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खुशखबरी: जल्द ही 70 साल में रिटायर होंगे मेडिकल कॉलेजों के प्रोफेसर

यूपी सरकार अपने मेडिकल कॉलेजों के प्रोफेसरों के लिए खुशखबरी है। 65 साल की उम्र में रिटायर होने वाले प्रोफेसर जल्द ही 70 साल की आयु तक बच्चों को डॉक्टरी पढ़ाएंगे। हालांकि नौकरी प्रोफेसरों की बढ़ेगी, लेकिन चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन से लेकर चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ. वीएन त्रिपाठी तक का मानना है कि प्रोफेसरों का सेवाकाल बढ़ाने से असल फायदा तो मेडिकल छात्रों को होगा।

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priyankajoshiBy priyankajoshi

Published on 12 May 2017 2:54 PM GMT

खुशखबरी: जल्द ही 70 साल में रिटायर होंगे मेडिकल कॉलेजों के प्रोफेसर
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लखनऊ : यूपी सरकार अपने मेडिकल कॉलेजों के प्रोफेसरों के लिए खुशखबरी है। 65 साल की उम्र में रिटायर होने वाले प्रोफेसर जल्द ही 70 साल की आयु तक बच्चों को डॉक्टरी पढ़ाएंगे।

हालांकि नौकरी प्रोफेसरों की बढ़ेगी, लेकिन चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन से लेकर चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ. वीएन त्रिपाठी तक का मानना है कि प्रोफेसरों का सेवाकाल बढ़ाने से असल फायदा तो मेडिकल छात्रों को होगा। बढ़ती आबादी को रोगमुक्त रखने के लिए डॉक्टर ज्यादा चाहिए तो डॉक्टर तैयार करने वाले मेडिकल कॉलेज भी बढ़ाने होंगे। यूपी की नई सरकार ने इसी उद्देश्य से 25 नए मेडिकल कॉलेज और 6 एम्स शुरू करने की घोषणा की। चिकित्सा शिक्षा मंत्री टंडन का कहना हैं कि सबसे पहले अब चिकित्सा शिक्षकों की कमी दूर की जाएगी, फिर कॉलेज बढ़ाए जाएंगे।

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45 प्रतिशत तक खाली पड़े तक

महानिदेशक डॉ.त्रिपाठी बताते हैं कि अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल 1745 पदों में से 5 से 45 प्रतिशत तक पद खाली पड़े हैं। मेडिकल कॉलेजों में औसतन एक चौथाई शिक्षक हैं ही नहीं। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक बताते हैं कि नए मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी कम होने पर एमसीआइ से मान्यता मिलने में संकट हो सकता है, इसलिए शासन ने प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के साथ ही विशेष भत्ता देकर निजी क्षेत्र से विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षकों को लाने की भी योजना बनाई है।

केजीएमयू और लोहिया संस्थान के शिक्षकों के समान मिलेंगे वेतन

प्राइवेट सेक्टर में विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षकों की अधिक आय से मुकाबला करने के लिए ही खास एलाउंस का प्रस्ताव बनाया जा रहा है, जबकि दूरस्थ मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी उन्हें हार्ड एरिया एलाउंस देने पर विचार किया जा रहा है। दूरदराज के मेडिकल कॉलेजों के शिक्षक खुद को उपेक्षित या कमतर न समझें, इसलिए उन्हें भी केजीएमयू और लोहिया संस्थान के शिक्षकों के बराबर सैलरी और भत्ते देने का प्रस्ताव भी बनाया जा रहा है।

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इन्होंने पत्रकारीय जीवन की शुरुआत नई दिल्ली में एनडीटीवी से की। इसके अलावा हिंदुस्तान लखनऊ में भी इटर्नशिप किया। वर्तमान में वेब पोर्टल न्यूज़ ट्रैक में दो साल से उप संपादक के पद पर कार्यरत है।

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