HC ने UP सरकार से पूछा- जवाहर बाग कांड की क्यों न कराएं CBI जांच

Published by Rishi Published: July 6, 2016 | 12:24 am
Modified: August 10, 2016 | 4:02 am

इलाहाबादः मथुरा के जवाहर बाग में बीती 2 जून को हुई हिंसा के मामले में यूपी सरकार नई मुश्किल में पड़ती दिख रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य की सपा सरकार से पूछा है कि क्यों न पूरे मामले की सीबीआई से जांच करा ली जाए। बता दें कि इस मामले की तह तक जाने के लिए सीबीआई या एसआईटी जांच की जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।

याचिका में क्या कहा गया है?
-जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस आरएन कक्कड़ की बेंच ने अश्विनी उपाध्याय और एक अन्य की याचिका पर ये सवाल पूछा है।
-उपाध्याय के मुताबिक जवाहर बाग की घटना में सरकार में बैठे लोगों और नक्सली समूहों का हाथ है।
-उन्होंने सीबीआई जांच और पीड़ितों व शहीदों को मुआवजा देने में भेदभाव की जगह स्पष्ट नीति की भी मांग की है।
-याचिका में कहा गया है कि जवाहर बाग कांड के मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव को मथुरा जिला प्रशासन ने 2014 की जनवरी में दो दिन के लिए धरना देने के वास्ते पार्क दिया।
-इसके बाद वहां हजारों की भीड़ जुटी, असलहे इकट्ठा हो गए और राजनीतिक शह की वजह से पुलिस बेबस हो गई।

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कोर्ट में और क्या कहा गया?
-2 जून 2016 को पुलिस कार्रवाई के दौरान दो अफसरों समेत 27 लोगों की मौत हो गई। इसकी जांच सीबीआई या न्यायिक आयोग से हो।
-अदालत ने जानना चाहा कि क्या अखबारों में छपी खबरों के अलावा कोई और सबूत याचिका देने वाले के पास है।
-वकील योगेश अग्रवाल ने कहा कि जांच आयोग कार्रवाई नहीं कर सकता, ऐसे में एसआईटी जांच होनी चाहिए।
-यूपी के महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति की और कहा कि याची बीजेपी का मेंबर है।

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क्या है मामला?
-2 जून को जवाहर बाग में जमे रामवृक्ष यादव और उसके साथियों को निकालने के लिए पुलिस कार्रवाई की गई।
-कब्जा जमाने वालों ने हिंसा की, जिसमें मथुरा के एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह संतोष यादव की जान गई।
-पुलिस की कार्रवाई के दौरान रामवृक्ष और उसके 24 साथियों की भी वहां मौत हुई।
-अश्विनी उपाध्याय ने पहले सीबीआई जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां से उन्हें हाईकोर्ट जाने को कहा गया।

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