25 साल बाद मिला मेरे बेटे को इंसाफ, अब मैं सुकून से मर सकूंगा

करनैल सिंह

लखनऊ: वर्दी पर कुछ सितारे चमकाने के लिए यूपी पुलिस ने 25 साल पहले कई परिवारों के जीवन में अंधेरा कर दिया, जिससे कई मांगे सूनी हो गईं और कई घर उजड़ गए। जिस उम्र में बेटे कंधा देते हैं उस उम्र में एक पिता अपने बेटे के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं।

बदकिस्मती इतनी है कि जिस बेटे के हत्यारों की मौत के लिए वे लड़ रहे हैं उन्हें वे कंधा तक नही दे पाए।

बेटा जाता विदेश अगर न मारती पुलिस

-अपने बेटे धरमिंदर सिंह मिंटा के बारे में बताते हुए पंजाब के गुरुदासपुर से आए अजीत सिंह ने कहा कि 4 बेटे और 5 बेटियां थी।
-मिंटा को विदेश जाने की बड़ी इच्छा थी कि वह विदेश जाएगा और लाखों रूपए कमाएगा।
-इसी सपने की उधेड़बुन में वह लगा था।
-उसका पासपोर्ट भी बन गया था, बस वीजा लगना बाकी था।

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-लेकिन पुलिस ने उसे आतंकी बताकर मार दिया।
-उसकी मौत के बाद हमने कैसी जिन्दगी जी है, इस बात का अंदाजा सिर्फ मुझे है।
-कोई बाप नही चाहता कि उसका बेटा उसके सामने मरे।

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अजीत सिंह

दो महीने बाद उसकी बीवी ने बेटी को जन्म दिया तो पूरे खानदान ने मिलकर पढाया
-अजीत सिंह बताते हैं कि मिंटा की शादी को सिर्फ 7 महीने हुए थे।
-उसकी मौत के 2 महीने बाद ही उसकी पत्नी ने एक बेटी गुडिया को जन्म दिया।
-आज वह पूरे 25 साल की हो गई है।
-हमारे पूरे खानदान ने मिलकर उसे पढ़ाया और नर्सिंग से बीएससी करवाई।
-जिससे बेटी को नौकरी मिल जाए, लेकिन अभी तक उसे नौकरी नही मिली।
-अजीत ने बताया की उन्होंने पूरी जिन्दगी अपनी आंखों के सामने अपनी बेटे की बेवा को देखा है।

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बेटे को पढ़ाने और न्याय दिलवाने के लिए की मजदूरी
-अपनी आंखों के सामने अपने पति और देवर को पुलिस के द्वारा बस से उतारने की गवाह बनी बलबिंदर जीत सिंह कौर ने बताया कि पुलिस ने पति और देवर दोनों को मार दिया।
-उसके 2 महीने बाद मेरा बेटा करमवीर सिंह पैदा हुआ।
-घर में कोई भी कमाने वाला आदमी नहीं था।
-अपने पति के लिए इंसाफ और अपने बेटे की देखभाल के लिए मैंने गांव में मजदूरी की।
-खेतों में काम किया और अपनी गांव की जमीन तक बेच डाली।

बलविंदर जीत सिंह कौर
बलविंदर जीत सिंह कौर

अब बेटे को इंसाफ मिल गया सुकून से मर सकूंगा
-अपनी बहू के साथ अपने बेटे सुरजन सिंह के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे 80 साल के करनैल सिंह ने कहा कि 25 साल बाद बेटे को इंसाफ मिल गया।
-अब जिंदगी में मरने के सिवाय बचा ही क्या है।
-अब सुकून से मर सकूंगा।

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करनैल सिंह