परिवर्तन की राह पर सपा, शिवपाल को प्रभारी बनाए जाने के क्या हैं मायने?

Published by Admin Published: April 11, 2016 | 11:00 pm
Modified: August 10, 2016 | 3:58 am

फाइल फोटो: मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और शिवपाल यादव

लखनऊ: वैसे तो समाजवादी पार्टी में फेरबदल, नियुक्ति और मनोनयन की सूचना महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के जारी पत्र से ही बाहर आती है। पर बहुत दिनों बाद सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने खुद पत्र जारी किया है, जो बताता है कि कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव को सपा का यूपी प्रभारी बनाया गया है। इससे साफ हो जाता है कि मौजूदा दौर में सपा संगठन परिवर्तन की राह पर है और अब पार्टी के अंदरखाने में इस पत्र के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

“आउट ऑफ पार्टी” बढ़ें कद से शिवपाल को फायदा
-सपा के अंदरखाने की चर्चा पर गौर करें तो शिवपाल के बेटे आदित्य की शादी के रिसेप्शन में राजधानी स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क में बिहार के सीएम नितीश  कुमार आए थे। -इसके अलावा पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा के अलावा बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव, बिहार के मौजूदा डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और चौधरी अजीत सिंह सहित कई बड़े नेता पहुंचे थे।
-इससे साफ हो गया कि शिवपाल का “आउट आफ पार्टी” कद बढ़ा है। शिवपाल को इसका भी फायदा मिला।

राजेन्द्र चौधरी के पर कतरने के साथ ही हो गई थी शुरुआत
दरअसल, शिवपाल सिंह यादव को संगठन में कद बढ़ने की शुरूआत तभी से हो गई थी। जब सीएम अखिलेश यादव के साथ परछाई की तरह रहने वाले प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी के पर कतर दिए गए थे और शिवपाल सिंह यादव को पार्टी का मुख्य प्रवक्ता बनाया गया था।
-इसके पहले पार्टी में शिवपाल सिंह यादव को यूपी सपा का कमान सौंपने की बात भी उठी थी।
-इसके बाद शिवपाल खेमे के माने जाने वाले अरविन्द सिंह गोप को पार्टी का प्रदेश महासचिव बनाया गया।
-पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की शिकायत थी कि उनकी प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात नहीं हो पाती। वह अपनी दिक्कतें किसे बताएं।

मुलायम को युवा ब्रिगेड से मिला संदेश नहीं भाया
-पार्टी सूत्रों की मानें तो बीते महीनों सपा के युवा संगठन के नेताओं की बैठक हुई थी।
-इसमें सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव मौजूद थे।
-इस बैठक में अचानक मुलायम युवा नेताओं से पूछ बैठे कि अगले चुनाव में पार्टी जीत रही है तो इसके जवाब में सिर्फ मुट्ठी भर युवाओं ने ही हाथ उठाया था।
-बताया जा रहा है कि यूथ ब्रिगेड का यह जवाब सपा मुखिया को नागवार गुजरा था।
-इस घटना को भी इस पत्र से जोड़कर देखा जा रहा है।

संगठन के कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों से जुड़ाव
-यह भी कहा जा रहा है कि ​सरकार बनने के बाद से ही शिवपाल यादव ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर सिंचाई, लोक निर्माण और सहकारिता जैसे विभागों के जरिए सरकार की अहम योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू किया तो वहीं संगठन के कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के व्यक्तिगत कार्यक्रमों में भी लगातार जाते रहे।
-उनका कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के विभिन्न समारोहों में जाने का सिलसिला अब भी जारी है।
-इस वजह से भी पार्टी के अंदर उनकी छवि को मजबूती मिली।

अखिलेश का युवा और शिवपाल का वरिष्ठ नेताओं में मेल-जोल ज्यादा ?
-इसके यह भी मायने निकाले जा रहे हैं कि पार्टी के अंदर वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से शिवपाल का मेलजोल ज्यादा है।
-जबकि अखिलेश की युवा ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं से ज्यादा नजदीकी है जो बीते महीनों सुनील यादव और आनन्द भदौरिया के निष्कासन के बाद खुलकर सामने भी आई।
-आगामी चुनावों में वरिष्ठ नेताओं के बीच संतुलन साधने की कवायद को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है।

शिवपाल का जनता दरबार  
-शिवपाल पार्टी के इकलौते ऐसे मंत्री के तौर पर उभर कर सामने आए हैं, जो पार्टी मुख्यालय के अलावा अपने आवास पर रेगुलर जनता दरबार कार्यक्रम में दिखे और लोगों से मिलकर उनका दुख दर्द सुना।

अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को प्रतिलिपि जारी कर दी गई सूचना ?
-शिवपाल यादव को यूपी का प्रभारी बनाए जाने का पत्र प्रतिलिपि के तौर पर जारी कर प्रवक्ता शिवपाल सिंह यादव, प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव और महासचिव प्रो रामगोपाल यादव को इसकी सूचना दी गई ?
-पार्टी सूत्रों की मानें तो इसको लेकर भी सपा परिवार के अंदर द्वंद तेज हो गया है।

शिवपाल को यूपी प्रभारी बनाना साजन और भदौरिया कनेक्शन तो नहीं ?
-पार्टी सूत्रों की मानें तो जब सपा ने पंचायत चुनावों के दौरान आनंद भदौरिया और सुनील सिंह यादव को निष्कासित कर दिया था।
-तब सीएम की नाराजगी की वजह से ही इन युवा नेताओं की वापसी हुई और अब यह युवा नेता एमएलसी हैं।
-खास यह है कि इन युवा नेताओं के निष्कासन का आदेश शिवपाल सिंह यादव ने ही जारी किया था और अब शिवपाल को यूपी का प्रभारी बनाया जाना उसी घटना के डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखा जा रहा है।

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