अमेरिका ने कसे पेंच, तो पाकिस्तान खटखटा रहा दोस्तों के दरवाजे

Published by Rishi Published: September 11, 2017 | 2:50 pm
Modified: September 11, 2017 | 2:51 pm

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ अपने क्षेत्रीय दौरे के दूसरे चरण में सोमवार को पड़ोसी देश ईरान के दौरे पर रवाना हो गए।

यह दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया के संबंध में नई रणनीति के संभावित नकारात्मक नतीजों की भरपाई करने के लिए पाकिस्तान की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

विदेश कार्यालय के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने कहा कि विदेश मंत्री इस एक दौरान ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी से मुलाकात करेंगे और अपने समकक्ष जावेद जरीफ से औपचारिक वार्ता करेंगे।

यह दौरा अफगानिस्तान व दक्षिण एशिया को लेकर ट्रंप की नई रणनीति के मद्देनजर पाकिस्तान का महत्वपूर्ण क्षेत्रीय देशों का समर्थन हासिल करने का प्रयास है।

ईरान उन देशों में से है, जिसने पाकिस्तान के खिलाफ ट्रंप के बयान की निंदा की है। अफगानिस्तान के मुद्दे पर दोनों (ईरान व पाकिस्तान) देशों का रुख समान नजर आ रहा है।

ईरान और सऊदी अरब के बीच संबंधों में सुधार आने से पाकिस्तान को इस दौरे से सकारात्मक नतीजा निकलने की उम्मीद है।

विदेश मंत्री ने इससे पहले शुक्रवार को चीन का दौरा किया था और उसका समर्थन हासिल करने में सफल रहे थे। चीन ने दुनिया से आतकंवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान के योगदान को सराहने का आग्रह किया है।

ट्रंप ने 21 अगस्त को अपने भाषण में अफगानिस्तान में गतिरोध समाप्त करने के लिए वहां सैनिकों की संख्या बढ़ाने की घोषणा की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साथ ही पाकिस्तान को अराजकता, आतंकवाद और हिंसा को बढ़ावा देने वाला एजेंट बताते हुए उसकी निंदा की थी।

इस बयान की भरपाई के तौर पर पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत डेविल हैले ने जोर देते हुए कहा था कि अफगानिस्तान में विफलता के लिए ट्रंप ने पाकिस्तान पर आरोप नहीं लगाया। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि अफगानिस्तान में शांति व स्थिरता लाने में पाकिस्तान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।