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देश के लिए आज एक बहुत बड़ा दिन है, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जम्मू और कश्मीर से धारा 370 को समाप्त करने संबंधी प्रस्ताव पेश कर दिया। 

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 5 Aug 2019 4:36 PM GMT

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अक्टूबर तक तैयार हो जाएं पहले चरण के सभी 5 मेडिकल कॉलेज: मुख्यमंत्री

अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में कार्य प्रगति देखने के लिए किसी भी मेडिकल कॉलेज का दौरा करुंगा - मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

कार्यदायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली से मुख्यमंत्री खफा, विभागीय तालमेल बनाने को लेकर दिए निर्देश

निर्माण निगम में ई-टेंडरिंग की व्यवस्था का आडिट कराने के सीएम ने दिए निर्देश

मेडिकल कॉलेजों में भी पीजीआई पैटर्न को लागू करें

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोकभवन में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए कहा है कि पहले चरण के पांच मेडिकल कॉलेज (बस्ती, अयोध्या, शाहजहांपुर, फिरोजाबाद और बहराइच) 31 अक्टूबर तक तैयार मिलने चाहिए। 15 से 20 अगस्त के दौरान इनमें से किसी भी मेडिकल कॉलेज का दौरा कर उसकी प्रगति देखूंगा और अगर अपेक्षा के अनुरूप प्रगति नहीं रही तो कार्यदायी संस्था पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करुंगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक के दौरान राजकीय निर्माण निगम और सीएनडीएस की कार्यप्रणाली पर खासी नाराजगी जताई। निर्माण निगम के कार्य से मुख्यमंत्री खासे नाराज थे। उन्होंने सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि संस्था को ब्लैकलिस्ट करुंगा और उन्हें जेल भेजूंगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्था के प्रमुख पदों पर अधिकारियों की एक-दो महीने के लिए तैनाती न करें, क्योंकि ऐसे लोग सिर्फ पिकनिक मनाने आते हैं, इनकी कोई जवाबदेही नहीं होती है। महत्वपूर्ण पदों पर जिसकी तैनाती करें उसे पूरा कार्यकाल दें। संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर अनिवार्य रूप से जहां पर काम हो रहा है वहीं रहें, ना कि लखनऊ में।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी को निर्देश दिया कि वो कार्यदायी संस्थाओं को मजबूत करें और जो भी कार्य इन संस्थाओं को दिया जाता है उनका समय और गुणवत्ता सुनिश्चित कराएं। जरुरी हो तो इनके ई-टेंडरिंग की व्यवस्था का आडिट कराएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समीक्षा बैठकों में जो तय होता है उसका मिनट बनाएं और विभागीय अधिकारी उसकी नियमित समीक्षा करें। मुख्यमंत्री कार्यालय भी हर 15 दिन पर समीक्षा करें और अगर कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं है तो कार्यदायी संस्था को नोटिस भेजा जाए। नोटिस के बाद भी अगर काम तेजी से नहीं होता है कार्यदायी संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

5 मेडिकल कॉलेज में विद्युत संयोजन को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली विभाग के काम की गुणवत्ता ठीक नहीं है जिस पर विभाग ध्यान दें। जहां लाइन लॉस है उन क्षेत्रों को निजी कंपनियों को दे दें। विभाग में चोरी और बेईमानी कतई बदर्शत नहीं की जाएगी। कुछ अभियंताओं की जांच कराउंगा। प्रमुख सचिव ऊर्जा को निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जिले में विजिलेंस टीम बनाएं और बड़ी मछलियों के खिलाफ कार्रवाई करें।

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के समन्वय पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी योजना का सभी विभाग मिलकर कंप्लीट प्लान बनाएं। औपचारिकताओं के नाम पर काम में देरी नहीं होनी चाहिए। अगर आप निर्णय नहीं ले सकते हैं तो फील्ड में रहने की कोई जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में भी पीजीआई पैटर्न को लागू करें।

मालूम हो कि प्रदेश में केंद्र सरकार की मदद से 13 मेडिकल कॉलेज बनने हैं जिसमें पहले चरण में 5 और दूसरे चरण में 8 मेडिकल कालेज बनाए जाने हैं। बैठक में चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन, मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों को प्रमुख सचिव, कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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