खौफ में काशी: 9 साल बाद फिर 23 तारीख को कोर्ट में फैली दहशत

वाराणसी : काशी की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में बम मिलने से कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील 23 तारीख से भयभीत हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछली बार 23 नवंबर 2007 को कोर्ट परिसर में बम ब्लास्ट हुआ था। शनिवार को जब बम मिलने की सूचना मिली तो वकीलों को उस 23 नवंबर की याद ताजा हो गई। यह संजोग है या साजिश कि 23 तारीख को ही कोर्ट परिसर में बम बरामद हुआ है। इस बात को लेकर चर्चाएं हो रही है।

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कब-कब हुए काशी में बम धमाके  
-23 फरवरी 2005 को दशाश्वमेध घाट में गंगा आरती से पहले बम विस्फोट हुआ था।
-जिसमें 7 की मौत और एक दर्जन लोग घायल हुए थे।

-28 जुलाई 2005 को वाराणसी-जौनपुर के श्रमजीवी एक्सप्रेस में विस्फोट हुआ था।
-जिसमें 5 की मौत दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

-7 मार्च 2006 को वाराणसी में संकठ मोचन मंदिर और कैंट रेलवे स्टेशन पर सीरियल बम ब्लास्ट हुआ था।
-जिसमें 18 लोगों की मौत समेत चार दर्जन लोग घायल हुए थे।

-23 नवंबर 2007 को सिविल कोर्ट और कलेक्ट्रेट परिसर में 2 स्थानों पर एक के बाद एक ब्लास्ट हुआ था।
-जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी और 50 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे।

-7 दिसंबर 2010 को एक बार फिर शीतला घाट पर गंगा आरती के दौरान हुआ ब्लास्ट हुआ था।
-जिसमें 2 साल की एक मासूम बच्ची मौत हो गई थी और 40 लोग घायल हुए थे।

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पुलिस की सक्रियता से बरामद हुआ बम
-डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में बम की सूचना मिलने से वाराणसी के वकील गुस्से में हैं।
-वकीलों का कहना है कि यह सब पुलिस की लापरवाही के वजह से हुआ है।
-जबकि एसएसपी आकाश कुलहरी ने बताया कि हमारी पुलिस की सक्रियता का ही परिणाम है कि कचहरी खुलने से पहले बम को बरामद कर लिया गया।

-एसएसपी ने कहा कि बम एक्टिव नहीं था और बीडीएस की टीम प्रतिदन काशी विश्वनाथ मंदिर, संकठ मोचन मंदिर और कचहरी समेत कैंट स्टेशन का संघन चेकिंग अभियान चलाती है।
-जिसका नतीजा है कि बम को बरामद कर डिफ्यूज कर दिया गया है।