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X पर भिड़े रिजिजू और ओवैसी, अल्पसंख्यक स्कॉलरशिप पर जोरदार बहस, सियासी गलियारों में मचा घमासान
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के बीच 'X' पर प्री-मैट्रिक और मौलाना आज़ाद नेशनल फैलोशिप स्कीम को लेकर तीखी बहस, अल्पसंख्यक छात्र कल्याण और उच्च शिक्षा योजनाओं पर सियासी विवाद।
Kiren Rijiju-Asaduddin Owaisi X debate: केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अल्पसंख्यक छात्र कल्याण योजनाओं को लेकर आमने-सामने आ गए। विवाद का केंद्र प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप और मौलाना आज़ाद नेशनल फैलोशिप योजना रही, जिनकी सीमाओं और बंद होने को लेकर दोनों नेताओं ने तीखी आलोचना और जवाबी बयान जारी किए। यह जुबानी जंग केंद्र सरकार की अल्पसंख्यक नीतियों पर नई राजनीतिक बहस छेड़ गई है।
कक्षा 5 से ही ड्रॉपआउट की समस्या: ओवैसी
असदुद्दीन ओवैसी ने NDA सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप को केवल कक्षा 9 और 10 तक सीमित कर दिया है, जबकि मुस्लिम छात्रों के बीच ड्रॉपआउट की समस्या कक्षा 5 से ही शुरू हो जाती है।
वित्तीय बोझ: ओवैसी का आरोप है कि प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप का उद्देश्य ड्रॉपआउट दर को कम करना और अल्पसंख्यक परिवारों पर वित्तीय बोझ को कम करना था, जो कक्षा IX-X से कहीं पहले शुरू हो जाता है।
'फिग लीफ' का आरोप: उन्होंने कहा कि राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट को प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप को सीमित करने के लिए केवल 'फिग लीफ' (बहाने) के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
रिजिजू का जवाब: RTE और ओवरलैप का तर्क
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने ओवैसी के आरोपों का जोरदार खंडन किया। उन्होंने कहा कि प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप को केवल कक्षा IX और X तक ही सीमित रखा गया है, क्योंकि:
RTE अनिवार्य शिक्षा: राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट के तहत कक्षा I से VIII तक के छात्रों को मुफ्त और अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा देना पहले से ही अनिवार्य है। इसलिए इस चरण में स्कॉलरशिप की ज़रूरत नहीं है।
समान योजनाओं से ओवरलैप: रिजिजू ने यह भी स्पष्ट किया कि मौलाना आजाद नेशनल फैलोशिप योजना को इसलिए बंद कर दिया गया है क्योंकि यह अन्य मंत्रालयों और विभागों की समान योजनाओं से ओवरलैप (दोहराव) करती थी।
रिजिजू ने दावा किया कि UGC और CSIR फैलोशिप स्कीम सभी सामाजिक वर्गों और समुदायों के उम्मीदवारों के लिए खुली हैं, जिसमें अल्पसंख्यक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतम समावेशन के लिए PMJVK और PM VIKAS जैसी योजनाएं लागू की जा रही हैं।
उच्च शिक्षा और बजट पर भी घमासान
ओवैसी ने मौलाना आजाद नेशनल फैलोशिप योजना के बंद होने पर कहा कि यह योजना उच्च शिक्षा में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए बनाई गई थी, क्योंकि अल्पसंख्यक कम प्रतिनिधित्व वाले समूह हैं। उन्होंने कहा कि ओपन कैटेगरी में अन्य योजनाएं होने से इसकी आवश्यकता कम नहीं हो जाती। इसके अलावा, ओवैसी ने यह भी दावा किया कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का बजट 2023-24 में भारी घटा और तब से महंगाई के बावजूद लगभग समान ही बना हुआ है। 'X' पर चल रही यह बहस इस बात को दर्शाती है कि आगामी चुनावों से पहले अल्पसंख्यक कल्याण की योजनाएँ राजनीतिक केंद्र में रहने वाली हैं।


