केरल और असम में गई कांग्रेस की सरकार, पुदुचेरी ने बचाई इज्जत

Published by Published: May 19, 2016 | 3:37 pm
Modified: August 10, 2016 | 4:00 am

लखनऊ :असम,तमिलनाडु,,केरल और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए अच्छे नहीं रहे। केरल और असम में उसे सत्ता गंवानी पडी तो तीस सीट वाले छोटे से राज्य पुदुचेरी ने उसकी इज्जत बचा ली।

कांग्रेस की सबसे बुरी हार असम में हुई जहां उसे 15 साल पुरानी सत्ता से हाथ धोना पड़ा। बुजुर्ग हो रहे तरूण गोगई के नेतृत्व में कांग्रेस को अब तक की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा।छात्र राजनीति से असम के लिए काम करने वाले सर्बानंद सोनोवाल पर बीजेपी ने पूरा भरोसा किया और उन्होंने पार्टी नेतृत्व को निराश नहीं किया। कांग्रेस से निराश होकर बीजेपी में आए हेमंत सरमा ने भी पार्टी की जीत में अहम रोल अदा किया।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से जब हेमंत मिलने गए थे तो उन्होंनें उनसे ढंग से बात नहीं की थी जिससे निराश होकर उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी और बीजेपी में शामिल हो गए थे ।असम में सरकार के कामकाज से परेशान लोग इस बार बदलाव का मन बना चुके थे। नतीजा ये हुआ कि बीजेपी को पहली बार पूर्वोत्तर राज्य में सरकार बनाने का मौका मिल गया। असम में बीजेपी ने बिहार वाली गलती नहीं कि और पहले से सीएम उम्मीदवार घोषित कर दिया था ।अरूणाचल में बीजेपी के सहयोग से क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के बागियों की सरकार चल रही है।

राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि इसका असर पूर्वोत्तर के अन्य राज्य मेघालय,मणिपुर और त्रिपुरा पर भी पड़ेगा ।बीजेपी ने केरल में भी दस्तक दी और एक सीट जीतने में कामयाब रही ।दक्षिण के इस सर्वाधिक शिक्षित राज्य में बीजेपी को पहली बार जीत मिली है। पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही है ।

पश्चिम बंगाल में वाम दलों और कांग्रेस के एक साथ चुनाव लड़ने से ये लग रहा था कि ममता बनर्जी के लिए कुछ परेशानी खड़ी हो सकती है लेकिन ऐसा हो नहीं सका ।ममता बनर्जी पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा सीट लेकर सत्ता में आई हैं। साल 2011 के चुनाव में वो कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव में उतरी थीं और 184 सीटें जीती थीं ।इस बार उनकी सीटों की संख्या 200 को पार कर गई है। ममता बनर्जी 27 मई को सीएम पद की शपथ लेंगी।

तमिलनाडु में जयललिता ने 1984 से चल रहे हर बार दूसरी सरकार के प्रचलन को तोड़ दिया है।अब तक ये हो रहा था कि एक बार करूणानिधि के डीएमके को सत्ता मिलती थी तो दूसरी बार जयललिता की एआईएडीएमके को। खबरिया चैनल ने भी एक्जिट पोल में करूणानिधि की सरकार बनने की भविष्यवाणी की थी ।लेकिन ऐसा नहीं हो सका और जयललिता ने धमाकेदार वापसी की।वो 6 ठी बार सीएम बनेंगी।

वामपंथी दल पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे थे तो केरल में दोनों एक दूसरे के आमने सामने थे ।केरल में वामपंथी दलों के एलयूएफ ने कांग्रेस के डीयूएफ को पीछे छोड़कर सत्ता पर कब्जा कर लिया।

आ रहे नतीजों के अनुसार 30 सीटों वाले पुदुचेरी में कांग्रेस सरकार बनाने में सफल हो सकती है। यहां भी कांग्रेस का डीएमके के साथ गठबंधन है।

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के साथ जाना वाम मोर्चा के लिए घातक साबित हुआ ।वाममोर्चा यदि अकेले चुनाव लड़ता तो उसके परिणाम कुछ और हो सकते थे। दरअसल बंगाल में बीजेपी के ज्यादा वोट पाने का नुकसान वाममोर्चा कांग्रेस गठबंधन को हुआ। संभवत: इसीलिए ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को ज्यादा सीटें मिल गई। ममता बनर्जी भी मानती हैं कि वामदलों के साथ कांग्रेस का जाना उस पार्टी की सबसे बड़ी गलती थी।

ममता बनर्जी और राहुल गांधी की मुलाकात नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में हुई थी जिसमें ममता ने राहुल को वामदलों के साथ गठबंधन नहीं करने की सलाह दी थी। राहुल ने दिल्ली लौटते ही ममता से हुई बातचीत का खुलासा मीडिया के सामने कर दिया और अपनी राजनीतिक अपरिपक्वता भी दिखा दी। ममता ,राहुल के इस खुलासे से नाराज भी हुई थीं।

राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पार्टी की ओर देख ही नहीं रही हैं। उनका पूरा ध्यान परिवार को बचाने में लगा है। संभवत:सोनिया की ये सोच कि परिवार बच गया तो पार्टी को बचाया जा सकता है। दरअसल लोकसभा चुनाव हारने के बाद से ही कांग्रेस नकारात्मक राजनीति कर रही हैं उसकी राजनीति बीजेपी को नुकसान पहुंचाने के आसपास घूमती दिखाई दे रही है।

अब हालत ये है कि कांग्रेस के पास बिहार समेत 6 राज्यों में सरकार है जबकि बीजेपी ने अपने राज्यों की संख्या बढ़ा कर 9 कर ली है। देश की 43 प्रतिशत आबादी वाले राज्यों पर बीजेपी का कब्जा है जबकि कांग्रेस 6 प्रतिशत आबादी तक ही सिमट कर रह गई है।