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Swami Prasad Maurya son: स्वामी प्रसाद मौर्य का बेटा गिरफ्तार, आइये जानें इसके पीछे की सच्चाई

Swami Prasad Maurya son: जिलाधिकारी एस राज लिंगम ने बताया कि कुशीनगर के थाना विशुनपुरा क्षेत्रान्तर्गत सपा प्रत्याशी स्वामी प्रसाद मौर्या के बेटे की गिरफ्तारी की सूचना बिल्कुल गलत है।

Rakesh Mishra
Report Rakesh MishraPublished By Deepak Kumar
Published on: 2 March 2022 5:59 PM GMT
SP candidate Swami Prasad Maurya son has not been arrested yet
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अभी नहीं हुए हैं स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे गिरफ्तार। (Social Media) 

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Swami Prasad Maurya son: फाजिलनगर विधान सभा (Fazilnagar Assembly) में (UP Election 2022) चुनाव के ठीक एक रात पहले जम कर ड्रामा हुआ। जानकारी के अनुसार फाजिलनगर विधान सभा (Fazilnagar Assembly) से सपा प्रत्याशी स्वामी प्रसाद मौर्या (SP candidate Swami Prasad Maurya) के समर्थकों ने ट्वीट कर यह वायरल कर दिया कि कुशीनगर पुलिस ने पूर्व मंत्री के बेटे अशोक मौर्या (son Ashok Maurya) को गिरफ्तार कर लिया है। आनन-फानन में यह खबर वायरल हो गयी। वहीँ जब इस सम्बन्ध में जब वहां के जिलाधिकारी से बात की गयी तो उनका कहना कुछ और ही था।

जिलाधिकारी एस राज लिंगम (District Magistrate S Raj Lingam) ने बताया कि कुशीनगर के थाना विशुनपुरा क्षेत्रान्तर्गत सपा प्रत्याशी स्वामी प्रसाद मौर्या (SP candidate Swami Prasad Maurya) के बेटे की गिरफ्तारी की सूचना बिल्कुल गलत है। जिलाधिकारी ने बताया कि एक सूचना शाम को मिली थी कि फाजिलनगर (Fazilnagar Assembly) के समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के प्रत्याशी के बेटे द्वारा पैसा बांटा जा रहा है और प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिकायत पर तत्काल मौके पर टीम गई थी और वहां पर तीन गाड़ियां और सात-आठ लोग पाए गए थे।

आचार संहिता के उल्लघन के आरोप को लेकर की पूछताछ

डीएम ने बताया कि आचार संहिता के उल्लघन के आरोप में स्वामी प्रसाद मौर्य (SP candidate Swami Prasad Maurya) के बेटे को पूछताछ के लिए थाने पर लाया गया। एमसीसी के गाइड लाइन के अनुसार 48 घंटे के अंदर जो उस विधानसभा का मतदाता नहीं है उसे वहां नहीं रहना चाहिए। यह किस परिस्थिति में वहां गए और ये वहां के वोटर भी नहीं है फिर क्या कर रहे थे।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इसकी पूछताछ के लिये आरओ और फ्लाइंग स्क्याड की टीम द्वारा मौके पर पहुँचकर जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच के बाद नियमानुसार विधिक कार्यवाही की जायेगी। समाचार लिखे जाने तक स्वामी के बेटे अशोक मौर्य से पूछताछ जारी थी।

कल हुआ था स्वामी पर हमला

बता दें कि बीते कल भी फाजिलनगर में जम कर ड्रामा हुआ था। कुशीनगर से फाजिलनगर के बीच रोड शो के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य (SP candidate Swami Prasad Maurya) के काफिले पर हमला किया गया था। इस हमले का आरोप भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र कुशवाहा पर लगाया गया। वहीँ स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी और भाजपा सांसद संघमित्रा गौतम ने इस हमले को लेकर अपनी ही पार्टी को कटघरे में खडा कर दिया।

क्यों हो रहा है चुनाव के ठीक पहले इतना ड्रामा

2017 में पडरौना से विधायक रहे और योगी सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य (SP candidate Swami Prasad Maurya) ने चुनावों से ठीक पहले भाजपा छोड़ सपा का दामन थाम लिया था। उन्हें उम्मीद थी कि सपा का साथ पकड़ वो आसानी से एक बार फिर पडरौना सीट से जीत कर विधान सभा की राह पकड़ लेंगे। लेकिन भाजपा ने उनकी चाल को उल्टा करते हुए कुशीनगर के ही कद्दावर कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह को अपने पाले में कर स्वामी को बड़ा झटका दे दिया। स्वामी को जब पडरौना से सीट से पानी राह मुश्किल लगने लगी तो उन्होंने अपने लिए सेफ सीट समझते हुए फाजिलनगर को चुना।

फाजिलनगर में त्रिकोणीय लड़ाई में फंसे हैं स्वामी

स्वामी (SP candidate Swami Prasad Maurya) जिसे अपने लिए सेफ सीट समझ रहे थे वही अब उनके लिए गले की फांस बन गयी है। भाजपा तथा बसपा के चुनावी घेराबंदी के बीच पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य (SP candidate Swami Prasad Maurya) बुरी तरह फंसे हुए प्रतीत हो रहे हैं। उन्हें इस बार लोकतंत्र की पनघट रूपी विधानसभा में पहुंचने की डगर कठिन दिख रही है। भाजपा ने लगातार दो बार विधायक रहे गंगा सिंह कुशवाहा के बेटे सुरेंद्र सिंह कुशवाहा को अपना उम्मीदवार बनाया है। बसपा ने इलियास अंसारी को मैदान में उतारा है।

इलियास एक स्थानीय नेता हैं और एक लंबे अरसे से राजनीति में सक्रिय है। वहीँ सुरेंद्र कुशवाहा भी क्षेत्रीय हैं और भाजपा के वोटो खूब भरोसा कर ताल ठोक रहे हैं। जानकार बताते है कि स्वामी प्रसाद (SP candidate Swami Prasad Maurya) चुनाव के बाजीगर है चुनावी बयार भाप जाते हैं। इस बार बसपा बखूबी जानती है कि 2012 में अल्पसंख्यक समुदाय के प्रत्याशी उतारने पर हार जीत का फैसला कम था और उस समय प्रतिद्वंदी उम्मीदवार स्थानीय थे। 2022 का माहौल कुछ और हो गया है। सपा के मतों पर सेधमारी होने के प्रबल आसार हैं।

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Deepak Kumar

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