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SC on Freebies: चुनाव में मुफ्त योजनाओं पर SC में सुनवाई, EC से कोर्ट नाराज, पूछा- 'क्या हम अखबार में हलफनामा पढ़ें'

SC on Freebies: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी. रमना ने चुनाव आयोग का हलफनामा मीडिया में प्रकाशित होने पर नाराजगी जाहिर की है। चीफ जस्टिस ने कहा, कि 'क्या हम अखबार में हलफनामा पढ़ें।

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Newstrack aman
Updated on: 2022-08-11T13:18:33+05:30
Supreme Court
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सुप्रीम कोर्ट। (photo: social media )

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Supreme Court on Freebies: देश में चुनावों के दौरान मुफ्त योजनाओं और 'रेवड़ियों' पर गुरुवार (11 अगस्त 2022) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अहम सुनवाई जारी है। इस अहम मसले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी. रमना (Chief Justice of India NV. Ramna) ने चुनाव आयोग (Election Commission Affidavit) का हलफनामा मीडिया में प्रकाशित होने पर नाराजगी जाहिर की है। चीफ जस्टिस ने कहा, कि 'क्या हम अखबार में हलफनामा पढ़ें।

वहीं, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह (Petitioner's lawyer Vikas Singh) ने एक पुराने फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा, कि 'मुफ्त की योजनाओं की घोषणा रोकना चुनाव आयोग का कर्तव्य है।' मामले की अगली सुनवाई अब 17 अगस्त को होगी।

'हम कानून नहीं बना सकते'

वहीं, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह (Petitioner's lawyer Vikas Singh) ने एक पुराने फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा, कि 'मुफ्त की योजनाओं की घोषणा रोकना चुनाव आयोग का कर्तव्य है।' याचिकाकर्ता के वकील ने जब ये कहा कि 'राजनीतिक दलों की मान्यता (Recognition of Political Parties) रद्द करने की व्यवस्था बनानी चाहिए।इस पर चीफ जस्टिस रमना (CJI) ने कहा, कि 'हम कानून नहीं बना सकते'। जिसके बाद फिर याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने दलील देते हुए कहा, 'यहां सरकार भी है। वो कानून बना सकती है।'

CJI ने पूछा- क्या पार्टियां EC को घोषणा पत्र सौंपती हैं?

सुनवाई के दौरान एक मौके पर चीफ जस्टिस रमना ने पूछा, कि 'क्या राजनीतिक पार्टियां चुनाव आयोग को अपना घोषणा पत्र (Manifesto) सौंपती हैं? जिस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, 'जी नहीं, ऐसी कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।' तब सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) बोले, कि 'असल में अधिकतर मुफ्त की योजनाओं का वादा घोषणा पत्र में नहीं किया जाता है। ये भाषणों में होता है। जिस पर चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा, कि इससे कोई मना नहीं कर सकता है कि ये गंभीर मुद्दा नहीं है।'

टैक्स पेयर चिंतित हैं

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रमना ने आगे कहा, 'जिन्हें फायदा चाहिए, वो कहेंगे कि कल्याणकारी सरकार (welfare government) की अवधारणा है। हमें लाभ मिले। इसी तरह, जो इसका विरोध कर रहे हैं, वो कहते हैं कि पैसा विकास के काम में लगना चाहिए।' इस पर याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने दलील दी कि, '15 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज है। टैक्स भरने वाले चिंतित हैं कि ये पैसे कहां से आएंगे।'

'मुफ्त में चीज़ें देना कल्याण का इकलौता तरीका नहीं'

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील अरविंद दातार (Senior Advocate Arvind Datar) ने कहा, कि 'तमिलनाडु की एक पार्टी डीएमके (DMK) ने चुनाव बाद कलर टीवी देने का वादा किया, फिर AIADMK ने कुछ और किया। यह लगातार चलता रहा। इस पर, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) ने कहा, कि 'लोगों को मुफ्त में चीज़ें देना कल्याण का इकलौता तरीका नहीं है।' फिर वरिष्ठ वकील दातार ने कहा, कि 'उम्मीदवारों को अपनी संपत्ति की घोषणा करने को कहा गया है। वैसा ही कुछ इस मामले में हो। जिस पर चीफ जस्टिस (CJI) ने कहा, 'वह अलग मामला था।'

चुनाव आयोग के वकील ने ये कहा

याचिकाकर्ता की तरफ से वकील विजय हंसारिया (Senior Advocate Vijay Hansaria) ने एक्सपर्ट कमिटी का सुझाव दिया। वो बोले, कि देश के वित्तीय ढांचे (financial structure) का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India), वित्त आयोग (Finance Commission) के लोग कमेटी में हों। जिस पर CJI ने कहा, कि 'हम ये नहीं कह सकते कि मुफ्त की घोषणाएं बंद कर दो। हंसारिया ने आगे कहा, इस पर वित्त विशेषज्ञों (Finance Experts) को विचार करने दीजिए, उसके बाद ही फैसला हो। तब चुनाव आयोग के वकील मनिंदर सिंह (EC Lawyer Maninder Singh) ने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय ने एक फैसले में ऐसी योजनाओं को संविधान के नीति निदेशक तत्वों के मुताबिक बताया था। जिस वजह से आयोग के हाथ बंधे हैं।

AAP की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ये बोले

कोर्ट में आम आदमी पार्टी (AAP) की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhvi) ने अपनी दलील दी। सिंघवी ने कहा, कि 'टीवी बांटना फ्री की घोषणा है। मगर, लोगों के भले के लिए कुछ घोषणा करना अलग बात है। हम दोनों को एक ही जैसा नहीं कह सकते। सिंघवी ने आगे कहा, 'बिना इनमें अंतर किए कमिटी बनाने से कोई फायदा नहीं मिलेगा। क्योंकि, नेता सोच-विचार कर घोषणा करते हैं।' अभिषेक सिंघवी ने कहा, भाषण देना राजनेताओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी हिस्सा है। बेहतर हो कि कमिटी न बने। वहीं, कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने कहा, कि 'बिना आंकड़ों के आगे नहीं बढ़ा जा सकता।'

मुफ्त की योजना पर बोले सॉलिसिटर जनरल

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) ने आगे कहा, कि 'जब हम सड़क पर चलते हैं तभी पता चलता है सरकार क्या कर रही है। उन्होंने कहा, कुछ लोगों के लिए अलग से योजना बनाना भी सही है। मगर, अब यह सर्वव्यापी होता जा रहा। मैंने भी कमिटी के गठन का सुझाव दिया है। कमिटी में अर्थव्यवस्था के उन क्षेत्रों के प्रतिनिधि भी रखे जाएं, जो संकट में हैं। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, कि 'हम आज सिर्फ बात कर रहे हैं। कोई आदेश नहीं दे सकते। क्योंकि, कोर्ट के बेंच की सदस्य जस्टिस हिमा कोहली आज मौजूद नहीं हैं।

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