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रिकवरी एजेंट्स ने ट्रैक्टर के नीचे कुचलकर किसान को मार डाला

Rishi

RishiBy Rishi

Published on 22 Jan 2018 9:52 AM GMT

रिकवरी एजेंट्स ने ट्रैक्टर के नीचे कुचलकर किसान को मार डाला
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सीतापुर : देश में फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंट्स के गलत तौर तरीकों के चलते सुप्रीम कोर्ट इसपर रोक लगा चुका है। लेकिन ये आज भी अपनी गुंडागर्दी बिना डरे कायम रखे हुए हैं। ये इतने निडर हो चुके हैं कि किसी की जान लेने से भी नहीं डरते। सीतापुर के ज्ञानचंद इन्हीं एजेंट्स के हाथों मौत के घाट उतर गए। उनकी गलती सिर्फ ये रही कि उन्होंने कंपनी के रिकवरी एजेंट्स को ट्रैक्टर ले जाने से रोकने का प्रयास किया था।

ज्ञानचंद के पड़ोसी बताते हैं कि लगभग चार-पांच रिकवरी एजेंट्स आए थे। उनकी ज्ञानचंद से कहासुनी हो रही थी। ज्ञानचंद जब ट्रैक्टर पर चढ़ने लगे तो उनमें से एक ने ज्ञानचंद को धक्का दिया। जब ज्ञानचंद जमीन पर गिर गए तो ट्रैक्टर से उन्हें कुचल दिया। ये एजेंट्स जिस मार्शल जीप से आए थे, उसके ड्राइवर ने पीछे से तड़प रहे ज्ञानचंद पर जीप चढ़ा दी। जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

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पड़ोसी का खेत जोत रहे थे

जब ये दर्दनाक घटना हुई उस समय सीतापुर, महमूदाबाद के भौंरी गांव निवासी दलित ज्ञानचंद अपने पड़ोसी राजकिशोर का खेत जोत रहे थे। इसी दौरान खेत पर चार-पांच युवक आए। उन्होंने ट्रैक्टर की बकाया किश्तों का कागज दिखा पैसा जमा करने को कहा। कहासुनी होने लगी। इसी दौरान एक युवक ट्रैक्टर पर चढ़ गया। ज्ञानचंद उनसे ट्रैक्टर न ले जाने के लिए गिडगिडा रहे थे। लेकिन उसने उनकी एक भी नहीं सुनी और उनको धक्का दे दिया और ट्रैक्टर से उनको रौंदते हुए आगे बढ़ गया। जिस मार्शल जीप से आए थे, उसके ड्राइवर ने पीछे से तड़प रहे ज्ञानचंद पर जीप चढ़ा दी।

रिकवरी एजेंट्स ज्ञानचंद की लाश छोड़कर फरार हो गए। गांव वालों ने तीन के खिलाफ नामज़द रिपोर्ट दर्ज कराई। इस दर्दनाक घटना के लगभग तीस घंटे बाद रविवार देर शाम पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया।

ज्ञानचंद के बड़े भाई लेखराम ने बताया कि तीन साल पहले एलएंडटी नाम की एक फाइनेंस कंपनी से उनके भाई ने पांच लाख रुपये का लोन ले ट्रैक्टर खरीदा था। कर्जे के सिर्फ 30-35 हजार रुपये बच गए थे। जब इतना दे दिए थे तो बचा हुआ पैसा भी दे देते।

मृतक ज्ञानचंद के चार भाई हैं परिवार के पास लगभग पांच बीघे कृषि योग्य भूमि ​है। यही भूमि परिवार की आजीविका का साधन है। ज्ञानचंद की पांच बेटियां हैं। सबसे छोटी अभी छह महीने की ही है। मृतक की पत्नी कमला अब अपनी बच्चियों के भविष्य के लिए चिंतित हैं।

परिजनों के मुताबिक ज्ञानचंद पर 30-35 हजार का ही बकाया था। लेकिन फाइनेंस कंपनी नब्बे हजार का बकाया कागजों में दिखा रही थी। पिछली किश्त जब कंपनी में जमा की गई तो ज्ञानचंद को उसकी रसीद भी नहीं दी गई थी।

महमूदाबाद एसडीएम रतिराम कहते हैं दोषी जल्दी ही पकड़े जाएंगे। उन्हें कड़ी सजा मिलेगी। पीड़ित परिवार को सरकार की ओर से हर संभव आर्थिक मदद मुहैया कराई जा रही है। पांच लाख रूपए मृतक की पत्नी को तत्काल दिए जाएंगे।

वहीं पुलिस पर आरोप है कि नामजद रिपोर्ट होने और गांव वालों द्वारा आरोपी को पहचानने के बाद भी पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया जो साल भर पहले कंपनी छोड़ चुका है।

महमूदाबाद क्षेत्राधिकारी जावेद खान कहते हैं जल्द ही दोषियों को पकड़ने की कोशिश है। यह भी पता करेगें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी फाइनेंस कंपनी कैसे रिकवरी एजेंट्स रख रही है।

परिजन आश्वासन मानने को तैयार नहीं हैं। वो चाहते हैं कि लिखित कार्रवाई हो वर्ना दाह संस्कार नहीं करेंगे।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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