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कुछ ऐसे हुआ है 'बाहुबली' की सफलता रोकने के लिए 'दंगल', डाला गया कलेक्शन का पर्दा

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Published on 4 Jun 2017 9:41 AM GMT

कुछ ऐसे हुआ है बाहुबली की सफलता रोकने के लिए दंगल, डाला गया कलेक्शन का पर्दा
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लखनऊ: बाहुबली ने बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। क्या इसको लेकर कोई शोर हुआ ? ज्यादा नहीं। किसी फिल्म के सौ करोड़ पार करने मात्र से उछल-कूद मचाने वाले एक हजार करोड़ का आंकड़ा पहली बार पार करने पर भी चुप हैं। आश्चर्य होता है। और तो और बाहुबली की ऐतिहासिक सफलता के बीच में अचानक दंगल के कलेक्शन की चर्चा की गई।

इसमें मजेदार बात यह थी कि दंगल के करोड़ों का कलेक्शन चीन में दिखाया गया। मानो चीन के खिलाड़ी आमिर खान से प्रेरित होकर अगले ओलंपिक में अपना पहला पदक जीतेंगे। खेलों में तो चीन ऐसे ही आगे रहा है। 1948 के ओलंपिक में चीन ने कोई पदक नहीं जीता, तो कई साल उसने दस खेल में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन जब आया तो पूरी तैयारी से आया। खैर अब बात चीन में आमिर खान की फिल्म दंगल के कलेक्शन की।

सब कुछ कितना हास्यासपद है। आखिरकार ये सब क्यों और किसलिए ? क्योंकि भारत में मीडिया को पढ़ने-सुनने वालो में एक वर्ग सदा ही ऐसा होता है, जो हर खबर को सच मानता है। ये खबरें मन मस्तिष्क पर गहरे तक प्रभाव डालती हैं और धीरे धीर नियंत्रित करने लगती हैं। ऐसी खबर निरंतर दिखाते रहने से खबर से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है।

ये दंगल की चीन में अचानक 1000 करोड़ की कमाई उसी खेल का एक छोटा सा हिस्सा है क्योंकि परसेप्शन की लड़ाई में वे नहीं चाहते कि 1000 करोड़ का आंकड़ा पार करने वाली एकमात्र भारतीय फिल्म वो हो, जिसमें भारत के गौरवशाली इतिहास का प्रस्तुतिकरण किया गया हो। इसलिए दंगल को भी 1000 करोड़ का आंकड़ा पार करवाया गया और उसकी चर्चा अधिक की गयी। उसमें भी दंगल से अधिक आमिर खान के परसेप्शन को बनाए रखा गया, जो उनका ब्रांड एम्बेसडर बन कर आगे भी उनके काम आता रहेगा।

बाहुबली में हिन्दुस्तान की अनेक सांस्कृतिक परंपराओं का भव्य प्रदर्शन किया गया है, जिसे फिल्म जगत के बॉक्स ऑफिस पर राज करने वाले आसानी से बर्दाश्त नहीं कर सकते। वो कभी नहीं चाहेेंगे कि देश की जनता की निगाह में कोई ऐसी फिल्म बसी रहे, जो उन के आत्मविश्वास और जोश को बढ़ाए और भारत की सभ्यता की जड़े मजबूत करे।

अब तक पीके ही सबसे सफल फिल्म के शिखर पर विराजमान कर रखी गई थी अर्थात शिव को दूध पिलाने वाले की हंसी उड़ाने वाला आप के मन मष्तिष्क पर राज कर रहा था, अब उसकी जगह कोई शिव की पूजा करने वाला बाहुबली ले ले, यह उन लोगों को कैसे मंजूर हो सकता है।

उनका दशकों से जमाया गया सारा खेल ही मिनटों में खत्म हो जाए वो यह कैसे सहन कर सकते हैं। ऐसे में जब आज अब पीके को तो फिर से पिक्चर हॉल में चलाया नहीं जा सकता, तो उन्होंने दंगल को चला दिया, वो भी चीन में क्योंकि भारत के सिनेमा घरों से दंगल को उतरे हुए भी महीनो हो गए थे और आनन-फानन में चीन में उसके 1000 करोड़ के कलेक्शन की चर्चा करा दी गई। जिसका परिणाम ये हुआ कि अब बाहुबली अकेले 1000 करोड़ की फिल्म नहीं रही।

अब क्या आप चीन के बॉक्स ऑफिस में कलेक्शन गिनने जाएंगे ? नहीं। जिस देश से कोई सामान्य खबर भी बाहर नहीं आ पाती, वहां हमारे एक फिल्म के कलेक्शन की खबर तुरंत आ जाती है, क्या मजेदार खेल है, वाह। वो तो इस गिरोह का बस नहीं चल रहा, वरना आज ये दंगल को बाहुबली से अधिल कलेक्शन दिखा कर नंबर एक कर दें। सौ दो सौ करोड़ रुपए का कलेक्शन दिखाना इनके लिए बाएं हाथ का खेल है। अब इनकी भी मजबूरी है क्योंकि जमीनी हकीकत कुछ और बयान कर रही है और बाहुबली भारत में ही नहीं विश्व के अनेक देशों में व्यापक छाप छोड़ने में सफल हुई है।

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