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घरेलू हिंसा का शिकार हुई थी सोनी, कैद से भागकर ऐसे बदली अपनी किस्मत

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AdminBy Admin

Published on 10 April 2016 8:46 AM GMT

घरेलू हिंसा का शिकार हुई थी सोनी, कैद से भागकर ऐसे बदली अपनी किस्मत
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वाराणसीः कथक में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाली काशी की सोनी चौरसिया अब किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। सोनी को देश भर से बधाईयां मिल रही हैं, लेकिन उनकी सफलता के पीछे की दर्द भरी कहानी को शायद ही कोई जानता हो।

सोनी की सफलता का कारण भी यही है कि उसके दर्द ने उसे कमजोर नहीं बनाया बल्कि उसके हौसले को और मजबूत किया। जिसके बाद सोनी ने कुछ कर दिखाने की ठानी और आज देश को पूरा करके दिखा भी दिया। सोनी का सपना बेस्ट कोरियोग्राफर बनना है। रिकॉर्ड बनाने के बाद सोनी वर्ल्ड टूर पर निकलने की तैयारी कर रही हैं।

डिप्रेशन भी नहीं तोड़ पाया हौसले को

सोनी की कहानी बिल्‍कुल फिल्‍मी पर्दे जैसी है, जिसमें एक लड़की प्रताड़ना की हद को पार एक मुकाम हासिल करती है। सोनी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। सोनी ने छोटी सी उम्र में जिस प्रताड़ना को झेल कर यह मुकाम को हासिल किया है, उस समय पर आमतौर लोग टूट जाते हैं। डिप्रेशन का शिकार होकर सुसाइड तक कर लेते हैं। लेकिन सोनी को ऐसा करना गंवारा नहीं था। लिहाजा सोनी ने लड़ने का रास्ता अपनाया।

अपने परिवार के साथ सोनी अपने परिवार के साथ सोनी

ससुराल में कैद कर दी गयी थी सोनी

सोनी के माता-पिता ने दिल्ली में रहने वाले युवक के साथ अपनी बेटी की शादी 2009 में बड़ी धूमधाम से की थी। लेकिन शादी के कुछ दिनों बाद ही सोनी के सारे सपने चकनाचूर हो गए। पति के साथ ही ससुराल वालों की प्रताड़ना शुरू हो गई। हद तो तब हो गई, जब सोनी को घर में ही कैद कर मोबाइल भी छीन लिया गया ताकि वह किसी से न मिल सके और न ही बात कर सके। सोनी खुले विचारों वाली और खेलप्रेमी थी, लेकिन पति पुरानी सोच का था।

बिना पैसे के ससुराल से भागी थी सोनी

दिन पर दिन बढ़ती प्रताड़ना से सोनी शादी के चंद महीने बाद ही जैसे-तैसे अपनी जान बचाकर ससुराल से निकल गई। सोनी ने जब पति का घर छोड़ा, तो उसके पास एक भी पैसा नहीं था। जैसे- तैसे वह बिना टिकट ट्रेन से वापस वाराणसी अपने मातापिता के घर पहुंची।

माता पिता ने दिखाया साहस

जमाने से बिल्कुल अलग माता पिता ने भी रीति-रिवाज और नाते रिश्‍तेदारों के ताने को दरकिनार कर बेटी के साथ खड़े हो गए। माता-पिता ने बेटी को बोझ नहीं समझा बल्कि उसको जीवन में खड़ा होने के लिए सहारा दिया। आर्थिक तंगी के बावजूद सोनी की हर संभव मदद की। माता पिता का सहारा मिला, तो सोनी के हौसले बुलंद हो गए।

अपने पैरों पर खड़ी हुई सोनी

सोनी ने पति का घर छोड़ कर अपने पैरों पर खड़े होने का साहस दिखाया। सोनी ने हरियाणा के विद्यादेवी जिंदल स्कूल में डांस टीचर की नौकरी ज्वाइन की। सोनी ने 2010-2015 तक नौकरी की । उसके बाद नौकरी छोड़ दी।

काफी बड़े थे सोनी के सपने

सोनी को साधारण महिला बन कर जीना गंवारा नहीं था क्योंकि सोनी के सपने बड़े थे। उसे जीवन में कुछ बड़ा करना था। लिहाजा सोनी नौकरी छोड़ एक बार फिर घर वापस आ गई। सोनी इस बार कुछ कर गुजरने की ठान कर घर वापस आई थी। सोनी ने कोच राजेश डोगरा के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए साधना शुरू की। पहली बार मंच पर उतरने से पहले सोनी कोच के साथ मां वैष्णों देवी के दरबार में माथा टेकने गई थी।

आसान नहीं रहा सोनी का सफर

सोनी का बचपन नानी के घर पर गुजरा। सोनी ने हरिशचंद्र बालिका इंटर कालेज से हाईस्कूल व इंटरमीडियट की पढ़ाई की। उसके बाद आर्य महिला डिग्री कालेज से सितार में बी.म्यूज व एम म्यूज किया। इसके बाद राजेश डोगरा से मुलाकात हुई। सोनी ने गुरू राजेश से रोलर स्केट का प्रशिक्षण लिया और जिले से लेकर राष्‍ट्रीय स्तर पर मेडल जीते। गुरू की सलाह पर रोलर स्केट पर कथक का रियाज किया। 2010 में 14-15 अप्रैल तक रोलर स्केट पर कथक कर लिम्का बुक में नाम दर्ज कराया। सोनी को गंगा महोत्सव से पहचान मिली थी ।

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