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कांप जाएगा रोम-रोम: सबसे ठंडा है ये गांव, यहां मांस पर जिंदा रहते हैं लोग

अंटार्कटिका के बाहर इसे दुनिया की सबसे ठंडी जगह माना जाता है। साल 1924 में इस जगह का तापमान -71.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। 2018 के आंकड़ों के मुताबिक यहां 500 से 900 लोग रहते हैं।

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SumanBy Suman

Published on 23 Dec 2020 3:43 AM GMT

कांप जाएगा रोम-रोम: सबसे ठंडा है ये गांव, यहां मांस पर जिंदा रहते हैं लोग
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यहां दिन में मुश्किल से 3-4 घंटे के लिए रोशनी होती है, बाकी 20-21 घंटे अंधेरा छाया रहता है। जबकि गर्मी के मौसम में यह बिल्कुल उल्टा हो जाता है। दिन 21 घंटे लंबा और रात महज 3 घंटे की होती है।
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नई दिल्ली देश के कई राज्यों में तापमान 4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचते ही लोगों कंपकंपी छूटने लगी है। पिछले एक हफ्ते से उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इन दिनों में भारत समेत दुनिया के कई शहरों में तापमान माइनस के नीचे चला जाता है। इस बार कई जगहों पर भीषण ठंड पड़ने की संभावना है। लेकिन क्या जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा गांव है जहां का न्यूनतम तापमान -71 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है?

मांस पर जिंदा लोग

दुनिया में एक ऐसा गांव है जहां का न्यूनतम तापमान -71 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है? यहां रहने वाले लोग घोड़े का मांस खाकर जिंदा रहते हैं। जी हां बात कर रहे हैं रूस के साइबेरिया के गांव ओम्याकोन की। ठंड में यहां लोगों का हाल बेहाल हो जाता है। यहां ठंड का आलम ये होता है कि यहां कोई भी फसल नहीं उगती है। लोग अधिकतर मांस खाकर जिंदा रहते हैं।

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पलकों पर बर्फ

अंटार्कटिका के बाहर इसे दुनिया की सबसे ठंडी जगह माना जाता है। साल 1924 में इस जगह का तापमान -71.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। 2018 के आंकड़ों के मुताबिक यहां 500 से 900 लोग रहते हैं। इस लोगों पर फ्रॉस्टबाइट या पाला मारने का खतरा हमेशा बना रहता है। यहां ठंड का आलम ये है कि जो लोग किसी काम से अपने घरों से बाहर निकले तो उनके बालों यहां तक की पलकों पर भी बर्फ जम गई।

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सर्दी के हिसाब से बड़े और बच्चों को मजबूत बनाया जाता

लोग ज्यादातर समय घर में ही दुबके रहते हैं। यहां की सर्दी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर खोलता हुआ पानी महज 1 मिनट में ही जम जाता है। सर्दियों के वक्त यहां बच्चे औसतन -50 डिग्री तापमान तक ही स्कूल जाते हैं। फिर यहां स्कूल भी बंद कर दिये जाते हैं। बच्चों को यहां के तापमान के हिसाब से सख्त बनाया जाता है। इस वजह से 11 साल से बच्चों को ठंड से बचने के लिए -56 डिग्री सेल्सियस तापमान के नीचे ही घर में रुकने की अनुमति होती है।

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हर वक्त गाड़ियां स्टार्ट

यहां रहने वाले लोगों को कई तरह की मुश्किल का सामना करना पड़ता है। गाड़ियों की बैट्री ना जमे इस वजह से गाड़ियों को हर वक्त स्टार्ट किए रहना पड़ता है। यहां कोई फसल नहीं उगती है. लोग रेंडियर और घोड़े का मांस और मछली खाते हैं। जून-जुलाई में जब दुनिया के कई हिस्सों में भयंकर गर्मी पड़ती है, तब यहां का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस होता है। यहां कई बार इतनी सर्दी पड़ी है कि उसे मापने वाला थर्मामीटर ही फट गया।

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दिन का तापमान -45 से -50 डिग्री सेल्सियस

सर्दियों में दिन का तापमान -45 से -50 डिग्री सेल्सियस तक होता है। ऐसे में सभी बच्चों को स्कूल जाना पड़ता है। दिसंबर के महीने में सूरज 10 बजे के करीब उगता है। यहां दिन में मुश्किल से 3-4 घंटे के लिए रोशनी होती है, बाकी 20-21 घंटे अंधेरा छाया रहता है। जबकि गर्मी के मौसम में यह बिल्कुल उल्टा हो जाता है। दिन 21 घंटे लंबा और रात महज 3 घंटे की होती है।

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