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यूपी में खिला कमल, खत्म हुआ वनवास, अब इंतजार 14 साल बाद कौन बनेगा 'राम' ?

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amanBy aman

Published on 11 March 2017 12:45 PM GMT

यूपी में खिला कमल, खत्म हुआ वनवास, अब इंतजार 14 साल बाद कौन बनेगा राम ?
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लखनऊ: यूपी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सत्ता की चाबी मिलती साफ तौर पर दिखाई दे रही है। इसके साथ ही इस बात की भी चर्चा शुरू हो गई है कि इस प्रचंड बहुमत के बाद सीएम कौन होगा? हालांकि, इस पर चर्चा के लिए बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक आज शाम बुलाई गई है। इस बैठक में चुनावी हार-जीत की समीक्षा होगी और जीते राज्यों में संभवतः सीएम का नाम भी तय होगा।

हालांकि, यूपी में बीजेपी के नेता कह रहे हैं कि पार्टी का संसदीय बोर्ड और विधायक दल नेता का चुनाव करेंगे। लेकिन बावजूद इसके कुछ नाम लगातार चर्चा में हैं। बीजेपी ने किसी चेहरे को आगे कर विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था।

चेहरा पेश करने पर मिला-जुला रहा परिणाम

लोकसभा के 2014 के चुनाव के बाद बीजेपी सिर्फ दिल्ली और असम में सीएम के चेहरे को आगे कर चुनाव लड़ी। हालांकि दिल्ली में उसे किरण बेदी के रूप में हार मिली, तो असम में सर्वानंद सोनोवाल के रूप में सफलता हासिल हुई।

उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सीएम पद के लिए इन नामों की जोरदार चर्चा है...

केशव प्रसाद मौर्य

सांसद केशव प्रसाद मौर्य को बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष बनाकर सभी को चौंका दिया था। उन्हें सीएम पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। केशव अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं, जो यूपी में पूरी तरह से बीजेपी के साथ खड़ा दिखा है। उन्होंने प्रचार के दौरान 100 से ज्यादा रैलियां कर कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पैठ बनाई है। इन्हें अध्यक्ष अमित शाह का करीबी भी माना जाता है।

मनोज सिन्हा

रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा गाजीपुर से सांसद हैं और सवर्णों के प्रतिनिधि के तौर पर देखे जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों के करीबी हैंं। ऐसे में यदि पूर्वी उत्तर प्रदेश से सीएम बनाने का फैसला हुआ तो उनकी लॉटरी लग सकती है।

दिनेश शर्मा

बीजेपी के उपाध्यक्ष और लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा पढ़ा-लिखा चेहरा माने जाते हैं। यूपी में सवर्णों की सबसे बड़ी आबादी ब्राह्मण जाति से आते हैं, उन्हें इसका फायदा मिल सकता है। इनके पक्ष में एक बात और जाती है कि वह गुजरात के प्रभारी हैं। इस नाते मोदी और अमित शाह के साथ उनके संबंध भी अच्छे हैं।

योगी आदित्यनाथ

योगी आदित्यनाथ बीजेपी के बड़े और जमीनी नेता हैं। गोरखपुर व आसपास के जिलों में इनका दबदबा भी है। लेकिन, इनकी कट्टरवादी हिंदू छवि इनके खिलाफ भी जा सकती है क्योंकि मोदी और अमित शाह ऐसे किसी नेता को यूपी की कमान नहीं देना चाहेंगे, जो बाद में उनकी अवहेलना करे। राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे सूबों में मजबूत क्षत्रपों को लेकर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व बहुत सहज नहीं रहा है। इसके बावजूद आदित्यनाथ की दावेदारी को खारिज नहीं किया जा सकता है।

महेश शर्मा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक सह सरकार्यवाह के करीबी महेश शर्मा भी दावेदारों की रेस में माने जा रहे हैं। फिलहाल वह नोएडा से सांसद और केंद्रीय मंत्री हैं।

श्रीकांत शर्मा

बीजेपी के सचिव श्रीकांत शर्मा जब मथुरा से चुनाव लड़ने पहुंचे तभी से उन्हें सियासी गलियारों में दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उनका कम अनुभव उनके आड़े आ सकता है।

राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वह 11 मार्च के बाद भी गृहमंत्री ही रहेंगे। लेकिन, सीएम के तौर पर उनका अनुभव किसी अन्य से उन्हें आगे खड़ा करता है।

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अमन कुमार, सात सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं। New Delhi Ymca में जर्नलिज्म की पढ़ाई के दौरान ही ये 'कृषि जागरण' पत्रिका से जुड़े। इस दौरान इनके कई लेख राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और कृषि से जुड़े मुद्दों पर छप चुके हैं। बाद में ये आकाशवाणी दिल्ली से जुड़े। इस दौरान ये फीचर यूनिट का हिस्सा बने और कई रेडियो फीचर पर टीम वर्क किया। फिर इन्होंने नई पारी की शुरुआत 'इंडिया न्यूज़' ग्रुप से की। यहां इन्होंने दैनिक समाचार पत्र 'आज समाज' के लिए हरियाणा, दिल्ली और जनरल डेस्क पर काम किया। इस दौरान इनके कई व्यंग्यात्मक लेख संपादकीय पन्ने पर छपते रहे। करीब दो सालों से वेब पोर्टल से जुड़े हैं।

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