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स्‍मृति ईरानी के करीबी पूर्व प्रधान की हत्या का 12 घंटे में होगा खुलासा : डीजीपी

लोकसभा 2019 के चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर अमेठी लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई स्‍मृति ईरानी के करीबी की गोली मारकर हत्‍या मामले में यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने भरोसा जताया है

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 26 May 2019 10:56 AM GMT

स्‍मृति ईरानी के करीबी पूर्व प्रधान की हत्या का 12 घंटे में होगा खुलासा : डीजीपी
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अमेठी: लोकसभा 2019 के चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर अमेठी लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई स्‍मृति ईरानी के करीबी की गोली मारकर हत्‍या मामले में यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने भरोसा जताया है कि पुलिस ये केस अगले 12 घंटे में हल कर लेगी। सिंह ने कहा, जांच जारी है और हमें कुछ अहम सुराग मिले हैं। 7 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है सांसद के करीबी की हत्या से माहौल तनावपूर्ण हो चला है। बरौली गांव में पीएसी की 3 कंपनियां तैनात की गई हैं।

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बेटे ने सुनाई हत्या की कहानी-

सुरेंद्र के बेटे अभय ने मीडिया से बात करते हुए घटना की पूरी जानकारी दी। उसने बताया कि सुरेंद्र के परिवार को दो-तीन शादियों के निमंत्रण आये थे, और वो एक बरात से लौटकर घर आकर सोये ही थे कि उन्हें गोली चलने की आवाज सुनाई दी। बारात से लौटने के बाद सब लोग अपने-अपने बिस्तर पर लेट गए थे। पिताजी के पास मामा का लड़का सोया था। 11 बजे करीब अचानक गोली चलने की आवाज आई। घर के सामने एक पंक्चर की दुकान थी तो मामा के लड़के को लगा कि शायद टायर फटा होगा। लेकिन फिर उसने देखा कि पिताजी नीचे गिरे हुए थे।

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सुरेंद्र सिंह पर बदमाशों ने चलाई ताबड़तोड़ गोली-

अभय ने बताया कि जब उसने सुरेंद्र को देखा तब उनका बहुत खून बह रहा था और गोली का निशान साफ दिख रहा था। मैं पिताजी को गाड़ी में लेकर रायबरेली जिला अस्पताल लाया। वहां उनका फर्स्ट-ऐड हुआ और फिर उन्हें लखनऊ के ट्रामा सेंटर रेफर किया गया। यहां पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

राहुल गांधी के हारने के बाद-

सुरेंद्र सिंह ने स्मृति ईरानी के लिए जोर-शोर से प्रचार किया था। अभय का कहना है कि लोकसभा चुनाव के दौरान सुरेंद्र सिर्फ खाना खाने घर आते थे, बाकी समय वो प्रचार में लगे रहते थे। राहुल गांधी के हारने के बाद जब स्मृति ईरानी सांसद बनीं तो हर तरफ जश्न मनाया गया। हमने भी जश्न मनाने के लिए विजय यात्रा निकली थी। हमको लगता है कुछ कांग्रेस समर्थकों को ये जश्न रास नहीं आया। उनके अंदर खुन्नस भर गई. और फिर ये वारदात हो गई। कुछ लोगों पर हमें शक है।

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गाली को भी अनसुना कर देते थे पिताजी-

अभय ने बताया कि उसके पिता बहुत मिलनसार व्यक्ति थे। अभय ने कहा, जहां ये घटना हुई है, वहां एक चाय की दुकान है। सभी पार्टियों के कार्यकर्ता वहां चाय पीने आते थे तो नोकझोंक हो जाती थी लेकिन ऐसी कोई लड़ाई किसी से नहीं थी। अभय ने कहा, कोई गाली भी दे देता था तो पिताजी अनसुना कर देते थे। इसी का परिणाम है कि वो तीन बार प्रधान बने थे। आज तक उन्होंने किसी पर हाथ नहीं उठाया था।

Aditya Mishra

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