VIDEO: होली मस्ती में बलम पिचकारी पर झूमे रंगों में डूबे विदेशी पर्यटक

Published by Newstrack Published: March 24, 2016 | 2:58 pm
Modified: August 10, 2016 | 3:58 am

आगरा में होली खेलते विदेशी पर्यटक

आगरा: हुरियारों की धूम मचाती, रंगों और मस्ती में सराबोर टोली। लाल, पीले, हरे, गुलाबी रंगों में अबूझे चेहरे और उड़ता गुलाल। ब्रज और मथुरा की होली के बाद यदि कहीं अद्भुत और मस्ती भरी होली होती है तो वह ताजनगरी में। यहां देशी ही नहीं, बल्कि विदेशी भी होली के रंगों में चूर रहते हैं। विदेशी सैलानियों ने अबीर और रंगों के साथ जमकर  डांस किया। कैमरे और सेल्फी लेकर यादों को संजोते रहे। ढोल-तासों की धुन पर कैरिबियाई, सांबा डांस किया।

ट्रेवल ट्रेड ने भुनाया होली का त्योहार
रंगों के त्योहार होली के साथ दुनिया को ताज दिखाने का ऐसा ऑफर आगरा को रास आया। आगरा के ट्रेवल ट्रेंड ने होली का हुल्लड़ खूब भुनाया। पहली बार होली का हुड़दंग देखने के लिए स्पेशल बुकिंग की गई। शहर के होटलों से लेकर ताजमहल के प्रवेश द्वार तक बनी रंगोली और उड़े गुलाल ने विदेशी पर्यटकों को भी होली के रंग में रंगने को मजबूर कर दिया।

सैकड़ों पर्यटकों ने की मस्ती
सैकड़ों पर्यटकों ने की मस्ती

 

क्या था कार्यक्रम
होली पर गुरुवार को कलाकृति में 250 विदेशी पर्यटकों के दल ने होली की मस्ती की। कलाकृति ग्रुप ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी से आए 250 विदेशी पर्यटकाें के लिए 10 से 11 बजे तक होली का हुल्लड़ आयोजित किया। पूर्णिमा पर चांदनी रात में डूबे ताज के दीदार के लिए विदेशी पर्यटक बुधवार को ही आगरा आ गए थे। होली की मस्ती में वह भी सराबोर रहे और हर्बल गुलाल से खूब होली भी खेली। 

होली के मुरीद हुए विदेशी युवा
विदेशी युवा भारतीय संस्कृति के मुरीद हो गए। पर्यटकों ने बताया कि यह त्योहार उनके दिल को छू गया। ऑस्ट्रेलिया से आई की मने ने बताया कि उनका दिल हिंदुस्तानी हो गया है। यहां के लोगों की सभ्यता, रिवाज, संस्कृति और आपसी भाईचारा उन्हें बेहद अच्छा लगा।

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वहीं, ईरान से आई फातिमा ने होली के रंगों में डूबकर मस्ती करना अपनी जिंदगी का सबसे अनमोल पल बताया।फ्रांस और अन्य देशों से आए पर्यटकों ने अगले साल दोबारा आकर इस त्योहार को मनाने की इच्छा जताई। कलाकृति की डॉ. राहत जहां ने कहा कि वो मुस्लिम होकर भी इस त्योहार को जमकर मनाती हैं, जैसे खून को देखकर कोई नहीं बता सकता कि कौन सा हिंदू का है कौन सा मुस्लीम का उसी तरह आज यहां रंग मे डूबे चेहरों को देखकर कोई नहीं बता सकता कौन देशी है कौन विदेशी। यहाँ तो होली के हुल्लड़ में सब हुरियारे है।

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