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आरूषि-हेमराज मर्डर केस : HC का बड़ा फैसला, तलवार दंपति बरी

नोएडा के चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड मामले में इलाहबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार (12 अक्टूबर) को अपना फैसला सुनाया।

Gagan D Mishra

Gagan D MishraBy Gagan D Mishra

Published on 12 Oct 2017 9:33 AM GMT

आरूषि-हेमराज मर्डर केस : HC का बड़ा फैसला, तलवार दंपति बरी
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आरुषि-हेमराज मर्डर केस : इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला, तलवार दंपति बरी
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इलाहाबाद: नोएडा के चर्चित आरूषि-हेमराज मर्डर केस में इलाहबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार (12 अक्टूबर) को बड़ा फैसला सुनाया। इस मर्डर केस में तलवार दंपति (राजेश तलवार और नूपुर तलवार) को बरी कर दिया गया है।

इससे पहले 25 नवंबर 2013 को गाजियाबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट ने हालात से जुड़े सबूतों के आधार पर दोनों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी, जिसके खिलाफ जनवरी 2014 में दोनों ने इलाहाबाद हाइकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का कहना है कि सबूत और परिस्थितियों को देखते हुए तलवार दंपती को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस अरविंद कुमार मिश्र की खंडपीठ ने इस केस में फैसला सुनाया है। जेल में बंद तलवार दंपति हाईकोर्ट का फैसला सुनते ही भावुक हो गए। इससे पहले वह काफी तनाव में थे।

कोर्ट ने क्या कहा ?

-कोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से आरोप साबित नहीं होता है।

-घटनाक्रम का तारतम्य इतना पुख्ता नहीं है कि तलवार दंपति को हत्या का दोषी ठहराया जा सके।

-तलवार दंपति को संदेह का लाभ पाने का हकदार पाते हुए कोर्ट ने उनकी रिहाई का आदेश दिया।

-कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीआई ने अपनी जांच में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए।

-जिस फ्लैट में हत्या हुई उसमें किसी तीसरे व्यक्ति की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

-हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट कि इस थ्योरी को नहीं माना कि चूंकि फ्लैट में किसी तीसरे व्यक्ति के आने की संभावना नहीं है, इसलिए हत्या तलवार दंपति द्वारा की गई।

-कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिपादित विधि सिद्धान्तो के मुताबिक, तलवार दंपति का केस संदेह का लाभ देने के लिहाज से सही केस है।

-कोर्ट ने उनकी तत्काल रिहाई का आदेश भी दिया है।

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जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस अरविंद कुमार मिश्र की डिवीजन बेंच ने तलवार दंपति की अपील पर 07 सितंबर 2017 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और फैसला सुनाने की तारीख 12 अक्टूबर को तय की थी।

तलवार दंपति के वकील तनवीर अहमद ने क्या कहा ?

-चार महीने की लंबी बहस के बाद कोर्ट ने मेरे दोनों मुवक्किल को मामले से बरी कर दिया है।

-उम्मीद है कि वह शुक्रवार दोपहर तक जेल से रिहा हो जाएंगे।

-चार महीने के दौरान दोनों पक्षों के बीच इस मामले को लेकर काफी सकारात्मक माहौल के बीच बहस हुई थी।

क्या कहा सीबीआई के वकील ने ?

-सीबीआई के वकील कहा कि कोर्ट का फैसला पूरी तरह से पढ़ने के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा।

-फिलहाल हमें फैसले की कॉपी का इंतजार है।

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क्या कहना है डासना जेल के अधिकारियों का ?

-डासना जेल के अधिकारियों ने कहा कि हमें मालूम चला है कि तलवार दंपति को बरी कर दिया गया है।

-फैसले के दिन सुबह वह थोड़ा तनाव में दिख रहे थे, लेकिन फैसला आने के बाद वे काफी खुश हैं।

-जेलर से यह पूछे जाने पर कि दोनों को कब तक रिहा किया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि जैसे ही कोर्ट के फैसले की कॉपी उन्हें मिल जाएगी उन्हें कानूनी प्रक्रिया पूरी कर छोड़ दिया जाएगा।

रिहा होने में लग सकता है कुछ वक्त

जेल में बंद तलवार दंपति की रिहाई में अभी कुछ दिन का वक्त लग सकता है। यद्यपि हाईकोर्ट ने आदेश में तत्काल रिहाई का आदेश है। लेकिन, रिहाई प्रक्रिया से गुजरते हुए कुछ दिन का वक्त लग सकता है। प्रक्रिया के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश की प्रमाणिक प्रति जब उपलब्ध होगी तभी वह मुहर लगकर निचली अदालत में जाएगी जहां पर प्रक्रियाओं का पालन करते हुए रिहाई का आदेश डासना जेल के लिए जारी होगा। जेल अथाॅरिटी भी अपनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही तलवार दंपति को जेल से रिहा करेगी।

फैसले को लेकर वकीलों का क्या है कहना ?

आरूषि-हेमराज मर्डर केस को लेकर न केवल आम जन मानस में उत्सुकता थी। बल्कि, वकालत के पेशे से जुड़े विधि के जानकारों में भी इस निर्णय को लेकर आतुरता दिखी। क्रिमिनल साइट में वकालत कर रहे वकीलों का कहना है कि मकान के अंदर आरूषि हेमराज की हत्या होती है और अंदर से गेट बंद है तो अवश्य ही हत्या करने वाले हत्या के समय अंदर ही मौजूद रहे होंगे। ऐसे में विधि के जानकारों का कहना है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में जाना चाहिए और इसके खिलाफ सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट में अपील करना चाहिए।

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जांच टीम

इस मामले की जांच सबसे पहले यूपी पुलिस ने शुरू की थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने तलवार दंपती को शक के घेरे में लिया था। बाद में यह जांच सीबीआई को सौंपी गई। 31 मई 2008 को इस केस की जांच उस वक्त के सीबीआई ज्वाइंट डायरेक्टर अरुण कुमार के हाथ में आई। उन्होंने तलवार दंपती को क्लीन चिट दी और तीन नौकरों को सस्पेक्ट माना।

नोएडा पुलिस दावा किया था कि आरुषि-हेमराज का कातिल कोई और नहीं बल्कि उसके पिता डॉक्टर राजेश तलवार हैं। इस थ्योरी के पीछे पुलिस ने ऑनर किलिंग की दलील रखी। 23 मई, 2008 को पुलिस ने बेटी की हत्या के आरोप में राजेश तलवार को अरेस्ट कर लिया था।

इसके बाद, सितंबर 2009 में फिर से सीबीआई की दूसरी टीम ने जांच शुरू की। इस बार सीबीआई के अफसर एजीएल कौर ने जांच शुरू की। उन्होंने तलवार दंपती को प्राइम सस्पेक्ट माना।

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फैसले के समय कोर्ट में रहे तलवार दंपति के रिश्तेदार

सुबह से ही आरोपी तलवार दंपति के रिश्तेदार और नजदीकी सगे संबंधी सिविल ड्रेस में कोर्ट के अंदर वादकारियों के लिए बनी बेंच पर बैठे रहे। उन्हें उम्मीद थी कि फैसला दो बजे सुनाया जाएगा। इस नाते वे लंच के पहले ही आकर बेंच पर बैठ गए और फैसले का इंतजार कर रहे थे।

कुछ समय के लिए उन्हें झटका लगा जब दो बजे जज के पेशकार ने घोषणा की कि फैसला दो बजे नहीं अब फैसला 2:45 बजे सुनाया जाएगा। यह सुनकर कोर्ट में खड़ी वकीलों की भीड़ को कुछ समय के लिए मायूसी आई।

कुछ वकीलों का कहना था कि लगता है कि अभी जज इसमें और विलंब करेंगे और फैसला चार बजे आएगा। लेकिन, जज ठीक 2:35 बजे कोर्ट में आ गए और उन्होंने 2:45 बजे के निर्धारित समय पर ही फैसले का ऑपरेटिव अंश सुनाया और तलवार दंपति की अपील मंजूर करते हुए उन्हें निर्दोष करार देकर उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया।

अगली स्लाइड में जानिाए क्या था पूरा मामला, कौन हैं तलवार दंपति ?

क्या था मामला ?

16 मई 2008 को यूपी के नोएडा में जलवायु विहार इलाके में 14 साल की आरुषि का शव उसके मकान में बरामद हुआ था। शुरुआत में इस मर्डर के पीछे घर के नौकर हेमराज को माना जा रहा था, लेकिन दो दिन बाद मकान की छत से हेमराज की लाश भी बरामद हुई थी। यूपी की तत्कालीन सीएम मायावती ने इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की सिफारिश की थी। तभी से यह मामला कोर्ट में चल रहा है।

कौन हैं तलवार दंपति ?

-तलवार दंपती दिल्ली-एनसीआर के जाने माने डेंटिस्ट रहे हैं।

-डॉ. राजेश पंजाबी और नूपुर महाराष्ट्रियन परिवार से हैं।

-नुपुर एयरफोर्स के अफसर की बेटी हैं

-डॉ. राजेश के पिता हार्ट स्पेशलिस्ट रहे हैं।

-आरुषि का जन्म 1994 में हुआ था।

आगे की स्लाइड में पढ़ें आरुषि हत्याकांड केस में कब क्या हुआ?

जानिए आरुषि हत्याकांड केस में कब क्या हुआ?

-16 मई 2008- डॉ. राजेश तलवार की 14 साल की बेटी आरुषि और उनके नौकर हेमराज की हत्या।

-18 मई 2008- पड़ोसी की छत से हेमराज का शव बरामद।

-23 मई 2008- आरुषि के पिता राजेश तलवार गिरफ़्तार।

-24 मई 2008- यूपी पुलिस ने राजेश तलवार को मुख्य अभियुक्त माना।

-29 मई 2008- तत्कालीन सीएम मायावती ने सीबीआई जांच की सिफारिश की।

-जून 2008- सीबीआई ने जांच शुरू कर एफ़आईआर दर्ज़ की।

-12 जुलाई 2008- सबूतों के अभाव में राजेश तलवार को रिहा किया गया।

-सितम्बर 2008- सबूतों के अभाव में राजेश तलवार के सहायक और दो नौकरों को भी रिहा कर दिया गया।

-9 फ़रवरी 2009- तलवार दम्पति पर हत्या का मुकदमा दर्ज।

-जनवरी 2010- राजेश और नूपुर के नार्को टेस्ट की इजाजत मिली।

-दिसम्बर 2010- 30 महीने तक चली जाँच के बाद सीबीआई ने कोर्ट को क्लोज़र रिपोर्ट सौंपी।

-25 जनवरी 2011- नए सिरे से जांच की मांग को लेकर राजेश तलवार पर कोर्ट परिसर में हमला हुआ।

-12 अप्रैल 2011- नूपुर की जमानत पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया।

-6 जनवरी 2012- उच्चतम न्यायालय ने तलवार दम्पति पर मुक़दमा चलाने का आदेश दिया।

-30 अप्रैल 2012- नूपुर तलवार को भी गिरफ़्तार किया गया।

-जून 2012- अदालत के निर्देश पर फिर से सुनवाई शुरू हुई।

-25 सितम्बर 2012- नूपुर तलवार की रिहाई का आदेश जारी हुआ।

-24 अप्रैल 2013- सीबीआई ने राजेश तलवार पर हत्या का आरोप लगाया।

-11 जून 2013- गवाहों के बयान दर्ज होना शुरू किए गए।

-12 नवम्बर 2013- मुकदमें की अन्तिम सुनवाई पूर्ण हुई।

-25 नवम्बर 2013- नूपुर एवं राजेश तलवार को अपनी पुत्री आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या का दोषी करार दिया गया।

26 नवम्बर 2013- नूपुर एवं राजेश तलवार को उम्रक़ैद की सजा। जस्टिस एस लाल ने 208 पेज का जजमेंट सुनाया था।

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