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सृजन: पुरानी यादों पर आधारित कहानी, बीस साल बाद की याद

raghvendra

raghvendraBy raghvendra

Published on 21 Oct 2017 7:25 AM GMT

सृजन: पुरानी यादों पर आधारित कहानी, बीस साल बाद की याद
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ओ हेनरी

एक पुलिस अधिकारी बड़ी फुर्ती से सड़क पर गश्त कर रहा था। रात के कोई दस बजे होंगे। हलकी बारिश और ठंडी हवा के कारण सड़क पर बहुत कम लोग नजर आ रहे थे। सडक़ के एक छोर पर एक गोदाम था। जब पुलिस अधिकारी उस गोदाम के पास पहुंचा तो उसके दरवाजे के पास उसने एक आदमी को देखा। वह आदमी मुंह में बिना जला सिगार दबाए झुककर खड़ा था। पुलिस अधिकारी उस आदमी के पास गया तो वह आदमी बोला- मैं यहां अपने एक दोस्त का इंतजार कर रहा हूं।

हमने 20 साल पहले यहां मिलने का वादा किया था। आपको मेरी बात कुछ अजीब लग रही होगी,लेकिन यह सच है। यह कहकर उस आदमी ने माचिस की तीली जलाकर सिगार सुलगाया। उस जलती हुई तीली के उजाले में पुलिस अधिकारी ने उस आदमी का चेहरा देखा। उसका चेहरा पीला था, आंखों में चमक थी और दाहिनी आंख के ऊपर एक छोटा सा दाग था। उसके टाई पिन में एक बड़ा सा हीरा कुछ अजीब तरह से जड़ा हुआ था। उस आदमी ने दोबारा कहना शुरू किया- बीस साल पहले इस गोदाम की जगह बिग जो नाम का रेस्तरां हुआ करता था।

आज से ठीक बीस साल पहले ऐसी ही रात को मैंने अपने सबसे अच्छे दोस्त जिमी के साथ उस रेस्तरां में खाना खाया था। उस रात हमने तय किया था कि अगली सुबह हम अगले बीस साल के लिए एक-दूसरे से अलग हो जाएंगे। इन सालों में हम जीवन में कुछ बनने के लिए संघर्ष करेंगे और जो कुछ बन पाएंगे, बनेंगे। ठीक 20 साल बाद हम इसी समय यहीं पर फिर मिलेंगे। चाहे इसके लिए हमें कितनी ही दूर से क्यों न आना पड़े तथा हमारी कैसी भी परिस्थिति क्यों न हो।

यह सुनकर पुलिस अधिकारी ने कहा, यह तो बड़ी दिलचस्प बात है। वैसे जबसे आप जिमी से अलग हुए, क्या उसके बारे में आपको कुछ पता चला? कुछ समय तक तो हम एक-दूसरे को पत्र भेजते रहे,लेकिन यह सिलसिला सिर्फ एक-डेढ़ साल तक ही चल सका। उसके बाद बंद हो गया पर मुझे विश्वास है कि यदि जिमी जीवित होगा तो मुझसे मिलने जरूर यहां आएगा। मैं एक हजार किलोमीटर दूर से उससे मिलने के लिए यहां आया हूं। यह कहने के बाद उस आदमी ने अपनी घड़ी देखी। घड़ी में छोटे-छोटे हीरे जड़े हुए थे।

पुलिस अधिकारी ने अपना डंडा घुमाया और वहां से चला गया। करीब बीस मिनट बाद एक लंबा आदमी उस आदमी के पास आया। उसने ओवरकोट पहन रखा था तथा कॉलर से कानों को ढंका हुआ था। उसने पूछा ‘क्या तुम बॉब हो? क्या तुम जिमी वेल्स हो? इंतजार करने वाले आदमी ने खुशी से लगभग चिल्लाते हुए कहा। उस लम्बे आदमी ने खुशी से उसके हाथों को अपने हाथों में थाम लिया और बोला, हां बॉब चलो अब किसी अच्छी जगह बैठें और बीते दिनों की बातें करें। और दोनों एक-दूसरे का हाथ थामे हुए चल पड़े। दवाइयों की एक दुकान के सामने से गुजरते हुए उस दुकान की रोशनी में उन्होंने एक-दूसरे का चेहरा ठीक से देखा।

बॉब को उस लम्बे आदमी का चेहरा देखकर कुछ संदेह हुआ। फिर वह अचानक गुस्से में भडक़कर बोला, तुम जिमी वेल्स नहीं हो। मैं मानता हूं कि बीस वर्षों का समय बहुत अधिक होता है, लेकिन इतना भी अधिक नहीं कि एक आदमी की नाक चौड़ी से पतली हो जाए। इसके जवाब में उस लम्बे आदमी ने कहा, ऐसा होता है कि नहीं, मुझे नहीं पता, लेकिन 20 वर्षों में एक अच्छा आदमी बुरा आदमी बन जाता है।

20 वर्ष पहले तुम एक अच्छे आदमी थे, लेकिन आज एक बुरे आदमी बन गए हो। यह कागज लो और पढ़ो। बॉब ने कागज का टुकड़ा उसके हाथ से ले लिया और पढऩे लगा। जब उसने काग$ज को पूरा पढ़ लिया तो उसके हाथ कांपने लगे। कागज में लिखा था-बॉब हमने जहां मिलने का वादा किया था वहां मैं बिलकुल ठीक समय से पहुंच गया था,पर जब तुमने सिगार सुलगाने के लिए माचिस जलाई तो मैंने तुम्हारा चेहरा देखा और मुझे यह देखकर बहुत हैरत हुई कि तुम वही आदमी हो जिसकी तलाश शिकागो पुलिस कर रही है।

मुझे तुम्हें उसी वक्त गिरफ्तार कर लेना चाहिए था, लेकिन मैं तुम्हारा दोस्त होने के कारण यह काम नहीं कर सका। अब मैंने पुलिस के ही दूसरे आदमी को सादे कपड़ों में तुम्हें गिरफ्तार करने के लिए भेजा है।

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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