14 साल बाद BJP को क्‍लीन चिट, VHP-CONG नेताओं समेत 24 दोषी

अहमदाबाद: गुजरात में 2002 में हुए दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड मामले में गुरुवार को अहमदाबाद में स्पेशल कोर्ट ने फैसला सुना दिया। कोर्ट ने इस मामले में 24 आरोपियों को दोषी करार दिया है, जबकि 36 लोगों को बरी कर दिया। बरी किए गए लोगों में बीजेपी के पार्षद बिपिन पटेल भी शामिल हैं। अदालत 6 जून को दोषियों को सजा सुनाएगी।

कोर्ट ने वीएचपी नेता अतुल और कांग्रेस के कॉरपोरेटर मेघसिंह चौधरी को दोषी करार दिया है, जबकि पी.आई. के.जी.एरडा और बीजेपी कॉरपोरेटर विपिन पटेल को बेगुनाह ठहराया है। फैसले की खास बात ये है कि अदालत ने दंगों के पीछे किसी साजिश की बात नहीं मानी।

क्या था मामला
-गुजरात के गोधरा में 27 फरवरी को कुछ लोगों ने साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बों में पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी जिसमें 25 से ज्यादा लोग जिंदा जल गए थे।
-सभी लोग अयोध्या से रामलला का दर्शन कर जा रहे थे।
-28 फरवरी 2002 को भड़की हिंसा के दौरान भीड़ ने गुलबर्ग सोसायटी पर हमला कर दिया था।
-इस हमले में 69 लोग मारे गए थे, जिनमें पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी भी थे।
-एक आरोपी विपिन पटेल बीजेपी के मौजूदा काउंसलर हैं।

-7 नवंबर 2007 को गुजरात हाईकोर्ट ने भी शिकायत को एफआईआर मानकर जांच करवाने से मना कर दिया।
-घटना के बाद 39 लोगों के शव बरामद किए गए थे जबकि सात साल बाद बाकी 30 लापता लोगों को मृत मान लिया गया था।

कोर्ट ने खारिज की थी दो आरोपियों की अर्जी
-पिछले हफ्ते कोर्ट ने नारायण टांक और बाबू राठौड़ नाम के दो आरोपियों की ओर से दायर वह अर्जी खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए नार्को -एनालिसिस और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की गुहार लगाई थी । कोर्ट ने कहा कि अब जब फैसला आने वाला है तो इसकी जरूरत नहीं है।
गुलबर्ग सोसाइटी दंगा मामले में कब क्या हुआ?
-गोधरा कांड के एक दिन बाद यानी 28 फरवरी, 2002 को 29 बंगलों और 10 फ्लैट वाली गुलबर्ग सोसायटी पर हमला हुआ।
-गुलबर्ग सोसायटी में सभी मुस्लिम रहते थे, सिर्फ एक पारसी परिवार रहता था । यहां पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी भी रहते थे।
-20 हजार से ज्यादा लोगों की हिंसक भीड ने पूरी सोसायटी पर हमला किया । ज्यादातर लोगों को जिंदा जला दिया।
-39 लोगों के शव बरामद हुए और अन्य को गुमशुदा बताया गया, लेकिन 7 साल बाद भी उनके बारे में कोई जानकारी न मिलने पर उन्हें मृत मान लिया गया।
-अब कुल मौतों का आंकडा 69 है ।मृतकों में एहसान जाफरी भी थे ।
-8 जून, 2006 को ज़किया जाफरी और एहसान जाफरी की पत्नियों ने पुलिस को एक फरियाद दी, जिसमें हत्याकांड के लिए सीएम नरेंद्र मोदी और कई मंत्रियों और पुलिस अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया गया।
-पुलिस ने ये फरियाद लेने से मना कर दिया।
-7 नवंबर, 2007 को गुजरात हाईकोर्ट ने भी इस फरियाद को एफआईआर मानकर जांच करवाने से इनकार कर दिया।
-26 मार्च, 2008 को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों के 10 बडे केसों की जांच के लिए आर के राघवन की अध्यक्षता में एक एसआईटी बनाई । इनमें गुलबर्ग का मामला भी था।
-मार्च 2009 में ज़किया की फरियाद की जांच करने का जिम्मा भी सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को सौंपा।
-सितंबर 2009 में ट्रायल कोर्ट में गुलबर्ग हत्याकांड की सुनवाई शुरू हुई।
-27 मार्च 2010 को नरेंद्र मोदी को एसआईटी ने ज़किया की फरियाद के संदर्भ में समन जारी किया औऱ कई घंटों तक पूछताछ हुई।
-14 मई 2010 को एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की।
-11 सितंबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला ट्रायल कोर्ट पर छोड़ा।
-8 फरवरी 2012 को एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश की।
-10 अप्रैल 2012 को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने एसआईटी की रिपोर्ट को माना कि मोदी और अन्य 62 लोगों के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं।
-इस मामले में 66 आरोपी हैं, जिसमें प्रमुख आरोपी बीजेपी के असारवा के काउंसलर बिपिन पटेल भी हैं।
-आरोपियों में से 9 अब भी जेल में हैं, जबकि अन्य सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
-इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ पीड़ितों की मदद कर रही थीं।
-उन्होंनें कहा कि सबूत के अभाव में रिहा किए गए 36 लोगों के खिलाफ बड़ी अदालत में अपील का विकल्प खुला है।

मोदी से भी हुई थी पूछताछ
-26 मार्च 2008 को सुप्रीम कोर्ट ने दंगों के 10 बड़े केसों की जांच के लिए एक एसआईटी बनाई।
-मार्च 2009 में जकिया की शिकायत की जांच करने का जिम्मा भी सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को सौंपा।
-27 मार्च 2010 को नरेंद्र मोदी को एसआईटी ने समन किया और कई घंटों की पूछताछ हुई।
-10 अप्रैल 2012 को मेट्रोपोलिटन मजिस्‍ट्रेट ने माना कि मोदी और अन्य 62 लोगों के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं।