ था, जिसे निरस्त कर दिया गया, तो यह याचिका दाखिल की गयी थी। जिला समाज कल्याण अधिकारी कुशीनगर के विरूद्ध दाखिल इन्दू देवी की याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एस.पी केशरवानी ने कहा कि वैध डिग्री के बगैर कोई भी सहायक अध्यापक नियुक्त नहीं हो सकता। डिग्री को एन.सी.टी.ई से मान्यता मिली होनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा है कि हिन्दी साहित्य सम्मेलन एक पंजीकृत सोसायटी है। यह न तो विश्वविद्यालय या डीम्ड विश्वविद्यालय है, न ही शिक्षा परिषद है। इसका कोई शिक्षण संस्थान नहीं है और न ही यह शिक्षण कार्य करती है। न इसका कोई स्कूल है और न ही यह किसी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है। इसकी डिग्रियों को 1967 के बाद मान्यता नहीं दी गयी है। इसलिए इसके द्वारा जारी शिक्षा विशारद डिग्री मान्य नहीं है।

वाहन पार्किंग व यातायात को लेकर बैठक स्थगित

इलाहाबाद: उच्च न्यायालय के आसपास यातायात व वाहन पार्किंग व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन व महानिबन्धक के बीच छह जुलाई को होने वाली बैठक स्थगित हो गयी है। महानिबन्धक फैज आलम के आवश्यक कार्य से लखनऊ जाने के कारण बैठक नहीं हो सकी। बैठक में भाग लेने वाले अधिवक्ता शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि शीघ्र ही बैठक की तिथि तय की जायेगी।

समान अपराध तो सजा अलग क्यों?

इलाहाबाद: हाईकोर्ट ने समान आरोप में दो आरोपियों को अलग-अलग दी गयी सजा को रद्द कर दिया है और कहा है कि गंभीर अपराध पर कम सजा और हल्के अपराध पर कड़ी सजा सही नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने सेवा बर्खास्तगी को संशोधित करते हुए सह आरोपी ड्राइवर/कांस्टेबल सी.आर.पी.एफ. वाराणसी सुरेन्द्र कुमार को मिली सजा याची कांस्टेबल को देने पर छह हफ्ते में विचार करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एस.पी.केशरवानी ने सुरेन्द्र कुमार शर्मा की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है। याची 25वीं वाहिनी सीआरपीएफ पहाड़िया मण्डी वाराणसी में कांस्टेबल नर्सिंग पद पर तैनात था। वह अन्य सिपाही सुरेन्द्र कुमार के साथ मोटर साइकिल से जा रहा था। दुर्घटना में कांस्टेबल श्याम एच.बैरेल की मौत हो गयी। घटना की संयुक्त जांच हुई। आरोप पत्र दिए गए। सेवा में लापरवाही का दोषी करार दिया गया और मोटर साइकिल चला रहे कांस्टेबल को तीन साल के लिए वेतनमान कम करने का दण्ड दिया गया। याची का कहना था कि जब आरोप एक समान है। संयुक्त जांच में लापरवाही का दोनों को दोषी पाया गया तो एक को वेतनमान घटाने व दुसरे को बर्खास्त कने का आदेश अपराध से अधिक है। याची को भी वेतनमान कम करने का दण्ड मिलना चाहिए।

खाद्यान्न घोटाले के आरोपी की याचिका खारिज

इलाहाबाद: हाईकोर्ट ने बलिया की विपणन निरीक्षक के पति नीरज कुमार बरनवाल के विरूद्ध खाद्यान्न घोटाले के आरोप में खेजुरी थाने में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने व इनकी गिरफ्तारी पर रोक से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि याची अधीनस्थ न्यायालय में जमानत अर्जी दाखिल करता है तो उसे यथाशीघ्र निस्तारित किया जाए। याचिका का प्रतिवाद अधिवक्ता परवेज इकबाल अंसारी ने किया।

यह आदेश न्यायमूर्ति वी.के.नारायण तथा न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता की खण्डपीठ ने नीरज बरनवाल की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याची पर आरोप लगाया गया है कि दो ट्रकों से खाद्यान्न गोदाम से बलिया भेजा गया किन्तु चार ट्रक दिखाया गया। फर्जी दस्तावेज पेश किए और छलकपट पर याची ने कृषि उत्पादन मण्डी समिति तिखमपुर बलिया से फर्जी खाद्यान्न प्रेषित किया। जिसकी जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। याची की पत्नी दीपिका बरनवाल 15 केन्द्रों की विपणन निरीक्षक हैं जिसका याची ने अनुचित लाभ लेकर घोटाला किया है।

हाईकोर्ट में ऑनलाइन गेट पास सिस्टम जारी, 9 जुलाई से होगा प्रभावी

इलाहाबाद: हाईकोर्ट में प्रवेश पास बनवाने के लिए लम्बी लाइनों से निजात दिलाने के लिए न्यायालय प्रशासन ने ई-गेट पास सिस्टम लागू किया है। 9 जुलाई से लागू होने वाले इस सिस्टम के जरिए न्यायालय परिसर में प्रवेश आॅनलाइन बनाया जा सकेगा। मोबाइल फोन के जरिए बनने वाले पास का प्रिंट या पी.डी.एफ डिजिटल फार्मेट में पेश कर आई.डी. प्रूफ के साथ परिसर में प्रवेश लिया जा सकेगा। ऐसे पास धारकों को गेट संख्या 3 ए से प्रवेश मिलेगा। इसके अलावा मैनुअल गेट पास पूर्ववत न्यायालय परिसर के बाहर काउंटर से भी जारी होते रहेंगे। गेट पास काउंटर की भीड़ को कम करने के लिए ऑनलाइन गेट पास की व्यवस्था की गयी है। इसी सूचना महानिबंधक फैज आलम ने जारी की है।

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