बिहार की मौत की मंडी! मोकामा का 'भूमिहार गढ़, जहाँ राजनीति नहीं, सिर्फ अपराध और AK-47 बोलती है! जानिए खूनी इतिहास

Mokama Crime History: मोकामा की राजनीति में बाहुबलियों और अपराधियों का गहरा असर है। हाल ही में चुनावी हिंसा में 75 वर्षीय दुलारचंद यादव की मौत ने मोकामा के खूनी इतिहास को फिर से उजागर किया। जानिए मोकामा की राजनीति, बाहुबलियों और अपराधियों के बीच का कनेक्शन और अनंत सिंह, सूरजभान सिंह जैसे नेताओं का इतिहास।

Harsh Sharma
Published on: 1 Nov 2025 11:03 AM IST (Updated on: 1 Nov 2025 11:03 AM IST)
बिहार की मौत की मंडी!  मोकामा का भूमिहार गढ़, जहाँ राजनीति नहीं, सिर्फ अपराध और AK-47 बोलती है! जानिए खूनी इतिहास
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Mokama Crime History: बिहार में चुनावी बयार ने एक बार फिर से मोकामा की राजनीति को गर्मा दिया है। मोकामा, जो हमेशा बाहुबलियों, अपराध और राजनीति के मेलजोल के लिए प्रसिद्ध रहा है, इस बार एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में, मोकामा में चुनावी प्रचार के दौरान हिंसा की एक बड़ी घटना सामने आई, जिसमें 75 वर्षीय दुलारचंद यादव की मौत हो गई। यह घटना मोकामा के लिए कोई नई बात नहीं है, क्योंकि यहां चुनावी हिंसा और बाहुबली राजनीति का लंबा इतिहास रहा है।

हिंसा की घटना और मारे गए दुलारचंद यादव

मोकामा में गुरुवार को जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के काफिले का सामना अनंत सिंह के काफिले से हुआ। दोनों काफिलों के बीच टक्कर हुई, और इसके बाद पत्थरबाजी और गोलियां चलने लगीं। इस दौरान दुलारचंद यादव को गोली मारी गई और बाद में एक वाहन ने उन्हें कुचल दिया। इस घटना में एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए। बिहार पुलिस ने इस मामले में चार एफआईआर दर्ज की हैं। एक एफआईआर दुलारचंद के परिवार द्वारा अनंत सिंह के खिलाफ और दूसरी अनंत सिंह के समर्थकों द्वारा जन सुराज कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज की गई है।

मोकामा की राजनीति और बाहुबली

मोकामा, जो भूमिहारों के प्रभुत्व वाला इलाका माना जाता है, में हमेशा से अपराध और राजनीति का गहरा संबंध रहा है। इस इलाके के लोगों के लिए चुनावी हिंसा और बाहुबलियों के बीच संघर्ष नई बात नहीं है। मोकामा के अपराधी राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। दुलारचंद यादव का नाम भी इससे जुड़ा हुआ था। उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले थे और वे अनंत सिंह के करीबी थे। हालांकि, इस बार दुलारचंद ने जन सुराज पार्टी का समर्थन किया था, जिससे उनके और अनंत सिंह के बीच तनाव बढ़ गया।

अनंत सिंह का आपराधिक इतिहास

अनंत सिंह, जो इस बार मोकामा से जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, का आपराधिक इतिहास भी काफी कुख्यात है। 2015 में उन्हें अपहरण और हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, और उनके पास से हथियार और बुलेटप्रूफ जैकेट बरामद किए गए थे। इसके अलावा 2019 में उनके खिलाफ फिर से पुलिस छापेमारी हुई थी, जिसमें एके-47 राइफल और ग्रेनेड बरामद किए गए थे। इसके बावजूद, वे 2020 में मोकामा से चुनाव जीतने में सफल रहे। उनके खिलाफ 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

सूरजभान सिंह की एंट्री

मोकामा में राजनीति का एक और बड़ा मोड़ तब आया जब बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी ने मोकामा में चुनावी जंग में कदम रखा। वीणा देवी राजद के टिकट पर अनंत सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। सूरजभान सिंह का भी आपराधिक रिकॉर्ड है और उनके खिलाफ 26 आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि, सूरजभान खुद चुनाव नहीं लड़ सकते थे, इसलिए उन्होंने अपनी पत्नी वीणा देवी को मैदान में उतारा।

मोकामा की राजनीति में बाहुबलियों का प्रभाव

मोकामा में राजनीति हमेशा बाहुबलियों और अपराधियों के प्रभाव में रही है। यहां की राजनीति में जाति, अपराध और बाहुबली शक्ति का मिश्रण देखा गया है। बाहुबलियों के आपराधिक रिकॉर्ड के बावजूद, उनके समर्थन से वे चुनावी मैदान में बने रहते हैं। मोकामा की राजनीति का यह एक कड़वा सच है, जो शायद ही कभी बदलेगा।

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Harsh Sharma is a Content Writer at Newstrack.com.

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