भाद्रपद की चतुर्दशी है बहुत खास, करें इन नियमों का शास्त्रानुसार पालन, होगा चमत्कार

भगवान शिव निराकार, निर्विकार ब्रह्म  है वो अमंगल को भी मंगल करते हैं। उनकी शरण में जाने से सारे पाप नष्ट हो जाते है । हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह का प्रदोष , त्रयोदशी व चतुर्दशी तिथि भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन उनकी पूजा करने से सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं। इस दिन शिव की पूजा सपरिवार करते है।

Published by suman Published: August 28, 2019 | 9:56 am
Modified: August 28, 2019 | 10:01 am

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भगवान शिव निराकार, निर्विकार ब्रह्म  है वो अमंगल को भी मंगल करते हैं। उनकी शरण में जाने से सारे पाप नष्ट हो जाते है । हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह का प्रदोष , त्रयोदशी व चतुर्दशी तिथि भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन उनकी पूजा करने से सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं। इस दिन शिव की पूजा सपरिवार करते है।
भाद्रपद की  चतुर्दशी को अघोर चतुर्दशी कहते हैं। जो भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष है। इसके बाद पड़ने वाली अमावस्या को कुशाग्रहणी अमावस्या कहते हैं। अघोर चतुर्दशी भगवान शिव के भक्तों के लिए बहुत खास है। इस दिन तर्पण, दान-पुण्य का महत्व है।

शास्त्रों में शिव चतुर्दशी का अपना माहत्मय है। इस दिन जो भी व्यक्ति सच्चे मन से मां पार्वती, गणेश व  कार्तिकेय के साथ शिव की पूजा करते हैं। उनके सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं। इस दिन बेलपत्र, समीपत्र, कुशा, दूब भांग, धतूरा व नारियल भगवान को चढ़ाते हैं। और व्रत  रखते हैं। इस दिन गणेश मंत्र, कार्तिकेय मंत्र व वो शिव मंत्र से शिव की पूजा का विधान है।

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मान्यता के अनुसार, 14 सौ करोड़ वर्ष पहले जब काशी का जन्म हुआ था। उसी दिन से अघोर चतुर्दशी के दिन पितरों के लिए किए जाने वाले कार्य किए जाते हैं। इस दिन पितरों के लिए व्रत करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। इस दिन भगवान शिव के गण, भूत-प्रेत  को आजादी मिलती है। इस चतुर्दशी के अगले दिन कुशाग्रहणी अमावस्या पर सालभर के धार्मिक कार्यों के लिए कुश एकत्र की जाती है। प्रत्येक धार्मिक कार्य के लिए इस कुश का इस्तेमाल किया जाता है। इस दिन भगवान शिव का ध्यान करें। यह दिन संयम, साधना और तप के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

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इस दिन शिव के इन मंत्रों का जाप करने सो सारे पाप, बीमारियां व कष्ट दूर होते हैं।

एकाक्षरी महामृत्युंजय मंत्र- ‘हौं’.

मृत संजीवनी महामंत्युंजय मंत्र-

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः

ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

उर्वारुकमिव बन्‍धनान्

मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्

ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!

दशाक्षरी महामृत्युंजय महामंत्र- ‘ऊं जूं स: माम पालय पालय’
 त्रयक्षरी महामृत्युंजय मंत्र- ‘ऊं जूं स:’

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