योगीराज में भी नहीं बदली सरकारी व्यवस्था, 7 साल से चल रही एक मामले की जांच

Published by Published: July 25, 2017 | 3:41 pm

कुशीनगर: कहते हैं सरकारें बदलतीं हैं, तो व्यवस्था भी बदलती हुई दिखाई देती है। क्या वर्तमान में ऐसा होता दिख रहा है? और जगहों का तो पता नहीं लेकिन कुशीनगर में हालात जस के तस ही दिख रहे हैं। पहले इंदिरा आवास और बाद में समाजवादी पेंशन और वृद्धावस्था पेंशन के घपलेबाजी से जुड़े एक मामले मे पिछले सात साल से जांच चल रही है। इस बीच कई अधिकारी आए और और चले भी गए। सभी ने मामले में ततपरता के साथ कार्यवाही करने का आदेश भी दिया। लेकिन जांच है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है।

खास बात यह है कि इस मामले में अभी तक कुछ चिन्हित लोगों पर चार मुकदमे भी दर्ज हो चुके हैं। लेकिन रोचकता इस बात को लेकर बढ़ी हुई है कि ना तो अभियुक्तों की गिरफ्तारी पुलिस कर रही है और ना ही विकास विभाग के अधिकारी जांच की कोई अंतिम रूपरेखा तय कर रहे हैं। मामला दर्जनों गरीब मुसलमान परिवारों से जुड़ा हुआ है, लेकिन गरीब लोगों की आवाज वर्तमान में भी दबी सी ही नजर आ रही है।

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क्या है पूरा मामला
मामला जिले के पडरौना ब्लॉक अन्तर्गत अवैध मांस व्यापार के लिए चर्चित गांव बसहिया का है। आरोप तत्कालीन प्रधान और उनके परिवार के लोगों पर है। आरोप है कि इंदिरा आवास अपने नजदीकी लोगों को दिलवाने के प्रयास में प्रधान ने फर्जी खातों का सहारा लिया। बताते हैं कि पडरौना शहर के इलाहाबाद बैैंक, ओबीसी बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में गांव के लोगों के खाते खोले गए, जिसमें नाम किसी का तो फ़ोटो किसी दूसरे का लगाकर सरकारी धन का बन्दरबांट किया गया।

इस गोलमाल में ज्यादातर खाते इलाहाबाद बैंक में ही खोले गए दिखते हैं। आरोप ये भी लगाया गया है कि एक ही दिन में इंदिरा आवास के इन खातों से प्रधान के परिवार के एक सदस्य ने सभी रकम को अपने खाते में ट्रांसफर करा लिया। आरोप लगाने वाले बसहिया गांव निवासी लियाकत अंसारी ने सारे आरोपों के साक्ष्य के साथ जिले के विकास विभाग और न्यायालय में प्रस्तुत कर रखा है। इस आधार पर न्यायालय के निर्देश के तहत 2015 से वर्तमान तक चार मुकदमे पडरौना कोतवाली में दर्ज किए जा चुके हैं ।

2016 के 13 मई को दर्ज मुकदमे में तत्कालीन ग्राम प्रधान, तत्कालीन खण्ड विकास अधिकारी सहित उस समय ब्लॉक में तैनात रहे छः अन्य कर्मचारियों पर 419, 420, 467, 468, 471, 409, 437 जैसे गंभीर फ्रॉड करने के धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत है। इस साल के अप्रैल महीने में 27 और 28 तारीख में भी दो अलग अलग मुकदमे पडरौना कोतवाली में इन्हीं मामलों को लेकर दर्ज किए गए। इसमें भी तत्कालीन प्रधान और उनके परिवार के लोगों को आरोपी बनाया गया है।

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आरोपों पर नजर डालें तो एक ही परिवार के कई सदस्यों को समाजवादी पेंशन, नाम बदलकर बैंकों से सांठ-गांठ कर फर्जी खातों के सहारे इंदिरा आवास का पैसा हड़पने की भी बात सामने आई है। पूर्व प्रधान को आरोपों के घेरे में लेने वाले गरीब परिवार से जुड़े लियाकत अंसारी ने बताया कि मुझे कई बार जान से मारने की धमकी दी जा चुकी है। इसके बाद भी मैंने आरटीआई द्वारा विकास विभाग और सम्बन्धित बैंकों से बहुत सारे साक्ष्य प्राप्त किए और इन सारे साक्ष्यों के साथ 2010 में शिकायत किया हूं।

कमिश्नर गोरखपुर, आयुक्त ग्राम्य विकास सहित कई अधिकारियों को भेजे गए इन शिकायती पत्रों पर कई जाँच चल रही है लेकिन अधिकारी मामले को जांच के नाम पर लटकाए हुए हैं। लियाकत बताते हैं कि बीच बीच में जांच अधिकारियों ने भी एफआईआर पडरौना कोतवाली में दिया, लेकिन पूर्व प्रधान के प्रभाव के कारण पुलिस ने सरकारी तौर पर भेजा हुआ एफआईआर दर्ज करना जरूरी नही समझा।

उसके बाद मैंने न्यायालय में 156/3 के तहत मामले को रखा। न्यायालय के आदेश पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं। लेकिन 419, 420 जैसे गभीर फ्रॉड के मामलों में भी पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर रही है। वर्तमान में जिले के अधिकारियों के बीच बड़ा फेरबदल हुआ है। जिले के सीडीओ के के गुप्त से बात की गई तो उन्होंने विषय से अपने को अनभिज्ञ बताते जल्द ही देखने की बात कही ।

 

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