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झारखंड: ज़मीनी विवाद में जलाया जिंदा, ज़िंदगी और मौत से जूझ रहा पीड़ित

रामगढ़ में ज़मीन का विवाद खूनी खेल में बदल गया। कथित तौर पर पीड़ित पक्ष के एक व्यक्ति पर कैराॅसिन तेल डालकर ज़िंदा जला दिया गया।

Shivani

ShivaniBy Shivani

Published on 3 April 2021 7:24 AM GMT

झारखंड: ज़मीनी विवाद में जलाया जिंदा, ज़िंदगी और मौत से जूझ रहा पीड़ित
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रांचीः झारखंड में अपराध की ज्यादातर वारदात ज़मीन से जुड़ी हुई पाई जाती हैं। राज्य में भूमि की प्रकृति को लेकर बड़ा विवाद रहा है। मसलन आदिवासी और ग़ैर आदिवासी की ज़मीन को लेकर समस्या रही है। सीएनटी और एसपीटी एक्ट की वजह से आदिवासी की ज़मीन ग़ैर आदिवासी नहीं खरीद सकते हैं। ख़रीब-बिक्री भी उसी थाना क्षेत्र के अंदर हो सकती है। रघुवर दास की सरकार ने इन दोनों कानूनों में लचीलापन लाने की कोशिश की लेकिन प्रैक्टिकल में आज भी पुराना नियम ही चलता है। यही वजह है कि ज़मीन की बेहद कम मात्रा ख़रीद-बिक्री के लायक रह जाती है जिससे विवाद का जन्म होता है। ताज़ा मामला रामगढ़ ज़िला से ताल्लुक रखता है।

क्या है पूरा मामला.

रामगढ़ ज़िला के नईसराय क्षेत्र में ज़मीन का सालों पुराना विवाद खूनी खेल में बदल गया। विवाद यहां तक पहुंच गया कि, कथित तौर पर पीड़ित पक्ष के एक व्यक्ति पर किरासन तेल डालकर ज़िंदा जलाने की कोशिश की गई। आनन-फानन में उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां वो ज़िंदगी और मौत से जूझ रहा है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि, पुलिस की मीलिभगत से ज़मीन पर कब्जा ज़माने की कोशिश हो रही है। दरअसल, टाइटल शूट को लेकर पिछले 15 से 20 वर्षों से ज़मीन का विवाद चल रहा है। फिलहाल, मामला कोर्ट की दहलीज़ में है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि, विवादित ज़मीन पर आरोपी पक्ष दीवार खड़ी करना चाहता है। रोकने पर उन लोगों ने हमला कर दिया।

खबर के दो पहलू.

रामगढ़ के एसडीपीओ किशोर रजक की मानें तो पूरे मामले की तहक़ीक़ात जारी है। इस बात का पता लगाया जा रहा है कि, आरोपी पक्ष ने पीड़ित को ज़िंदा जलाने की कोशिश की है या फिर खुद पीड़ित ने अपने ऊपर आग लगा ली है। फिलहाल, पुलिस इसी एंगल में जांच कर रही है। जहां तक ज़मीन विवाद का सवाल है तो ये मामला कोर्ट में है। बिना प्रशासन की अनुमति के विवादित ज़मीन पर कोई निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
शाहनवाज़ की रिपोर्ट।


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