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जगा गई बजरंगी की मौत, अब सभी जेलों में होगा CCTV और जैमर का पहरा

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 13 July 2018 1:56 PM GMT

जगा गई बजरंगी की मौत, अब सभी जेलों में होगा CCTV और जैमर का पहरा
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लखनऊ : हिंदुस्‍तान में बदलाव के लिए मरना जरूरी होता है। ये हम नहीं कह रहे, बल्कि देश के सबसे बड़े प्रदेश का हाल है। पिछले कई सालों से जेलों में सीसीटीवी और जैमर लगाने की बातें होती रही हैं। कुछ में लगाए भी गए लेकिन अधिकतर सिर्फ शो पीस बनकर रह गए। यूपी की जेलों का हाल बेहाल है। बागपत जेल में माफिया प्रेम प्रकाश उर्फ़ मुन्ना बजरंगी की ह्त्या के बाद जेलों में भ्रष्टाचार और निकम्मेपन की परतें एक-एक कर खुल रही हैं। बागपत और सोनभद्र की जेलों में जहाँ जून में ही सीसीटीवी कैमरे लगने थे, वह अब तक नहीं लग सके हैं। यूपी की 70 जेलों में से जिन 24 जेलों में जैमर लगे हैं, वह 3 जी फोन को तो ब्लॉक करते हैं। लेकिन 4 जी फोन इन जेलों में बिना किसी बाधा के काम करता है। बजरंगी शूट आउट के बाद जेल प्रशासन की कुम्भकर्णी नींद टूटी है। जिस के बाद प्रदेश की सभी जेलों को सीसीटीवी कैमरों से लैस किये जाने की तैयारी चल रही है। जिन 48 जेलों में सीसीटीवी कैमरे पहले से लगे हैं। उन की संख्या भी बढ़ाई जा रही है।

बजरंगी मर्डर के बाद जेल प्रशासन की टूटी कुम्भकर्णी नीन्द

यूपी की जेलों में गुण्डों और माफियाओं का राज चलता है। बागपत जेल में माफिया प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ़ मुन्ना बजरंगी की ह्त्या इसी तरफ इशारा कर रही है। जेल में किसी फाईव स्टार होटल की तरह सुविधा भी माफियाओं को उपलब्ध कराई जाती है। लज़ीज़ खाने पीने की व्यवस्था के साथ मोबाईल फ़ोन और असलहे तक जेल के अंदर माफियाओं को उपलब्ध कराये जाते हैं। मुन्ना बजरंगी की जेल में ह्त्या के बाद हुक्मरानों की कुम्भकर्णी नीन्द टूटी है। बागपत और सोनभद्र में सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। जबकि प्रदेश की उन 48 जेलों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जा रही है, जहाँ पहले से कैमरे लगे हैं। डीआईजी जेल लव कुमार ने बताया कि पहले से जिन 48 जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। उन जेलों में कैमरों की संख्या बढ़ा कर 30 की जा रही है। उन्होंने बताया कि 20 जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम चल रहा है।

4 जी फोन का सिग्‍नल ब्लॉक करने के लिए 3 जी जैमर

डीआईजी जेल लव कुमार ने यूपी की जेलों में जैमर की परफॉर्मेंस पर उठ रहे सवालों पर भी सफाई पेश की है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 70 जेलों में से 24 जेलों में जैमर लगे हैं। इन जैमरों को अपग्रेड करने का प्रस्ताव शासन भेजा जा रहा है। अभी जो जैमर हैं, वह सिर्फ 3 जी फ़ोन के सिग्‍नल को ही ब्लॉक कर पाते हैं। ऐसे में 4 जी फोन के इस्तेमाल की शिकायतें मिलती रहती हैं। स्थिति कितनी बदतर है, इसका अन्दाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लखनऊ जेल में बन्द पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने वाराणसी के ठेकेदार को सरकार में काम दिलाने के बदले कमीशन नहीं देने पर धमकाया था। इस मामले में व्यापारी ने वाराणसी के दशाश्वमेघ थाने में मुक़दमा दर्ज कराया है। जाँच के दौरान जिस मोबाईल से धमकी दी गई, उसकी लोकेशन लखनऊ जेल पाई गई है।

डीआईजी जेल लव कुमार ने लखनऊ जेल में बन्द बलात्कार के आरोपी गायत्री प्रसाद प्रजापति मामले पर भी सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि जाँच की जा रही है और अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि कॉल जेल के अन्दर से हुई है या फिर बाहर से क्योंकि आसपास आबादी है। ऐसे में जेल के क़रीब लगे टावर की लोकेशन भी जेल ही दर्शाती है।

इन जेलों में सुरक्षा का घेरा मज़बूत करने की क़वायद

बागपत जेल में शूट आऊट के बाद आगरा, बरेली, हमीरपुर, बरेली, बाँदा, वाराणसी, सोनभद्र, बागपत और मैनपुरी जैसे जेलों की सुरक्षा सख्त की गई है। बाँदा जेल में बाहुबली विधायक मुख़्तार अन्सारी, बरेली जेल में माफ़िया डॉन बबलू श्रीवास्तव, वाराणसी जेल में माफिया बृजेश सिंह, मैनपुरी जेल में मुन्ना बजरंगी का शूटर संजीव माहेश्वरी उर्फ़ जीवा बंद है। जीवा मुन्ना बजरंगी का शॉर्प शूटर है और विधायक कृष्णानंद राय हत्याकाण्ड में भी उसका नाम सामने आया है।

सुनील राठी को भेजा जाएगा फतेहगढ़

डॉन मुन्‍ना बजरंगी के हत्‍यारोपी सुनील राठी को शासन के निर्देश पर शुक्रवार को बागपत जेल से फतेहगढ़ जेल भेजे जाने का आदेश जारी किया गया है। गौरतलब है कि सुनील राठी पर आरोप है कि उसने बागपत जेल के अंदर मुन्‍ना बजरंगी की जेल के अंदर गोलियों से भूनकर हत्‍या कर दी थी।

टल सकता था हत्‍याकांड

डीआईजी जेल लव कुमार की मानें तो जेल प्रशासन ने इस हत्‍याकांड से पहले ही सुनील राठी की पेशी के बाद उसको किसी जेल में शिफ्ट करने के लिए प्रस्‍ताव शासन स्‍तर पर भेजा था। जिस पर इस हत्‍याकांड से पहले कोई फैसला नहीं हो सका था। अगर इस पर निर्णय हो गया होता तो शायद बागपत जेल प्रशासन पर कोई कलंक न लगता।

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