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Mohanlal Birthday: एक्टर मोहनलाल की पर्दे पर और बाहर भी इतनी शोहरत

साउथ में सबसे सफल ब्रांड अंबेसडर के रूप में भी मोहनलाल को जाना जाता है। इसके अलावा उनकी कई कंपनियां चलती हैं।

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NetworkNewstrack NetworkAshiki PatelPublished By Ashiki Patel

Published on 21 May 2021 2:31 PM GMT

Superstar Mohanlal
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 सुपरस्टार मोहनलाल (Photo-Social Media) 

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लखनऊ: भारतीय सिनेमा की बात आती है तो मलयालम फिल्म इंडस्ट्री (Malayalam film industry) किसी से कम नहीं है। इसमें कई स्टार हैं लेकिन शुमार एक्टर में मोहनलाल (Mohanlal) का नाम जरूर लिया जाता है। मोहनलाल ऐसे अभिनेता हैं, जिनके नाम अब तक 300 के लगभग फिल्में की हैं। उन्होंने केवल मलयालम ही नहीं बल्कि हिंदी, तेलुगू, तमिल और कन्नड़ सिनेमा के लिए भी काम किया है। उनकी हनक का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अजय देवगन की दृश्यम उनकी इसी नाम की फिल्म का हिंदी वर्जन थी, जो काफी हिट हुई। मोहनलाल के 61वें जन्मदिन (21 मई) पर पेश है आशिकी पटेल की रिपोर्ट-

बेजोड़ अभिनय के बादशाह

उन्होंने अपनी एक्टिंग में कभी कोई बनावटीपन नहीं दिखाया, बल्कि अपने नेचर के मुताबिक एक्टिंग की। यही ऐसी खासियत रही कि उन्हें फिल्म डायरेक्टरों ने खूब पसंद किया। फिल्म वानाप्रस्तम में उनके अभिनय ने लोगों का ऐसा दिल जीता कि उन्हें इसके लिए कई पुरस्कार मिले। उसमें उन्होंने एक कथकली कलाकार का अभिनय किया था, जिसके लिए उन्होंने छह महीने की वर्कशॉप की थी। इसके अलावा, वह भरतनाट्यम और कथक बिना किसी ट्रेनिंग के ही करते हैं।


बचपन, पढ़ाई-लिखाई और ऐक्टिंग

मोहनलाल का जन्म केरल में हुआ। उनके पिता एक वकील थे। उनके बचपन में उनका परिवार उनके ननिहाल तिरुवनंतपुरम चला गया। उनका बचपन तो नॉर्मल बच्चे के बचपन की तरह ही था। स्कूल टाइम में उनका खिंचाव कला और लोकरंगो की तरफ होने लगा। वह स्कूल में होने वाले कल्चरल प्रोग्रामों में हिस्सा लेने लगे थे। कहा जाता है कि तिरुवनंतपुरम के मॉडल स्कूल में मोहनलाल को उनकी ऐक्टिंग के लिए कक्षा छह में वह पुरस्कार मिला था, जो तब तक केवल 10वीं के ऊपर वाले छात्र-छात्राओं को मिलता था। इसके अलावा अपने कॉलेज लाइफ में भी उन्होंने महात्मा गांधी कॉलेज तिरुवनंतपुरम में भी ऐक्टिंग के कई पुरस्कार अपने नाम किए।

कुछ ऐसा रहा कैरियर

मोहनलाल की पहली फिल्म 1980 में रिलीज हुई। मंजिल विरिन्या पूक्कल में खलनायक का उनका किरदार खूब सराहा गया। अगले केवल तीन साल में यानी 1983 के भीतर उन्होंने 25 से ज्यादा फिल्मों अभिनय कर डाला। उनकी ख्याति दिनोंदिन बढ़ती रही। नब्बे के दशक के बाद उन्होंने तमाम फिल्मों में काम किया। इस बीच उनकी खास बात रही कि वह और उनके पिता तिलकन ने कई फिल्मों में साथ काम किया। पिता-पुत्र की इस जोड़ी के कमाल से मलयालम फिल्म इंडस्ट्री और इन दोनों ऐक्टरों के फैंस पर काफी प्रभाव पड़ा।


थिएटर में भी जलवा

एक्टर मोहनलाल ने थिएटर में भी जबरदस्त नाम कमाया। ऐसी मान्यता है कि जो एक्टर थिएटर बढ़िया करता है, वो बड़े पर्दे पर निश्चित ही बड़े कारनामे रचता है। उन्होंने पहली बार जो रंगमंच का तड़का दिया, वह था दिल्ली का राष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव। उस महोत्सव में मोहनलाल ने महाभारत के पात्र कर्ण का रोल अदा किया। यह नाटक संस्कृत में था। इसके बाद इनका एक नाटक और है, जिसने उन्हें प्रसिद्धि दिलाई- कधयात्तम। इसमें उन्होंने मलयालम साहित्यों से चुने गए 10 किरदारों का अभिनय किया। बता दें कि नाटक का निर्माण मलयालम के ऐक्टर मुकेश के प्रोडक्शन हाउस कालिदास विजुअल मैजिक के बैनर तले हुआ था।

बड़े बिजनेसमैन भी हैं मोहनलाल

साउथ में सबसे सफल ब्रांड अंबेसडर के रूप में भी मोहनलाल को जाना जाता है। इसके अलावा उनकी कई कंपनियां चलती हैं। कोई समुद्री आयात-निर्यात का काम करती है तो कोई अचार और मसालों का उत्पादन करती है। इसके अलावा इनके दुबई और भारत में कई रेस्त्रां चलते हैं। साथ ही मोहनलाल जोस थॉमस परफॉर्मिंग आर्ट सेंटर के अध्यक्ष भी हैं।

Ashiki

Ashiki

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