'कमर और कद' खोलेगा आपके दिल का राज! नए शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Heart Disease Risk: बीएमआई कम होने पर भी दिल की बीमारी का खतरा हो सकता है। कमर और ऊंचाई का अनुपात इस खतरे को सही तरीके से बताता है।

Akriti Pandey
Published on: 5 Nov 2025 7:00 AM IST
Heart Disease Risk
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Heart Disease Risk

Heart Disease Risk: आज दिल की बीमारी दुनिया भर में सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुकी है। अक्सर लोग इसे केवल मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल या हाई ब्लड प्रेशर से जोड़ते हैं। लेकिन एक नई रिसर्च में सामने आया है कि ये पारंपरिक तरीके हमेशा सही नहीं होते। कई लोग जिनका वजन सामान्य होता है या सिर्फ थोड़ा ज्यादा होता है, उन्हें यह खतरा नजर नहीं आता, जबकि उनका शरीर अंदर ही अंदर खतरे का संकेत दे रहा होता है।

बीएमआई नहीं, अब कमर और ऊंचाई का अनुपात है असली मापदंड

‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ-अमेरिकाज’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन के मुताबिक, कमर और ऊंचाई का अनुपात (Waist-to-Height Ratio) दिल की बीमारी का खतरा पहचानने का सबसे भरोसेमंद तरीका साबित हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज डॉक्टरों और आम लोगों दोनों के लिए एक नया रास्ता खोलती है, जिससे वे बिना जटिल जांचों के दिल की बीमारी का खतरा समझ सकते हैं। यह तरीका खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिनका बीएमआई (Body Mass Index) सामान्य सीमा में होता है, लेकिन वे फिर भी हृदय रोग के खतरे में रहते हैं।

शोध में क्या पाया गया?

अमेरिका के पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के प्रमुख शोधकर्ता थियागो बोस्को मेंडेस के अनुसार, शुरुआती विश्लेषण में बीएमआई, कमर का नाप और कमर-ऊंचाई अनुपात तीनों ही दिल की बीमारी से जुड़े दिखे। लेकिन जब उम्र, लिंग, धूम्रपान, व्यायाम, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसे अन्य कारकों को शामिल किया गया, तो केवल कमर-ऊंचाई अनुपात ही सटीक भविष्यवाणी करने वाला मापदंड साबित हुआ। शोध में 2,721 वयस्कों का डाटा शामिल किया गया, जिन्हें पहले से कोई हृदय रोग नहीं था। इन लोगों को पांच साल से ज्यादा समय तक ट्रैक किया गया ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन-सी माप दिल की बीमारी के खतरे को सही ढंग से दर्शाती है।

बीएमआई की सीमाएं और वेस्ट-टू-हाइट का महत्व

बीएमआई केवल वजन और ऊंचाई पर आधारित होता है, लेकिन यह यह नहीं बताता कि शरीर में चर्बी कहां जमा है। पेट के आसपास जमा फैट, जिसे सेंट्रल ओबेसिटी कहा जाता है, सीधे दिल की बीमारियों से जुड़ा होता है। वेस्ट-टू-हाइट अनुपात इस केंद्रीय फैट को दर्शाता है, इसलिए यह दिल की बीमारी का बेहतर संकेतक माना जा सकता है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन लोगों का बीएमआई 30 से कम था, लेकिन उनका कमर-ऊंचाई अनुपात 0.5 से अधिक था, उनमें दिल की धमनियों में कैल्शियम जमा (Coronary Artery Calcification) होने की संभावना अधिक थी — जो कि हृदय रोग का एक प्रमुख संकेत है।

समय पर पहचान से बचाया जा सकता है खतरा

पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर मार्सियो बिट्टनकोर्ट का कहना है कि कमर-ऊंचाई अनुपात को एक सरल और प्रभावशाली स्क्रीनिंग टूल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे उन मरीजों में भी खतरे की पहचान हो सकती है जिनका वजन, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल सामान्य लगता है। इस तरीके से दिल की बीमारियों का समय रहते पता लगाकर इलाज किया जा सकता है, जिससे गंभीर रोगों और हार्ट अटैक के खतरे को कम किया जा सकता है।

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