6,000 घटनाएं, 9,000 मौते! हवा में उड़ता ‘मौत का सामान, बोइंग पर लगे सबसे खतरनाक आरोप

Boeing whistleblower claims: बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर को कंपनी ने बड़े दावों के साथ लॉन्च किया था। लंबी दूरी, कम ईंधन खर्च और यात्रियों को बेहतर आराम देने वाला विमान… यही इसकी खासियत बताई गई थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बोइंग ड्रीमलाइनर का रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी कहता है।

Harsh Srivastava
Published on: 12 Jun 2025 7:21 PM IST (Updated on: 12 Jun 2025 7:48 PM IST)
6,000 घटनाएं, 9,000 मौते! हवा में उड़ता ‘मौत का सामान, बोइंग पर लगे सबसे खतरनाक आरोप
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Boeing whistleblower claims: अहमदाबाद में गुरुवार सुबह का वो मंजर किसी डरावने सपने जैसा था। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 जैसे ही लंदन की ओर टेकऑफ कर रही थी, वैसे ही जोरदार धमाके के साथ हादसे का शिकार हो गई। आंखों के सामने एक जलता हुआ विमान, चीख-पुकार, और आग की लपटों में घिरा इलाका… अहमदाबाद का मेघाणी नगर इलाका कुछ देर के लिए कब्रगाह बन गया। सबसे चौंकाने वाली बात ये कि इस विमान में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी समेत कुल 242 लोग सवार थे। हादसे के बाद पूरे देश में अफरा-तफरी मच गई। इस विमान हादसे ने सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में हवाई सुरक्षा को लेकर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर तब, जब यह विमान दुनिया की सबसे बड़ी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग का ‘ड्रीमलाइनर’ था। सवाल सिर्फ एक—आखिर कब तक बोइंग अपनी तकनीकी खामियों की कीमत यात्रियों की जान से चुकवाता रहेगा?

ड्रीमलाइनर का सपना या मौत की उड़ान?

बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर को कंपनी ने बड़े दावों के साथ लॉन्च किया था। लंबी दूरी, कम ईंधन खर्च और यात्रियों को बेहतर आराम देने वाला विमान… यही इसकी खासियत बताई गई थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बोइंग ड्रीमलाइनर का रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी कहता है। सिर्फ इस साल की शुरुआत में ही “N819AN” रजिस्ट्रेशन नंबर वाले ड्रीमलाइनर में लगातार तकनीकी खामियां देखने को मिलीं। महज एक महीने में उसमें हाइड्रोलिक लीकेज, फ्लैप फेलियर जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं, जिसकी वजह से दर्जनों उड़ानें कैंसिल करनी पड़ीं। अहमदाबाद हादसा उसी डर की ताजा पुष्टि बन गया है।

बोइंग—हादसों का पर्याय बनती टेक्नोलॉजी?

अगर बोइंग के इतिहास पर नजर डालें, तो यह अकेला हादसा नहीं है। 2018 और 2019 में हुए दो भयानक हादसे, लायन एयर और इथियोपियन एयरलाइंस के साथ, पूरी दुनिया में तहलका मचा चुके हैं। दोनों हादसों में कुल 346 लोगों की जान चली गई थी। नतीजा ये हुआ कि Boeing 737 Max को पूरी दुनिया में ग्राउंड कर दिया गया और कंपनी को 30 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन लगता है बोइंग ने इन हादसों से कोई सबक नहीं लिया। 2023 में फिर से 737 Max का दरवाजा हवा में उड़ गया। इसके बाद अमेरिकी संसद में सुनवाई हुई, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात।

6,000 हादसे, 9,000 से ज्यादा मौतें… फिर भी उड़ रहे हैं बोइंग के विमान

सरकारी आंकड़ों की मानें तो अब तक बोइंग के विमानों से जुड़े करीब 6,000 हादसे हो चुके हैं। इनमें से 415 हादसे तो सीधे तौर पर घातक थे, जिनमें 9,000 से ज्यादा लोगों की जान गई है। ये आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में बोइंग विमान उड़ तो रहे हैं, लेकिन हर उड़ान मौत का न्योता भी बन सकती है। आज भी दुनियाभर में 4,000 से ज्यादा Boeing 737-800 मॉडल उड़ रहे हैं। एशिया से लेकर यूरोप और अमेरिका तक हर एयरलाइन इन्हीं विमानों पर निर्भर है। ऐसे में सवाल उठता है क्या सुरक्षा से ज्यादा मुनाफा जरूरी है?

व्हिसलब्लोअर का डरावना सच—‘हादसा तो होना ही था’

बोइंग के ही एक पूर्व इंजीनियर और व्हिसलब्लोअर सैम सालेहपौर ने तो पहले ही दुनिया को चेता दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि बोइंग ने अपने 777 और 787 मॉडल के निर्माण में सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं। उनका दावा था कि कंपनी ने शॉर्टकट अपनाए, सुरक्षा टेस्ट्स को नजरअंदाज किया और मुनाफे के लिए यात्रियों की जान दांव पर लगाई। सैम सालेहपौर ने तो ये तक कह दिया था कि “ये हादसे बस वक्त की बात हैं।” और आज, अहमदाबाद हादसा उनके दावों की खौफनाक सच्चाई बनकर सामने आ गया है। अब सवाल ये है कि इस हादसे के बाद एयर इंडिया और बोइंग passengers को कितना मुआवजा देंगे, क्या जिम्मेदारियां तय होंगी और क्या बोइंग फिर भी दुनिया को ‘सपनों की उड़ान’ बेचता रहेगा… या फिर ये ‘मौत की उड़ान’ बन चुका है?

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Hi! I am Harsh Srivastava, currently working as a Content Writer and News Coordinator at Newstrack. I oversee content planning, coordination, and contribute with in-depth articles and news features, especially focusing on politics and crime. I started my journey in journalism in 2023 and have worked with leading publications such as Hindustan, Times of India, and India News, gaining experience across cities including Varanasi, Delhi and Lucknow. My work revolves around curating timely news, in- depth research, and delivering engaging content to keep readers informed and connected.

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