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चुनावी मोड में बीजेपी, उतर प्रदेश को मोदीमय बनाने में जुटे शाह

Manali Rastogi

Manali RastogiBy Manali Rastogi

Published on 2 July 2018 7:40 AM GMT

चुनावी मोड में बीजेपी, उतर प्रदेश को मोदीमय बनाने में जुटे शाह
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बीजेपी की रणनीति पर मंथन करने चार जुलाई को वाराणसी पहुंचेंगे अमित शाह
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संजय तिवारी संजय तिवारी

वाराणसी: उत्तरप्रदेश को बीजेपी ने अब बिलकुल ही चुनावी मोड़ में डाल दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद ही इसकी बागडोर अपने हाथ ले ली है। वह इसी सिलसिले में 4 और 5 जुलाई को प्रदेश के दो क्षेत्रो में अपनी रणनीतिक बैठकें करने जा रहे हैं। पार्टी को मालूम है कि इस समय चुनावी गणित के हिसाब से इस प्रदेश में सब कुछ बहुत ठीक नहीं चल रहा है। लोकसभा चुनाव में यदि यूपी ने ठीक से साथ नहीं दिया तो सब किये कराये पर पानी फिर जाएगा।

इसलिए यह भी रणनीति बन रही है कि प्रदेश की योगी सरकार में भी कुछ बड़े फेरबदल किये जाय। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दो दिनों का प्रवास काशी में रखा जा रहा है। मोदी 15 और 16 को वाराणसी में रहेंगे। पार्टी आलाकमान की कोशिश है कि प्रदेश में रणातीति ऐसी काम करे जिससे सब मोदीमय हो जाय।

हर महीने एक जिले में मोदी की रैली

पार्टी में रणनीति से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि संतकबीरनगर से पार्टी का यह अभियान शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अब उत्तर प्रदेश के हर जिले में प्रतिमाह एक−एक रैली का कार्यक्रम तय किया जा रहा है जिससे कि विपक्षी दलों के महागठबंधन को धराशायी किया जा सके। रणनीति ऐसी बनायीं जा रही है जिससे चुनावी रण में मोदी सेनापति की तरह बखूबी लड़ सकें। इस अभेद्य व्यूह रचना को तैयार करने के लिये अमित शाह 4 एवं 5 जुलाई को उत्तर प्रदेश के दौरे पर आ रहे हैं।

खबर है कि अमित शाह 4 जुलाई को वाराणसी आएंगे और वहां से सीधे मिर्जापुर जाएंगे। यहां वह बीजेपी के काशी, गोरक्ष और अवध क्षेत्र के संगठनात्मक पदाधिकारियों और लोकसभा और विधानसभा सीट स्तर पर बनाये गए विस्तारकों के साथ बैठक करेंगे। इसी तरह की बैठक 5 जुलाई को ब्रज क्षेत्र आगरा में होगी। यहां शाह ब्रज पश्चिम और कानपुर क्षेत्र के पदाधिकारी और विस्तारकों के साथ रणनीतिक चर्चा करेंगे। लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने विस्तारकों की ड्यूटी लगा रखी है।

ये संगठन के पूर्णकालिक कार्यकर्ता होते हैं। यूपी में पार्टी के 163 विस्तारक हैं। शाह दोनों ही जगहों पर तीन चरणों में बैठक करेंगे। यहां वह विधानसभा व लोकसभा विस्तारक जो पिछले एक साल से क्षेत्रों में हैं, उनके साथ संवाद स्थापित कर जमीनी हकीकत समझेंगे। सांसदों और विधायकों दोनों के ही प्रदर्शन आंकने की यह कड़ी होगी। इसी आधार पर यह भी तय होगा कि किस सांसद का टिकट काटा जाये और किसका दोहराया जाये।

गठबंधन से मुकाबले के लिए भाजपा ने बदली रणनीति

पार्टी के सूत्र बता रहे हैं कि प्रदेश में बसपा−सपा के संभावित गठबंधन को लेकर रणनीति में बदलाव किया गया है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल में ही दिल्ली जाकर संघ के बड़े नेताओं से बातचीत की थी। शाह के इस दौरे को निकट भविष्य में प्रदेश में योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल और लोकसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

इसी लिए भाजपा का मातृ संगठन संघ पीछे से रणनीति बना रहा है तो अमित शाह ऊपर से नीचे तक पार्टी के पेंच कसने में लगे हैं। देश को सबसे अधिक 80 लोकसभा सीट देने वाले उत्तर प्रदेश को लेकर भारतीय जनता पार्टी बेहद गंभीर है। वर्ष 2013 में यूपी का प्रभारी बनने के बाद से ही अमित शाह का फोकस उत्तर प्रदेश में माइक्रो प्लानिंग पर रहा है।

प्रभारी रहते और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद ज्यादातर मौकों पर लखनऊ में बड़ी बैठकें करने के बजाय उन्होंने छोटे−छोटे जिलों में जाकर जमीनी कार्यकर्ताओं से संवाद को तवज्जो दी है। अब 2019 के लिए भी वह माइक्रो प्लानिंग पर ही जोर दे रहे हैं।

दो दर्जन से ज्यादा सांसदों के कटेंगे टिकट

सूत्रों के अनुसार पार्टी के लिए चिंता की बड़ी वजह लगभग दो दर्जन से ज्यादा वे संसदीय सीटें हैं जहा के सांसदों को लेकर वहा की जनता में काफी आक्रोश है। इन सांसदों की लगातार अनुपस्थिति या क्षेत्र की उपेक्षा के कारण लोगो का जो आक्रोश उभरा है उससे कैसे निजात पाया जाय , यह बहुत ही गंभीर विषय है।

अमित शाह इसी अभियान से यह भी पता लगाने की कोशिश करेंगे कि ऐसे सांसदों के टिकट काट दिए जाय तो क्या असर होगा। इन संगठनात्मक बैठकों में जहां अमित शाह नेताओं और कार्यकर्ताओं को सियासी जमीन मजबूत करने के गुर बताएंगे तो वहीं वर्चुअल मीडिया में भी फोकस बनाये रहने का तरीका बताया जायेगा।

मिर्जापुर जाने से पहले शाह पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में यूपी के आईटी सेल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान मोदी−योगी सरकार के विकास कार्यों की कैसे ब्रैंडिंग करनी है, विपक्ष पर हमले की दिशा क्या होगी और सोशल मीडिया पर जवाबी वार कैसे करना है, यह सब बताया जायेगा।

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